Jamtara Theft: जामताड़ा में आंधी-तूफान के बीच बैंक कर्मी के घर चोरी, खिड़की का ग्रिल काटकर घुसे चोर, कान की बाली और जेवर लेकर फरार
जामताड़ा के राजपल्ली में एसबीआई बैंक कर्मी के घर भीषण चोरी हुई है। आंधी-तूफान का फायदा उठाकर खिड़की का ग्रिल काटने, गहनों की लूट और पुलिस की नाकामी की पूरी इनसाइड रिपोर्ट यहाँ देखें।
जामताड़ा/झारखंड, 8 अप्रैल 2026 – साइबर अपराध के लिए दुनिया भर में चर्चित जामताड़ा अब 'सेंधमार' चोरों की नई चारागाह बनता जा रहा है। जिला मुख्यालय के अति सुरक्षित और घनी आबादी वाले राजपल्ली मोहल्ले में बीती रात चोरों ने एक बैंक कर्मी के घर को निशाना बनाकर पुलिस की गश्ती और सुरक्षा दावों की धज्जियां उड़ा दीं। आंधी-तूफान और मूसलाधार बारिश की ओट लेकर आए चोरों ने खिड़की का ग्रिल काटा और घर के भीतर रखे सोने-चांदी के जेवरात समेट कर रफूचक्कर हो गए। इस घटना ने शहर के संभ्रांत इलाकों में रहने वाले लोगों की नींद हराम कर दी है।
कुदरत का कहर और चोरों का 'चांस': रात 2 बजे का खूनी सन्नाटा
मंगलवार और बुधवार की दरम्यानी रात जामताड़ा में मौसम ने अचानक करवट ली। तेज हवाओं और गरज के साथ शुरू हुई बारिश ने जहाँ लोगों को गर्मी से राहत दी, वहीं चोरों के लिए यह 'सुनहरा मौका' बन गया।
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बैंक कर्मी का घर: अनुमंडल पदाधिकारी कार्यालय के प्रधान लिपिक बैजू झा के मकान में रहने वाले एसबीआई बैंक (बोदमा) के कैशियर प्रदीप चौबे के घर यह वारदात हुई।
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मूक दर्शक बना परिवार: प्रदीप चौबे अपनी पत्नी के साथ बगल वाले कमरे में सो रहे थे। रात करीब 2 से 2:30 बजे के बीच जब आंधी-तूफान चरम पर था, चोरों ने खिड़की का लोहा काटकर घर में प्रवेश किया।
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ध्वनि का धोखा: पीड़ित ने बताया कि तेज हवा और बारिश की गड़गड़ाहट के कारण उन्हें लगा कि कमरे में होने वाली आवाजें मौसम की वजह से हैं। इसी शोर का फायदा उठाकर चोरों ने इत्मीनान से अलमारियां खंगालीं।
क्या ले गए चोर: गहनों पर हाथ साफ, कैश से बचे
प्रदीप चौबे के अनुसार, चोरों का मुख्य निशाना कीमती जेवरात थे।
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गहनों की चोरी: चोरों ने उनकी पत्नी की सोने की कान की बाली, दो अंगूठी और चांदी के कई कीमती जेवर चुरा लिए।
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कैश की बचत: घर में उस समय बड़ी नकद राशि नहीं थी, जिसके कारण चोरों को केवल गहनों और कुछ कपड़ों से ही संतोष करना पड़ा।
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चौकीदार की नाकामी: राजपल्ली जैसे घनी आबादी वाले मोहल्ले में, जहाँ रात में बाकायदा चौकीदार तैनात रहते हैं, वहां इस तरह की सेंधमारी ने सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
साइबर ठगी के बाद अब 'सेंधमारी' का नया खतरा
जामताड़ा जिला मुख्यालय ऐतिहासिक रूप से एक शांत प्रशासनिक केंद्र रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में यहाँ अपराध के पैटर्न बदले हैं।
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साइबर बनाम फिजिकल क्राइम: जामताड़ा अक्सर ऑनलाइन ठगी (फिशिंग) के लिए सुर्खियों में रहता है, लेकिन अब 'लोकल गैंग्स' भौतिक रूप से घरों में घुसकर चोरी करने की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।
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सुरक्षा की कमी: राजपल्ली इलाका अधिकारियों और मध्यमवर्गीय परिवारों का केंद्र है। यहाँ चोरी होना यह दर्शाता है कि चोर अब पुलिस की गश्ती से डरना बंद कर चुके हैं।
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पुलिस की कार्यशैली: जामताड़ा पुलिस अक्सर साइबर अपराधियों को पकड़ने में जुटी रहती है, जिससे स्थानीय चोरी और छिनतई जैसी घटनाओं पर पकड़ ढीली पड़ गई है। लोगों का कहना है कि पुलिस का 'प्रिवेंटिव पेट्रोलिंग' (निवारक गश्त) सिस्टम पूरी तरह चरमरा गया है।
पूछताछ कर लौटी पुलिस, हाथ अब भी खाली
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस की एक टीम राजपल्ली पहुँची।
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जांच का खानापूर्ति: पुलिस ने मकान मालिक बैजू झा और किराएदार प्रदीप चौबे से पूछताछ की। आसपास के माहौल का जायजा लिया, लेकिन कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा। शुरुआती औपचारिकताएं पूरी कर पुलिस टीम वापस लौट गई।
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जनता का आक्रोश: राजपल्ली और आसपास के लोगों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि घनी आबादी में ग्रिल काटकर चोरी हो रही है और पुलिस केवल 'जांच' का आश्वासन दे रही है।
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सीसीटीवी की तलाश: पुलिस अब मोहल्ले में लगे निजी सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगालने की योजना बना रही है ताकि चोरों के भागने की दिशा का पता लगाया जा सके।
जामताड़ा में बैंक कर्मी के घर हुई यह चोरी केवल एक आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था के प्रति जनता के भरोसे की हार है। आंधी-तूफान का बहाना बनाकर चोरों ने जिस चालाकी से वारदात को अंजाम दिया, उससे साफ है कि उन्होंने पहले से घर की रेकी की थी। राजपल्ली के लोग अब खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। क्या जामताड़ा पुलिस इन चोरों को सलाखों के पीछे पहुँचा पाएगी या यह मामला भी पुरानी फाइलों की धूल चाटेगा? शहर अब जवाब मांग रहा है।
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