Rajnagar Death: राजनगर के रुतडीह में तालाब से मिला लापता बुजुर्ग का शव, 24 घंटे की खोजबीन के बाद झुंगलू महतो की मौत की पुष्टि
राजनगर के रुतडीह गांव में 65 वर्षीय झुंगलू महतो का शव तालाब से बरामद हुआ है। सोमवार से लापता बुजुर्ग की तलाश, ग्रामीणों की व्याकुलता और सरायकेला सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम की पूरी इनसाइड रिपोर्ट यहाँ देखें।
राजनगर/सरायकेला, 8 अप्रैल 2026 – सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर प्रखंड अंतर्गत गोविंदपुर पंचायत से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। रुतडीह गांव के एक तालाब में डूबने से 65 वर्षीय बुजुर्ग झुंगलू महतो की असामयिक मौत हो गई। पिछले 24 घंटों से लापता बुजुर्ग की तलाश कर रहे परिजनों की उम्मीदें उस वक्त टूट गईं, जब मंगलवार की शाम ग्रामीणों ने उनका शव पानी में उतराता देखा। इस घटना ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है और स्थानीय प्रशासन ने शव को कब्जे में लेकर जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
सोमवार की सुबह और वो आखिरी सफर: जब घर नहीं लौटे झुंगलू
रुतडीह गांव के लोगों के लिए सोमवार की सुबह अन्य दिनों की तरह ही सामान्य थी, लेकिन झुंगलू महतो के परिवार के लिए यह काली रात की शुरुआत साबित हुई।
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लापता होने की खबर: झुंगलू महतो सोमवार सुबह घर से निकले थे, लेकिन जब सूरज ढल गया और रात गहराने लगी, तब भी वह वापस नहीं लौटे।
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अपनों की व्याकुलता: परिजनों ने रात भर गांव की गलियों, खेतों और रिश्तेदारों के यहाँ उनकी खोजबीन की, लेकिन उनका कहीं कोई सुराग नहीं मिला। मंगलवार की सुबह भी ग्रामीण टोली बनाकर उन्हें ढूंढते रहे।
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तालाब में मिला शव: मंगलवार शाम करीब 5 बजे, जब कुछ ग्रामीण गांव के तालाब की ओर गए, तो उन्हें पानी में एक अचेत शरीर दिखाई दिया। पास जाकर देखने पर पता चला कि यह झुंगलू महतो ही थे।
प्रशासनिक मुस्तैदी: समाजसेवी और ग्राम प्रधान की पहल
घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने तुरंत स्थानीय नेतृत्व को सूचना दी।
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त्वरित सूचना: ग्राम प्रधान और समाजसेवी अजय कुमार गोप को जैसे ही जानकारी मिली, उन्होंने बिना वक्त गंवाए राजनगर प्रशासन और पुलिस को घटना से अवगत कराया।
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शव का रेस्क्यू: पुलिस की टीम मौके पर पहुँची और ग्रामीणों की मदद से शव को बाहर निकाला गया। पुलिस ने पंचनामा तैयार कर शव को पोस्टमार्टम के लिए सरायकेला सदर अस्पताल भेज दिया है।
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जांच का दायरा: पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह एक दुर्घटना है या इसके पीछे कोई और कारण। हालांकि, प्राथमिक दृष्टि में यह तालाब में फिसलकर गिरने का मामला प्रतीत हो रहा है।
राजनगर और रुतडीह का भूगोल: असुरक्षित तालाब और खतरे
राजनगर प्रखंड का गोविंदपुर इलाका अपनी कृषि प्रधान संस्कृति के लिए जाना जाता है, जहाँ गांव का तालाब जीवन का मुख्य केंद्र होता है।
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तालाबों का महत्व: रुतडीह जैसे गांवों में लोग नहाने और मवेशियों को पानी पिलाने के लिए तालाबों पर निर्भर हैं, लेकिन घाटों की बदहाली अक्सर बुजुर्गों और बच्चों के लिए जानलेवा साबित होती है।
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ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य: राजनगर का यह क्षेत्र सरायकेला रियासत का हिस्सा रहा है और यहाँ के ग्रामीण जल संरचनाएं काफी पुरानी हैं। कई तालाबों के किनारे पक्की सीढ़ियां न होने के कारण बारिश के मौसम या फिसलन भरे रास्तों पर हादसे होते रहते हैं।
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सुरक्षा की मांग: इस घटना के बाद ग्रामीणों ने एक बार फिर गांव के सार्वजनिक तालाबों के घेराबंदी और घाटों के सुदृढ़ीकरण की मांग उठाई है ताकि भविष्य में कोई दूसरा झुंगलू महतो काल के गाल में न समाए।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
मृतक झुंगलू महतो अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। घर के मुखिया की इस तरह अचानक विदाई से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
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अंतिम संस्कार: पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा, जिसके बाद गांव के श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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समाजसेवी की अपील: अजय कुमार गोप ने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है और प्रशासन से उचित मुआवजे की मांग की है।
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गांव में सन्नाटा: रुतडीह गांव में आज किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला है। ग्रामीण एक-दूसरे को सांत्वना दे रहे हैं, लेकिन तालाब के किनारे पसरा सन्नाटा बहुत कुछ कह रहा है।
राजनगर की यह घटना हमें सतर्क करती है कि हमारे बुजुर्गों की सुरक्षा के प्रति समाज को और अधिक संवेदनशील होने की जरूरत है। झुंगलू महतो का जाना केवल एक परिवार की क्षति नहीं है, बल्कि पूरे रुतडीह गांव के लिए एक दुखद अध्याय है। प्रशासन की जांच जारी है और उम्मीद है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत के सही कारणों का खुलासा हो सकेगा। फिलहाल, पूरा गांव अपने उस बुजुर्ग साथी को याद कर रहा है जो एक सुबह घर से निकला तो था, लेकिन कभी लौटकर नहीं आया।
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