Digital Reality : मोबाइल की लत से टूटे परिवार के रिश्ते, 67% बच्चे मां-बाप से बात करने के बजाय एआई चैटबॉट का लेते हैं सहारा
वीवो की वार्षिक अध्ययन रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ। 72 प्रतिशत माता-पिता और 30 प्रतिशत बच्चे साथ खाने के समय भी फोन में व्यस्त रहते हैं। बच्चे अब मां-बाप की जगह एआई चैटबॉट को चुन रहे हैं। तकनीक ने परिवार के संबंधों को कमजोर कर दिया है।
नई दिल्ली, 15 दिसंबर 2025 – आज के डिजिटल दौर में, स्मार्टफोन ने न सिर्फ हमारा जीवन आसान बनाया है, बल्कि परिवारों के अंदर एक अदृश्य दरार भी डाल दी है। वीवो ने अपनी नवीनतम वार्षिक 'स्विच ऑफ' अध्ययन रिपोर्ट के सातवें संस्करण में इस गंभीर सामाजिक समस्या को उजागर किया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि माता-पिता और बच्चों दोनों में स्मार्टफोन चलाने की आदत इतनी बढ़ चुकी है कि अब वे साथ में खाना खाने के दौरान भी चलभाष का उपयोग करते हैं।
भोजन के समय भी चलभाष में व्यस्तता
वीवो के इस विस्तृत अध्ययन में यह समझने की कोशिश की गई कि परिवार बदलते डिजिटल परिदृश्य के साथ कैसे तालमेल बैठा रहे हैं। परिणाम चिंताजनक हैं।
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खाना खाते समय व्यस्तता: 72 प्रतिशत माता-पिता और 30 प्रतिशत बच्चे बातचीत करने की बजाए खाने की मेज पर चलभाष में व्यस्त रहना पसंद करते हैं।
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दैनिक उपयोग: माता-पिता (4.4 घंटे) और बच्चे (3.5 घंटे) प्रतिदिन स्मार्टफोन का उपयोग करते हैं। माता-पिता छोटे-छोटे समय के लिए चलभाष जाँचते हैं, जबकि बच्चे इसे मनोरंजन के लिए उपयोग करते हैं।
माता-पिता की व्यस्तता से एआई की ओर बच्चों का झुकाव
अध्ययन का एक सबसे चौंकाने वाला निष्कर्ष बच्चों का एआई उपकरणों के प्रति बढ़ता झुकाव है। बच्चों को लगता है कि उनके माता-पिता बहुत व्यस्त रहते हैं और उनके पास समय नहीं है, इसलिए वे एआई चैटबॉट का सहारा लेने लगे हैं।
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एआई का उपयोग: 67 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं, जो अपने माता-पिता के व्यस्त होने की वजह से एआई का उपयोग करते हैं और एआई से बातचीत करते हैं। इसके अलावा, बदलती शैक्षिक जरूरतों को देखते हुए 10-16 वर्ष के 54 प्रतिशत बच्चे दैनिक उपयोग में एआई का उपयोग गृहकार्य और आत्म-विकास के लिए कर रहे हैं।
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संबंधों पर प्रभाव: 4 में से 1 बच्चा साफ-तौर पर कहता है कि एआई की वजह से वे अपने माता-पिता से कम बात करते हैं।
'स्विच ऑफ' पहल और संतुलन की मांग
अच्छी बात यह है कि 91% बच्चों का कहना है कि जब चलभाष एक तरफ रख दिए जाते हैं, तो बातचीत ज्यादा आसान और अच्छी हो जाती है। यह समय परिवार के लोगों को एक दूसरे पर ध्यान देने और बातचीत करने का अवसर देता है।
वीवो इंडिया के कॉर्पोरेट रणनीति प्रमुख ने बताया है कि उनका मानना है कि तकनीक को रिश्तों को मजबूत करना चाहिए ना कि उनको दूर करने का काम करना चाहिए। इस वर्ष की रिपोर्ट दर्शाती है कि परिवार अपने डिजिटल और वास्तविक जीवन के बीच संतुलन बनाना चाहते हैं। इसीलिए कंपनी ने 'स्विच ऑफ पहल' की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य लोगों को डिजिटल की बजाए वास्तविक जीवन के रिश्ते को ज्यादा मजबूत करने पर जोर देना है।
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