Liquor Update: झारखंड में शराब दुकानों के लिए फूड लाइसेंस अनिवार्य, मिलावटखोरों पर कसेगा शिकंजा
झारखंड सरकार शराब की दुकानों के लिए अब फूड लाइसेंस (FSSAI) अनिवार्य करने जा रही है। मिलावटी और नकली शराब पर लगाम लगाने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग ने उत्पाद विभाग को कड़ा प्रस्ताव भेजा है। शराब की बोतलों पर लेबलिंग और शुद्धता के नए मानकों की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
रांची/झारखंड, 21 मार्च 2026 – झारखंड में शराब के शौकीनों और इस कारोबार से जुड़े लोगों के लिए एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य सरकार अब शराब की बिक्री को लेकर अपने नियमों में आमूल-चूल बदलाव करने की तैयारी में है। खाद्य सुरक्षा विभाग (Food Safety Department) अब राज्य की सभी शराब दुकानों के लिए फूड लाइसेंस (FSSAI) अनिवार्य करने जा रहा है। इसके लिए विभाग के उच्चाधिकारियों ने उत्पाद विभाग के सचिव को एक औपचारिक प्रस्ताव भेजने की तैयारी पूरी कर ली है। इस नए नियम के लागू होते ही झारखंड की करीब 1300 शराब दुकानों को खाद्य मानकों की अग्निपरीक्षा से गुजरना होगा।
नकली और मिलावटी शराब पर 'सर्जिकल स्ट्राइक'
झारखंड में अक्सर नकली और मिलावटी शराब की खेप पकड़े जाने की खबरें आती रहती हैं। वर्तमान व्यवस्था में शराब दुकानों पर खाद्य सुरक्षा के कड़े नियम लागू नहीं होने के कारण दोषियों पर सख्त कार्रवाई करना चुनौतीपूर्ण होता था।
-
परिभाषा में बदलाव: खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम (FSSAI Act) के अनुसार, 'खाद्य पदार्थ' की श्रेणी में वह हर चीज शामिल है जिसे मनुष्य उपभोग करता है। इसमें बोतलबंद पानी से लेकर शराब तक शामिल है।
-
गुणवत्ता पर नजर: विशेषज्ञों का मानना है कि फूड लाइसेंस अनिवार्य होने से अब खाद्य सुरक्षा अधिकारी दुकानों से शराब के सैंपल ले सकेंगे। अगर शराब में मिलावट पाई गई, तो दुकानदार का लाइसेंस रद्द होने के साथ-साथ उन पर भारी जुर्माना और जेल की सजा भी हो सकती है।
-
उपभोक्ता सुरक्षा: इस कदम का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को जहरीली या घटिया दर्जे की शराब से बचाना है।
नई उत्पाद नीति और टेंडर का गणित
झारखंड में वर्तमान में नई उत्पाद नीति के तहत शराब दुकानों का संचालन निजी एजेंसियों के हाथों में है।
-
एक साल का कार्यकाल: निजी हाथों में टेंडर दिए जाने का एक साल अब पूरा होने वाला है। विभाग अब अगले टेंडर की प्रक्रिया शुरू करने की दिशा में बढ़ रहा है।
-
संशोधन की तैयारी: नए टेंडर जारी होने से पहले ही सरकार नियमों में यह बड़ा संशोधन करना चाहती है ताकि नई एजेंसियां पहले से ही फूड लाइसेंस की शर्त को स्वीकार करें।
-
देशव्यापी समानता: बिहार (प्रतिबंध से पहले), दिल्ली और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में यह नियम पहले से लागू है। झारखंड अब इसी कड़ी में शामिल होकर शराब की बिक्री को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की कोशिश कर रहा है।
लेबलिंग के सख्त नियम: अब बोतल पर दिखेगी पूरी कुंडली
सिर्फ लाइसेंस ही नहीं, बल्कि शराब की बोतलों की पैकेजिंग और लेबलिंग को लेकर भी नए नियम 'द फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (अल्कोहलिक बेवरेजेज) रेगुलेशन-2011' के तहत लागू होंगे।
-
अनिवार्य जानकारी: अब वाइन, बीयर, रम, वोदका और जिन की बोतलों पर अल्कोहल की मात्रा, निर्माण की तिथि और स्टोरेज के निर्देश साफ-साफ लिखने होंगे।
-
फेनी और ब्रांडी पर भी नजर: यह नियम केवल अंग्रेजी शराब तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देसी और अन्य अल्कोहलिक पेय पदार्थों पर भी समान रूप से लागू होगा।
-
भ्रामक दावों पर रोक: बोतलों पर किसी भी तरह के भ्रामक विज्ञापन या स्वास्थ्य संबंधी गलत दावों पर पूरी तरह पाबंदी होगी।
क्या बढ़ेंगी शराब की कीमतें?
इस प्रशासनिक फेरबदल के बाद बाजार में चर्चा है कि क्या लाइसेंस फीस और मानकों को पूरा करने के चक्कर में शराब की कीमतें बढ़ सकती हैं।
-
दुकानदारों की राय: शराब विक्रेताओं का कहना है कि फूड लाइसेंस लेने के लिए दुकानों में साफ-सफाई और स्टोरेज के मानकों को बदलना होगा, जिसमें अतिरिक्त निवेश की जरूरत पड़ेगी।
-
विभाग का तर्क: खाद्य सुरक्षा विभाग का कहना है कि यह शुल्क बहुत कम है और इसका असर कीमतों पर नहीं पड़ना चाहिए। सरकार का प्राथमिक उद्देश्य राजस्व से ज्यादा 'जन स्वास्थ्य' है।
झारखंड में शराब दुकानों के लिए फूड लाइसेंस अनिवार्य करना एक साहसिक और जरूरी कदम है। यह न केवल राजस्व प्रणाली को मजबूत करेगा, बल्कि मिलावटखोरों के नेटवर्क को भी ध्वस्त कर देगा। रांची से लेकर सुदूर गांवों तक फैली शराब की दुकानों पर अब प्रशासन की पैनी नजर होगी। क्या इस बदलाव के बाद झारखंड में नकली शराब का काला कारोबार पूरी तरह बंद हो पाएगा? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि अब शराब की हर बूंद पर 'शुद्धता की मुहर' जरूरी होगी।
What's Your Reaction?


