Tata Steel Plant Bust: केबल गैलरी के रास्ते प्लांट में घुसे तीन चोर, 75 किलो तांबा लेते पकड़े गए

टाटा स्टील प्लांट परिसर में रात 1 बजे केबल गैलरी से घुसे तीन चोर, 75 किलो तांबे का केबल चोरी करते पकड़े गए, सुरक्षा टीम ने की नाकाम।

Apr 24, 2026 - 14:14
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Tata Steel Plant Bust: केबल गैलरी के रास्ते प्लांट में घुसे तीन चोर, 75 किलो तांबा लेते पकड़े गए
Tata Steel Plant Bust: केबल गैलरी के रास्ते प्लांट में घुसे तीन चोर, 75 किलो तांबा लेते पकड़े गए

Jamshedpur Big Catch: जमशेदपुर के टाटा स्टील प्लांट परिसर में शुक्रवार तड़के करीब 1 बजे एक बड़ी चोरी की कोशिश को नाकाम कर दिया गया। सुरक्षा टीम ने तीन आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। आरोपी साकची क्षेत्र स्थित केबल गैलरी के रास्ते प्लांट में घुसे थे। उनके पास से करीब 75 किलो तांबे का केबल बरामद हुआ, जिसकी कीमत लाखों रुपये आंकी जा रही है।

गश्त पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने देखी संदिग्ध हरकत

घटना शुक्रवार रात करीब 1 बजे की है। प्लांट में गश्त कर रहे सुरक्षाकर्मियों ने केबल गैलरी के पास संदिग्ध आवाजें सुनीं। उन्होंने चुपके से नजदीक जाकर देखा तो तीन व्यक्ति केबल काट रहे थे। सुरक्षा टीम ने तुरंत प्लान बनाया और उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। आरोपी भागने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें दबोच लिया।

केबल लेकर फरार होने की फिराक में थे चोर

आरोपियों के पास से करीब 75 किलो तांबे का केबल बरामद किया गया। तांबा (कॉपर) की मौजूदा कीमतों को देखते हुए इसकी लागत लाखों में है। आरोपी केबल को तोड़कर उसके अंदर के तांबे को अलग करते और फिर उसे बेचते थे। तांबे का भाव काफी अधिक होता है, इसलिए औद्योगिक इकाइयों में केबल चोरी की घटनाएं आम हैं। लेकिन टाटा स्टील प्लांट में इस तरह की चोरी की कोशिश कम ही होती है। सुरक्षा टीम की सतर्कता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि प्लांट में चोरी करना आसान नहीं है।

टाटा स्टील प्लांट और इसकी सुरक्षा

टाटा स्टील प्लांट (पूर्व में टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी) की स्थापना 1907 में जमशेदजी टाटा ने की थी। यह भारत का पहला और एशिया का सबसे बड़ा स्टील प्लांट है। यह प्लांट सालों से जमशेदपुर की पहचान रहा है। प्लांट परिसर का फैलाव बेहद बड़ा है। इसलिए सुरक्षा का जाल भी बेहद जटिल है। चौबीसों घंटे सुरक्षाकर्मी गश्त करते हैं। हर एंट्री पॉइंट पर तलाशी ली जाती है। लैटेस्ट सर्विलांस सिस्टम लगे हैं। इसके बावजूद कभी-कभार कोई चोरी की कोशिश हो जाती है, लेकिन सुरक्षा टीम की त्वरित कार्रवाई से वह नाकाम हो जाती है। यह घटना भी उसी का उदाहरण है।

तीनों आरोपी कौन हैं और कहाँ से पकड़े गए?

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हुई है:

  • विकाश चिन्ना (ओल्ड सीतारामडेरा निवासी)

  • दीपक लोहार (बिरसानगर रोड नंबर 7 निवासी)

  • अविनाश मुखी (केबल टाउन बस्ती रोड नंबर 5 निवासी)

ये तीनों साकची के रहने वाले हैं। साकची इलाका जमशेदपुर का घनी आबादी वाला क्षेत्र है, जहाँ कई औद्योगिक इकाइयों के कर्मचारी रहते हैं। आरोपी शायद प्लांट की लोकेशन और केबल गैलरी के रास्तों से अच्छी तरह परिचित थे। पूछताछ में यह भी पता चल सकता है कि क्या उन्होंने पहले भी इसी तरह की घटनाओं को अंजाम दिया है।

कैसे की चोरी की योजना?

आरोपी साकची स्थित केबल गैलरी के रास्ते प्लांट में घुसे। केबल गैलरी एक भूमिगत या ऊंची नाली होती है, जहाँ से प्लांट के अंदर बिजली और संचार केबल गुजरती हैं। इन्हीं केबल्स को काटना और निकालना इनका काम था। गैलरी प्लांट के अंदर तक जाती है, तो अंदर घुसने के बाद केबल काटकर तांबा निकालने की कोशिश में थे। सुरक्षाकर्मियों के मुताबिक, अगर वे थोड़ी देर और बच जाते, तो कई मीटर केबल काट लिए होते।

सुरक्षा व्यवस्था और सख्त

घटना के बाद प्रशासन ने प्लांट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया है। खासकर केबल गैलरी और अन्य संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है। सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि घटना ने एक बार फिर सुरक्षा तंत्र की मुस्तैदी को साबित किया है।

क्या है कोई बड़ा गिरोह?

पुलिस को आशंका है कि ये तीनों किसी बड़े संगठित गिरोह का हिस्सा हो सकते हैं। अकेले तीन लोगों के लिए इतना बड़ा केबल चुराना और निकालना आसान नहीं है। उनके कुछ और साथी हो सकते हैं जो इस समय फरार हो गए। पुलिस इस मामले में गहन जांच कर रही है। आरोपियों से पूछताछ के बाद ही साफ होगा कि उनके और कितने साथी हैं और पिछले कुछ समय में कितनी चोरियां कर चुके हैं।

अब क्या होगा?

तीनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया है। पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है। हो सकता है कि उनकी निशानदेही पर और जगहों से भी चोरी के सामान बरामद हों। उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्लांट प्रशासन भी अपने स्तर पर जांच कर रहा है कि कहीं सुरक्षा में कोई सेंध तो नहीं है।

आपकी राय क्या है – क्या औद्योगिक इकाइयों में तांबा चोरी रोकने के लिए और सख्त कानून बनने चाहिए? कमेंट में बताएं।
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अपडेट के लिए बने रहें।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।