Satyarthi Action: सख्त चेतावनी, जमशेदपुर में सुस्त अफसरों पर गिरेगी गाज, करोड़ों की योजनाओं पर ब्लैकलिस्ट होगी कंपनियां
जमशेदपुर समाहरणालय में उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी के निर्देश पर विकास योजनाओं की बड़ी समीक्षा हुई है। फाइलों में दबे 90 फीसदी अधूरे प्रोजेक्ट्स और लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने के इस कड़े आदेश की पूरी रोंगटे खड़े कर देने वाली रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी अपने क्षेत्र की योजनाओं के अटकने का असली सच कभी नहीं जान पाएंगे।
जमशेदपुर, 7 जनवरी 2026 – पूर्वी सिंहभूम की विकास की रफ्तार में रोड़ा बनने वाले अधिकारियों और लापरवाह संवेदकों (Contractors) की अब खैर नहीं है। उपायुक्त श्री कर्ण सत्यार्थी के कड़े निर्देश पर उप विकास आयुक्त (DDC) नागेन्द्र पासवान ने बुधवार को समाहरणालय सभागार में विकास योजनाओं की 'सर्जिकल स्ट्राइक' समीक्षा की। बैठक का माहौल तब तनावपूर्ण हो गया जब यह सामने आया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 की 90 फीसदी योजनाएं अब भी कागजों और अधूरे निर्माण के बीच लटकी हुई हैं। डीडीसी ने दोटूक लहजे में चेतावनी दी है कि फरवरी-मार्च तक काम पूरा नहीं हुआ और फंड का इस्तेमाल नहीं हुआ, तो न केवल फाइलें बंद होंगी, बल्कि दोषी संवेदकों को ब्लैकलिस्ट कर हमेशा के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा।
फाइलों का ढेर और सुस्त रफ्तार: 90% योजनाएं अधूरी
समीक्षा बैठक में जिला योजना अनाबद्ध निधि और अन्य फंडों की हकीकत सामने आते ही प्रशासन सख्त हो गया।
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अनाबद्ध निधि का हाल: वित्तीय वर्ष 2024-25 की 117 योजनाओं में से अभी भी 40 फीसदी काम अधूरा है। वहीं, 2025-26 की 59 योजनाओं में से 90 फीसदी प्रोजेक्ट्स लटके हुए हैं।
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ब्लैकलिस्ट की तलवार: जिन योजनाओं में ठेकेदारों की लापरवाही पाई गई, वहां बिना किसी देरी के ब्लैकलिस्टिंग की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया गया है।
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जमीनी विवाद का हल: पुल-पुलिया, पीसीसी रोड और कल्वर्ट निर्माण में जहां भी भूमि विवाद आ रहा है, वहां अंचलाधिकारी (CO) और इंजीनियरों को संयुक्त निरीक्षण कर मौके पर ही समाधान निकालने को कहा गया है।
नीति आयोग और DMFT: जमशेदपुर को मिलेगा नया लुक
बैठक में केवल फटकार ही नहीं, बल्कि भविष्य के मॉडल टाउन की रूपरेखा पर भी चर्चा हुई।
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महिला सशक्तिकरण: नीति आयोग के फंड से ट्रांसजेंडर और महिलाओं के लिए फूड कार्ट और साल पत्ता प्लेट यूनिट जैसी योजनाएं धरातल पर उतारी जा रही हैं।
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मॉडल आंगनबाड़ी: जनजाति बहुल क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केंद्रों को हाई-टेक बनाया जा रहा है। साथ ही 68 स्कूलों में आधुनिक रसोई रूम का निर्माण अंतिम चरण में है।
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डिजिटल शिक्षा: साइंस सेंटर, दीक्षा शिक्षा केंद्र और डिजिटल लाइब्रेरी के लिए नए प्रस्ताव भारत सरकार को भेजे गए हैं, जो जिले की शिक्षा व्यवस्था को बदल देंगे।
जमशेदपुर विकास समीक्षा: योजनाओं का कच्चा चिट्ठा (Project Status)
| मद (Fund Type) | कुल स्वीकृत योजनाएं | वर्तमान स्थिति (Status) |
| अनाबद्ध निधि (25-26) | 59 | 90% अभी अपूर्ण |
| DMFT मद (21-26) | 428 | 80% पूर्ण, 5 रद्द |
| नीति आयोग (23-24) | 06 मुख्य योजनाएं | प्रगति पर (सुदृढ़ीकरण) |
| MP-MLA लैड | जनप्रतिनिधियों की अनुशंसा | प्राथमिकता पर पूर्ण करने का आदेश |
इतिहास और जवाबदेही: 'लौहनगरी' के विकास का प्रशासनिक सफर
जमशेदपुर, जिसे देश का पहला नियोजित औद्योगिक शहर होने का गौरव प्राप्त है, ऐतिहासिक रूप से अपनी सड़कों और बुनियादी ढांचे के लिए जाना जाता रहा है। हालांकि, सरकारी फंड (डीएमएफटी और अनाबद्ध निधि) के क्रियान्वयन में अक्सर 'रेड टैपिज्म' (लालफीताशाही) आड़े आती रही है। 2024 के बाद से प्रशासन ने डीएमएफटी (DMFT) मद के इस्तेमाल में पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग शुरू की है। इतिहास गवाह है कि जब-जब मार्च क्लोजिंग के समय फंड व्यय का दबाव बढ़ा है, निर्माण की गुणवत्ता से समझौते हुए हैं। यही कारण है कि उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने इस बार जनवरी में ही 'डेडलाइन' तय कर दी है, ताकि गुणवत्ता और पारदर्शिता (Transparency) दोनों बनी रहे।
जनप्रतिनिधियों की योजनाओं पर जोर: नहीं चलेगा विलंब
सांसद और विधायकों द्वारा अनुशंसित (MP-MLA LAD) योजनाओं को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया गया है।
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प्राथमिकता: डीडीसी ने स्पष्ट किया कि जनता के प्रतिनिधियों द्वारा सुझाई गई योजनाओं को ठंडे बस्ते में नहीं डाला जा सकता। इन्हें प्राथमिकता के आधार पर और बिना किसी नियम उल्लंघन के पूरा करना होगा।
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तकनीकी बाधाएं: डीएमएफटी मद की 5 योजनाओं को तकनीकी कारणों से रद्द किया गया है, जिसकी जांच रिपोर्ट तलब की गई है।
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पर्यटन और खेल: जिले में पर्यटन स्थलों के विकास और खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए बन रहे बुनियादी ढांचे की भी अलग से समीक्षा की गई।
सुधरें या सजा भुगतें
प्रशासन की इस महा-बैठक ने एक स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी खजाने का पैसा जनता की सुविधा के लिए है, न कि ठेकेदारों की जेब भरने या फाइलों में धूल फांकने के लिए। मार्च तक शत-प्रतिशत व्यय और गुणवत्तापूर्ण निर्माण ही अफसरों की साख बचा पाएगा।
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