West Singhbhum Scam: मिड-डे मील में कीड़ा मिलने से मचा हड़कंप, भूखे पेट रहने को मजबूर हुए मासूम
पश्चिम सिंहभूम के खूंटपानी प्रखंड के बनामगुटू स्कूल में मध्यान्ह भोजन में कीड़ा मिलने से हड़कंप मच गया है। बच्चों के भूखे रहने, घटिया सेंट्रलाइज्ड किचन और प्रमुख सिद्धार्थ होनहागा की बड़ी कार्रवाई की पूरी लाइव ग्राउंड रिपोर्ट यहाँ देखें।
चाईबासा/खूंटपानी, 19 मई 2026 – झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिला अंतर्गत खूंटपानी प्रखंड से सरकारी दावों की पोल खोलने वाली एक बेहद शर्मनाक और हैरान करने वाली खबर सामने आई है। यहाँ के उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय बनामगुटू में मासूम बच्चों को परोसे गए मध्यान्ह भोजन (मिड-डे मील) की थाली में रेंगते हुए कीड़े मिलने के बाद पूरे स्कूल परिसर में अफरातफरी मच गई। इस घटिया और जानलेवा लापरवाही के विरोध में आक्रोशित बच्चों ने खाने को फेंक दिया और दिनभर भूखे-प्यासे रहकर ही पढ़ाई करने को मजबूर हुए। घटना की गूंज प्रशासनिक गलियारे तक पहुंचते ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने सीधे मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाल लिया है।
वारदात की दास्तां: थाली में रेंगते कीड़े, मासूमों की भूख और 'मैनेज्ड' वीआईपी चेकिंग का भंडाफोड़
यह पूरी घटना सरकारी दावों और एनजीओ की मनमानी का जीता-जागता सबूत है, जिसने व्यवस्था के चेहरे पर कालिख पोत दी है।
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बच्चों की थाली में मिला जहर: रोजाना की तरह बनामगुटू स्कूल में बच्चों को दोपहर का भोजन परोसा गया था। जैसे ही बच्चों ने खाना शुरू किया, चावल और दाल के बीच मरे और रेंगते हुए कीड़े दिखाई दिए। बच्चों के शोर मचाते ही स्कूल की शिक्षिका एंजिला हेम्ब्रम ने तुरंत भोजन परोसने पर रोक लगाई, लेकिन तब तक कई बच्चे सहम चुके थे। आक्रोशित बच्चों ने पूरा भोजन जमीन पर फेंक दिया।
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भूखे पेट पढ़ने को मजबूर नौनिहाल: इस खौफनाक मंजर के बाद स्कूल में दोबारा खाना नहीं बन सका। नतीजतन, गरीब परिवारों से आने वाले दर्जनों मासूम बच्चों को कड़कती धूप के बीच बिना कुछ खाए-पिए, भूखे पेट ही शाम तक क्लास में बैठना पड़ा।
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ग्राउंड जीरो पर पहुंचे जनप्रतिनिधि: शिक्षिका एंजिला हेम्ब्रम की लिखित शिकायत पर खूंटपानी प्रखंड प्रमुख सिद्धार्थ होनहागा और जिला परिषद सदस्य यमुना तियू बिना समय गंवाए आपातकालीन निरीक्षण के लिए बनामगुटू विद्यालय पहुंचे। उन्होंने वहां शिक्षकों और पीड़ित बच्चों से लाइव पूछताछ की।
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सेंट्रलाइज्ड किचन की खुली पोल: निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने गंभीर आरोप लगाया कि सेंट्रलाइज्ड किचन चलाने वाले एनजीओ द्वारा जो भोजन भेजा जा रहा है, वह पूरी तरह थर्ड-क्लास क्वालिटी का है। खाने में न तो हरी सब्जियां होती हैं और न ही पौष्टिक सामग्री। कई बार तो सड़े-गले आलू और बासी भोजन खपाने की शिकायतें भी सामने आ चुकी हैं।
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'सेटिंग' वाली जांच का सनसनीखेज आरोप: प्रखंड प्रमुख सिद्धार्थ होनहागा ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि जब भी जिला स्तर के उच्च अधिकारी जांच के लिए आने वाले होते हैं, तो एनजीओ के पास पहले ही सीक्रेट सूचना पहुंच जाती है। अधिकारी के आने वाले दिन वीआईपी और बेहद स्वादिष्ट भोजन भेजकर मामले को 'मैनेज' कर लिया जाता है, जबकि आम दिनों में गरीब बच्चों की थाली में कीड़े और कचरा परोसा जाता है।
प्रशासनिक रुख: एनजीओ का लाइसेंस रद्द करने की मांग, आंदोलन की बड़ी चेतावनी
इस गंभीर लापरवाही को लेकर अब खूंटपानी का स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग पूरी तरह बैकफुट पर है।
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सीधे लाइसेंस पर लटकी तलवार: प्रखंड प्रमुख और जिला परिषद सदस्य ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने साफ कहा कि बच्चों के जीवन और स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले संबंधित एनजीओ का टेंडर और लाइसेंस तुरंत प्रभाव से रद्द कर ब्लैकलिस्ट किया जाए।
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आर-पार के आंदोलन का अल्टीमेटम: जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसई) को चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटे के भीतर दोषी एनजीओ और अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं हुई, तो पूरे खूंटपानी और चाईबासा मुख्यालय में मध्यान्ह भोजन व्यवस्था के खिलाफ एक विशाल और उग्र जन-आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
मासूमों के निवाले पर डाका डालने वाले सफेदपोश कब सुधरेंगे
खूंटपानी के बनामगुटू स्कूल की यह घटना केवल एक प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि एक गंभीर आपराधिक कृत्य है। जिस देश में बच्चों को भगवान का रूप माना जाता है, वहां सरकारी बजट की बंदरबांट के चक्कर में एनजीओ द्वारा बच्चों को कीड़े वाला खाना परोसना और उन्हें दिनभर भूखे रहने पर मजबूर करना बेहद दुखद है। प्रमुख सिद्धार्थ होनहागा का यह आरोप कि 'जांच से पहले एनजीओ को सूचना मिल जाती है', शिक्षा विभाग के भीतर बैठे भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत को उजागर करता है। उपायुक्त (डीसी) को इस मामले में खुद संज्ञान लेकर ऐसी मिसाल कायम करनी चाहिए कि दोबारा झारखंड के किसी भी स्कूल में किसी गरीब के बच्चे को भूखे पेट पढ़ाई न करनी पड़े।
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