Jharkhand Crisis: झारखंड के 48 मजदूर अफ्रीका में फंसे, 3 माह से नहीं मिला वेतन, खाने के लिए भी संकट, जानें पूरा मामला

क्या आप जानते हैं कि गिरिडीह, बोकारो और हजारीबाग के 48 प्रवासी मजदूर अफ्रीका के ट्यूनीशिया में क्यों फंसे हैं? तीन माह से वेतन न मिलने के कारण उनके सामने खाने-पीने का संकट क्यों खड़ा हो गया है? सामाजिक कार्यकर्ता सिकन्दर अली ने सरकार से कौन सी बड़ी कूटनीतिक पहल की मांग की है? 6 माह पूर्व साउथ अफ्रीका से अपहरण किए गए मजदूरों का अब तक पता क्यों नहीं चला है? पूरी जानकारी पढ़ें!

Oct 31, 2025 - 14:08
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Jharkhand Crisis: झारखंड के 48 मजदूर अफ्रीका में फंसे, 3 माह से नहीं मिला वेतन, खाने के लिए भी संकट, जानें पूरा मामला
Jharkhand Crisis: झारखंड के 48 मजदूर अफ्रीका में फंसे, 3 माह से नहीं मिला वेतन, खाने के लिए भी संकट, जानें पूरा मामला

रांची, 31 अक्टूबर 2025 झारखंड के प्रवासी श्रमिकों का विदेशों में फंसने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अधिक पैसे कमाने की लालच में विदेश गए गिरिडीह, बोकारो और हजारीबाग जिले के कुल 48 मजदूर फिलहाल अफ्रीका के ट्यूनीशिया में फंसे हुए हैं। पिछले तीन माह से इन मजदूरों को कंपनी की ओर से वेतन का भुगतान नहीं किया गया है, जिसके चलते उनके सामने खाने-पीने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। उनका दर्द एक वायरल वीडियो संदेश में सामने आया है, जहां उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से सकुशल वतन वापसी की गुहार लगाई है।

ट्यूनीशिया से आया दर्दनाक वीडियो: 'हमारे पास खाने तक के पैसे नहीं बचे'

ट्यूनीशिया में फंसे 48 मजदूरों में हजारीबाग जिले (विष्णुगढ़) से 19, गिरिडीह से 14 और बोकारो जिले से 15 मजदूर शामिल हैं।

  • वेतन का भुगतान नहीं: इन सभी मजदूरों को पिछले तीन माह से कंपनी द्वारा वेतन नहीं दिया गया है, जिसके कारण वे बेहद बुरी हालत में हैं।

  • वीडियो संदेश: फंसे हुए मजदूरों ने एक भावुक वीडियो संदेश जारी किया है, जिसमें उन्होंने कहा है, "हम यहां बहुत बुरी हालत में हैं। कंपनी ने हमारा वेतन रोक दिया है और हमारे पास खाने तक के पैसे नहीं बचे हैं। हम बस किसी तरह अपने घर वापस लौटना चाहते हैं।" साथ ही उन्होंने अपने बकाया वेतन के भुगतान की भी जोरदार मांग की है।

झारखंड से पलायन का इतिहास सदियों पुराना है। यहां के मजदूर बेहतर रोजगार की तलाश में देश और दुनिया के कोने-कोने में जाते रहे हैं, लेकिन विदेशों में उनका फंसना और शोषण होना आज भी एक गंभीर सामाजिक और राजनीतिक समस्या बनी हुई है।

सामाजिक कार्यकर्ता की मांग: रोजगार की व्यवस्था करे सरकार

प्रवासी श्रमिकों के मुद्दे पर लगातार काम करनेवाले सामाजिक कार्यकर्ता सिकन्दर अली ने इस मामले में तत्काल सरकारी हस्तक्षेप की मांग की है।

  • कूटनीतिक पहल: सिकन्दर अली ने केंद्र और राज्य सरकार से मजदूरों के सकुशल वतन वापसी के लिए ठोस कूटनीतिक पहल करने की अपील की है।

  • पुरानी घटनाओं से सबक: उन्होंने कहा कि यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई बार मजदूर विदेश जाकर फंसे हैं और काफी मशक्कत के बाद उनकी वापसी कराई गई। उन्होंने अफसोस जताया कि इसके बावजूद मजदूर पुरानी घटनाओं से सबक नहीं ले रहे हैं।

  • अज्ञात अपहरण: सिकन्दर अली ने छह महीने पहले साउथ अफ्रीका के नाइजर से अपहरण किए गए बगोदर के पांच मजदूरों का भी जिक्र किया, जिनका अभी तक कोई पता नहीं चल सका है।

सामाजिक कार्यकर्ता ने साफ तौर पर कहा कि सरकार को विदेशों में हो रहे शोषण को रोकने के लिए मजदूरों के पलायन को रोकने हेतु स्थानीय स्तर पर रोजगार की स्थायी व्यवस्था करने की जरूरत है।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।