Simdega Liquor Bust: सिमडेगा में 196 बोतल अवैध शराब के साथ फरार आरोपी गिरफ्तार, घर और दुकान में बना रखा था गोदाम
सिमडेगा के जलडेगा में 196 बोतल अवैध अंग्रेजी शराब के साथ फरार आरोपी कृष्णा सिंह को पुलिस ने दबोच लिया है। भारी मात्रा में जब्त शराब और छापेमारी की पूरी इनसाइड रिपोर्ट यहाँ देखें।
सिमडेगा/झारखंड, 9 अप्रैल 2026 – झारखंड के सिमडेगा जिले में अवैध शराब के सौदागरों के खिलाफ पुलिस ने एक और निर्णायक जीत हासिल की है। जलडेगा थाना क्षेत्र के बांसजोर ओपी अंतर्गत पुलिस ने लंबे समय से फरार चल रहे अवैध शराब कारोबारी कृष्णा सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। गुरुवार को उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस की इस कार्रवाई से सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय शराब माफियाओं के बीच हड़कंप मचा हुआ है।
भारी बरामदगी: घर और दुकान से निकली 196 बोतलें
यह पूरा मामला पिछले महीने शुरू हुआ था, जब पुलिस को एक गुप्त सूचना मिली थी कि सिंहारजोर जामडीह गांव में अवैध शराब का एक बड़ा नेटवर्क संचालित हो रहा है।
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गोपनीय सूचना: पुलिस को खबर मिली थी कि कृष्णा सिंह ने अपने घर और बगल की दुकान को अवैध अंग्रेजी शराब के भंडारण केंद्र (Storage Hub) में बदल दिया है।
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मार्च की छापेमारी: सूचना के आधार पर पुलिस की टीम ने 25 मार्च को कृष्णा सिंह के ठिकानों पर दबिश दी थी।
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बड़ी खेप जब्त: उस दौरान पुलिस ने कुल 196 बोतल अवैध अंग्रेजी शराब बरामद की थी। हालांकि, पुलिस की भनक लगते ही मुख्य आरोपी कृष्णा सिंह चकमा देकर मौके से फरार होने में सफल रहा था।
फरारी का अंत: पुलिस के जाल में फंसा 'किंगपिन'
फरार होने के बाद से ही कृष्णा सिंह पुलिस की रडार पर था। जलडेगा पुलिस और बांसजोर ओपी की टीम लगातार उसके संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही थी।
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घेराबंदी: गुरुवार को पुलिस को सटीक लोकेशन मिली, जिसके बाद एक विशेष टीम ने उसे धर दबोचा।
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कानूनी कार्रवाई: गिरफ्तारी के बाद उसे जलडेगा थाना लाया गया, जहाँ आवश्यक पूछताछ के बाद उसे जेल भेज दिया गया।
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सप्लायरों की तलाश: पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इतनी बड़ी मात्रा में अंग्रेजी शराब कहाँ से लाई गई थी और इसका वितरण किन-किन क्षेत्रों में किया जाना था।
जंगलों के बीच अवैध तस्करी की चुनौतियां
सिमडेगा जिला अपनी भौगोलिक स्थिति और घने जंगलों के कारण सुरक्षा बलों के लिए हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है।
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ओडिशा सीमा का प्रभाव: सिमडेगा की सीमाएं ओडिशा से सटी होने के कारण यहाँ शराब और अन्य मादक पदार्थों की तस्करी के मामले अक्सर सामने आते हैं। इतिहास गवाह है कि तस्कर इन रास्तों का इस्तेमाल अवैध खेप को एक राज्य से दूसरे राज्य पहुँचाने के लिए करते हैं।
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पुलिस की सक्रियता: पिछले कुछ वर्षों में सिमडेगा पुलिस ने सूचना तंत्र को मजबूत कर अवैध शराब की दर्जनों भट्टियां ध्वस्त की हैं। जलडेगा और बांसजोर जैसे क्षेत्र अब पुलिस की विशेष निगरानी में हैं।
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सामाजिक प्रभाव: ग्रामीण इलाकों में अवैध शराब की बिक्री न केवल अपराध को बढ़ावा देती है, बल्कि स्थानीय युवाओं के भविष्य को भी अंधकार में डाल रही है। इसी को देखते हुए प्रशासन ने 'एंटी-लिकर ड्राइव' (Anti-Liquor Drive) को तेज कर दिया है।
अगली कार्रवाई: रडार पर हैं गिरोह के अन्य सदस्य
कृष्णा सिंह की गिरफ्तारी केवल एक शुरुआत है। पुलिस अब उन कड़ियों को जोड़ने में जुटी है जो इस धंधे के पीछे वित्त पोषण (Funding) करती हैं।
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नेटवर्क का पर्दाफाश: पुलिस को अंदेशा है कि कृष्णा सिंह के तार किसी बड़े अंतर्राज्यीय सिंडिकेट से जुड़े हो सकते हैं। जब्त की गई शराब की बोतलों के बैच नंबर और लेबल की जांच की जा रही है ताकि फैक्ट्री का पता लगाया जा सके।
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सघन गश्ती: ओपी प्रभारी ने बताया कि आने वाले दिनों में सीमावर्ती इलाकों में चेकिंग अभियान और तेज किया जाएगा। सड़कों के साथ-साथ जंगलों के रास्तों पर भी पैनी नजर रखी जा रही है।
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जनता से अपील: पुलिस ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अपने आसपास होने वाली किसी भी संदिग्ध गतिविधि या अवैध शराब की बिक्री की जानकारी तुरंत साझा करें।
सिमडेगा पुलिस की यह कामयाबी बताती है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और अपराधी चाहे कितनी भी कोशिश कर ले, वह बच नहीं सकता। 196 बोतल शराब की जब्ती और मुख्य आरोपी का जेल जाना जलडेगा क्षेत्र के लोगों के लिए एक बड़ी राहत है। यह रेड उन लोगों के लिए एक सख्त चेतावनी है जो अवैध कारोबार के जरिए रातों-रात अमीर बनने का सपना देख रहे हैं। फिलहाल, कृष्णा सिंह सलाखों के पीछे है और पुलिस की तफ्तीश जारी है।
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