Potka Tragedy: पोटका पत्थर खदान में हाइवा पलटने से दो मजदूरों की मौत हुई, हादसे के पीछे ब्रेक फेल का राज
जमशेदपुर के पोटका थाना क्षेत्र के सरमंदा गांव स्थित पत्थर खदान में हाइवा पलटने से दो मजदूरों की मौके पर ही मौत हुई। शुभोजित गोप और टुकलू सरदार ने जान बचाने के लिए हाइवा से छलांग लगाई। दुर्घटना का मुख्य कारण ब्रेक फेल होना बताया जा रहा है। खदान मालिक और वाहन चालक से पुलिस पूछताछ कर रही है। ग्रामीणों ने खदान में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम न होने का आरोप लगाया, और प्रशासन से जांच की मांग की। जानिए इस दर्दनाक हादसे का पूरा सच।
जमशेदपुर, 12 नवंबर 2025 – जमशेदपुर से सटे पोटका थाना क्षेत्र के सरमंदा गांव स्थित पत्थर खदान में मंगलवार को एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने क्षेत्र के सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खनन के दौरान एक हाइवा अनियंत्रित होकर पलट गया, जिसके दबने से दो मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों की पहचान शुभोजित गोप (30) और टुकलू सरदार (28) के रूप में की गई है, दोनों ही सरमंदा गांव के निवासी थे। यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं है, बल्कि यह झारखंड में पत्थर खदानों में मजदूरों की सुरक्षा के साथ किए जा रहे समझौते का परिणाम है। आखिर हाइवा में बोल्डर लोड होने के बाद ही उसका ब्रेक क्यों फेल हुआ, और क्या खदान मालिक ने सुरक्षा उपकरणों और मानकों की जानबूझकर अनदेखी की?
ब्रेक फेल से हादसा: जान बचाने की कोशिश रही नाकाम
यह खदान मौजा सरमंदा में सुजीत कुमार मंडल के नाम से करीब तीन एकड़ भूमि पर लीज प्राप्त है। हादसा उस वक्त हुआ जब मजदूर दिनभर का काम खत्म कर रहे थे।
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कार्य प्रणाली: बुधवार को रोज की तरह मजदूर खदान में पत्थर निकालने और हाइवा में बोल्डर लोड करने का कार्य कर रहे थे।
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दुर्घटना: कार्य समाप्ति के बाद हाइवा में बोल्डर लोड कर ले जाया जा रहा था। तभी अचानक वाहन के ब्रेक फेल हो जाने के कारण ड्राइवर का हाइवा से नियंत्रण खो गया और वह पीछे की ओर लुढ़क गया।
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मौत: केबिन में मौजूद शुभोजित और डाले पर बैठे टुकलू ने कूदकर जान बचाने की कोशिश की, लेकिन हाइवा उनके ऊपर ही पलट गया। दब कर दोनों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
मजदूरों में हड़कंप: पुलिस ने जेसीबी से निकाले शव
हादसे के बाद खदान क्षेत्र में अफरा-तफरी और हड़कंप मच गया।
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सूचना: अन्य मजदूरों ने तुरंत पोटका थाना को घटना की सूचना दी।
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पुलिस कार्रवाई: मौके पर पहुंची पुलिस ने जेसीबी की मदद से दोनों शवों को बाहर निकाला और पोस्टमॉर्टम के लिए भेजवाया।
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जांच: पुलिस ने इस संबंध में खदान मालिक और वाहन चालक से पूछताछ शुरू कर दी है, ताकि पता चल सके कि हाइवा की सुरक्षा और रखरखाव में कमी थी या नहीं।
ग्रामीणों का आरोप: सुरक्षा मानकों की अनदेखी
स्थानीय ग्रामीणों ने इस हादसे के लिए सीधे तौर पर खदान प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है।
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गंभीर आरोप: ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि खदान में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। मजदूरों को बिना सेफ्टी उपकरण के खतरनाक हालात में काम करना पड़ता है।
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मांग: ग्रामीणों ने प्रशासन से खदान में सुरक्षा मानकों की जांच और मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है।
यह घटना एक कड़वा सच बयां करती है कि विकास की रफ्तार में मजदूरों की जान की कीमत अक्सर भुला दी जाती है। प्रशासन को इस मामले में तुरंत कठोर कदम उठाना चाहिए।
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