Simdega Raid: सिमडेगा में पीएलएफआई के 9 उग्रवादी गिरफ्तार, सड़क निर्माण कंपनी के कैंप पर आगजनी और लेवी की थी बड़ी प्लानिंग
सिमडेगा पुलिस ने जलडेगा थाना क्षेत्र में सड़क निर्माण कंपनी के कैंप को फूंकने की साजिश रच रहे पीएलएफआई के 9 उग्रवादियों को गिरफ्तार किया है। लेवी वसूलने और दहशत फैलाने के इरादे से कारीमाटी पांगुर कैंप पर हमले की तैयारी में जुटे इन अपराधियों के पास से 10 मोबाइल भी बरामद हुए हैं। पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
सिमडेगा/जलडेगा, 20 मार्च 2026 – झारखंड के सिमडेगा जिले में उग्रवाद के खिलाफ पुलिस ने एक बहुत बड़ी कामयाबी हासिल की है। जलडेगा थाना क्षेत्र के कारीमाटी पांगुर स्थित एक सड़क निर्माण कंपनी के कैंप पर आगजनी और लेवी वसूली की खौफनाक साजिश का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने पीएलएफआई (PLFI) से जुड़े 9 उग्रवादियों को दबोच लिया है। 25 और 26 जनवरी की दरम्यानी रात को अंजाम देने वाली इस बड़ी वारदात को पुलिस की सक्रियता ने नाकाम कर दिया। पकड़े गए उग्रवादियों के पास से भारी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य बरामद हुए हैं, जो इलाके में फैले इनके नेटवर्क की पोल खोल रहे हैं।
आधी रात का 'ऑपरेशन आगजनी': उग्रवादियों का मास्टरप्लान
उग्रवादियों का इरादा इलाके में अपनी मौजूदगी दर्ज कराना और विकास कार्यों में बाधा डालकर मोटी रकम ऐंठना था।
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निशाने पर कैंप: लचड़ागढ़ से ओड़गा तक सड़क निर्माण का काम कर रही कंपनी SRMV DP (JV) का अस्थायी कैंप इनके निशाने पर था। उग्रवादियों ने योजना बनाई थी कि कैंप में खड़े भारी वाहनों और मशीनों को आग के हवाले कर दिया जाए।
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दहशत का खेल: इस आगजनी के जरिए वे कंपनी के अधिकारियों के मन में डर पैदा करना चाहते थे ताकि भविष्य में 'लेवी' (रंगदारी) मांगना आसान हो सके।
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समय रहते एक्शन: पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि कुछ संदिग्ध तत्व कैंप के पास रेकी कर रहे हैं, जिसके बाद एसपी के निर्देश पर तुरंत घेराबंदी शुरू की गई।
9 उग्रवादी सलाखों के पीछे: नाम आए सामने
अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर इस गिरोह का सफाया किया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की सूची लंबी है:
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जस्टिन तोपनो उर्फ जेम्स तोपनो
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हेरमन तोपनो
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करन लोहरा और करण लोहरा
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सिद्धांत कुमार चीक बड़ाईक
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दिनेश बरवा, मंगल तोपनो, आशीष मिंज और अमित कुमार।
पुलिस ने इनके पास से 10 मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इन फोनों के कॉल रिकॉर्ड्स और व्हाट्सएप चैट्स से कई सफेदपोश मददगारों और अन्य सहयोगियों के नाम सामने आने की उम्मीद है।
सिमडेगा और पीएलएफआई का 'लेवी' नेटवर्क
सिमडेगा का जलडेगा इलाका भौगोलिक रूप से जंगलों और पहाड़ी रास्तों से घिरा है, जिसका फायदा उठाकर उग्रवादी संगठन अक्सर निर्माण कंपनियों को सॉफ्ट टारगेट बनाते हैं।
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विकास पर प्रहार: सड़क निर्माण परियोजनाएं उग्रवादियों की आय का मुख्य स्रोत रही हैं। जब भी कोई नई सड़क बनती है, ये संगठन लेवी के लिए दबाव बनाते हैं।
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पुलिस की कड़ाई: सिमडेगा एसपी श्रीकांत एस. खोटरे के पदभार संभालने के बाद से उग्रवादी संगठनों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई गई है। यही वजह है कि 25 जनवरी की रात जो बड़ी घटना हो सकती थी, वह महज एक नाकाम कोशिश बनकर रह गई।
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सुरक्षा घेरा: गिरफ्तारी के बाद कारीमाटी पांगुर और आसपास के निर्माण स्थलों पर पुलिस बल की गश्त बढ़ा दी गई है। कंपनी के कर्मचारियों को सुरक्षा का पूरा भरोसा दिया गया है ताकि विकास कार्य न रुके।
जांच का दायरा: कौन है असली मास्टरमाइंड?
गिरफ्तार किए गए 9 उग्रवादी तो केवल मोहरे हो सकते हैं। पुलिस अब उस 'कमांडर' की तलाश में है जिसने इन्हें आगजनी का आदेश दिया था।
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तकनीकी जांच: जब्त किए गए 10 मोबाइलों को साइबर सेल भेजा गया है। पुलिस यह देख रही है कि ये उग्रवादी जेल में बंद किसी अपराधी या सीमा पार बैठे आकाओं के संपर्क में तो नहीं थे।
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सामाजिक प्रभाव: पुलिस ने ग्रामीणों से भी अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत दें। पुलिस का मानना है कि जनता के सहयोग के बिना उग्रवाद की जड़ें काटना मुश्किल है।
सिमडेगा पुलिस की इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि झारखंड में अब लेवी के नाम पर विकास कार्यों को रोकना आसान नहीं होगा। 9 उग्रवादियों की गिरफ्तारी पीएलएफआई के स्थानीय नेटवर्क के लिए एक बड़ा झटका है। कारीमाटी पांगुर कैंप अब सुरक्षित है और सड़क निर्माण का काम जारी है। क्या पुलिस इन गिरफ्तारियों के जरिए पीएलएफआई के फंड मैनेजरों तक पहुँच पाएगी? सिमडेगा की जनता अब शांति और सड़क, दोनों की उम्मीद कर रही है।
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