Palamu Teens Suicide: शादी में इंस्टाग्राम पर डांट से आहत 17 वर्षीय नंदिनी ने जहर खाकर तोड़ा दम
शादी में इंस्टाग्राम चलाने पर नानी की डांट से आहत 17 वर्षीय किशोरी ने जहर खाकर दे दी जान, रेहला थाना पुलिस जांच में जुटी।
Palamu Shocker: जिले के रेहला थाना क्षेत्र के गुरहा गांव में एक बेहद दुखद घटना सामने आई है। इंस्टाग्राम चलाने को लेकर हुई मामूली डांट-फटकार से आहत होकर 17 वर्षीय एक किशोरी ने जहर खाकर अपनी जान दे दी। यह घटना उस समय हुई जब वह अपनी नानी के घर शादी समारोह में आई थी।
नानी के घर शादी के खुशी का माहौल मातम में बदला
नंदिनी सिंह (17), जो कांडी थाना क्षेत्र के बहेरवा गांव की रहने वाली थी, अपनी मां के साथ गुरहा गांव (ननिहाल) एक रिश्तेदार की शादी में शामिल होने आई थी। शादी के इस खुशी के मौके पर वह लगातार अपने मोबाइल पर इंस्टाग्राम चलाने में व्यस्त थी। यह देखकर उसकी नानी ने उसे डांट लगाते हुए मोबाइल इस्तेमाल करने से मना किया।
नानी की झुंझलाहट ने ले ली मासूम की जान
परिजनों के अनुसार, नानी की यह साधारण सी डांट नंदिनी को इतनी नागवार गुजरी कि उसने गुस्से और आवेश में आकर जहर का सेवन कर लिया। यह एक ऐसी लापरवाही थी जिसने पूरे परिवार की खुशियां मातम में बदल दीं।
गढ़वा सदर अस्पताल में तोड़ा दम
हालत बिगड़ते देख परिजनों ने आनन-फानन में उसे उपचार के लिए गढ़वा सदर अस्पताल में भर्ती कराया। लेकिन किशोरी की स्थिति पहले से ही नाजुक थी, इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। जैसे ही यह खबर फैली, अस्पताल परिसर में कोहराम मच गया और मृतका की मां ने जमकर हंगामा किया।
मां का आरोप, लेकिन क्या की वजह?
मृतका की मां ने इसे लेकर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने केवल नानी को दोषी नहीं ठहराया, बल्कि यह भी कहा कि कहीं कोई प्रेम प्रसंग तो इसका कारण नहीं था? पुलिस दोनों एंगल से जांच कर रही है।
रेहला थाना कर रहा है जांच
रेहला थाना पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस पूछताछ में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या वास्तव में नानी की डांट ही इस आत्महत्या का इकलौता कारण था या फिर उससे पहले से ही किशोरी किसी मानसिक अवसाद से गुजर रही थी।
सोशल मीडिया परफेक्शन बनाम वास्तविक जीवन
विशेषज्ञों के अनुसार, आजकल किशोर-किशोरियाँ इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफार्म पर आभासी दुनिया में इतने डूब जाते हैं कि वे वहाँ की परफेक्ट लाइफ और अपनी वास्तविक जिंदगी के बीच तुलना करने लगते हैं। जब माता-पिता या बड़े-बुजुर्ग उन्हें टोकते हैं, तो वे इसे अपनी आज़ादी पर हमला या अपने अस्तित्व पर प्रहार समझते हैं। इस मामले में नंदिनी के साथ यही हुआ।
आपकी राय क्या है – क्या केवल डांट-फटकार ऐसी युवा आत्महत्याओं का कारण बन सकती है, या माता-पिता और समाज को मानसिक स्वास्थ्य पर पहले से ध्यान देना चाहिए? कमेंट में बताएं।
अगर आप या आपके आसपास कोई भी व्यक्ति मानसिक तनाव से गुजर रहा है, तो तुरंत काउंसलर या मनोचिकित्सक से संपर्क करें।
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