IndiGo Flight: सरकार ने इंडिगो को 10% उड़ानें घटाने का आदेश, यात्रियों पर पड़ेगा असर
केंद्रीय उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने इंडिगो को बड़ा निर्देश दिया। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन को 10% परिचालन कटौती करनी पड़ी। रोज लगभग 215 उड़ानें कम होंगी। मंत्रालय ने यात्रियों के किराए की सीमा और सुविधा को लेकर सख्त निर्देश दिए हैं।
नई दिल्ली, 9 दिसंबर 2025 – केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने मंगलवार को देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो को एक बड़ा निर्देश दिया है। सरकारी आदेश के तहत, इंडिगो को अपने परिचालन में तत्काल 10% की कटौती करने को कहा गया है। यह फैसला यात्रियों को होने वाली असुविधा और उड़ानें निरस्त होने की बढ़ती घटनाओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
स्थिरता के लिए 10% उड़ानें घटाने का निर्देश
मंत्री राम मोहन नायडू ने सामाजिक मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में इस निर्णय की जानकारी दी। उन्होंने कहा, "मंत्रालय इंडिगो के सभी मार्गों में कटौती करना आवश्यक समझता है, जिससे एयरलाइन के परिचालन को स्थिर करने में मदद मिलेगी और उड़ान निरस्तीकरण कम होंगे।"
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215 उड़ानें कम: इस पाबंदी के परिणामस्वरूप, इंडिगो को प्रतिदिन लगभग 215 उड़ानें कम करनी पड़ेंगी। उड्डयन क्षेत्र के नियामक ने इंडिगो को अपने सर्दी के कार्यक्रम के तहत पहले हर दिन 2,145 उड़ानें उड़ाने की अनुमति दी थी।
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गंतव्यों पर असर: मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस कटौती का पालन करते हुए भी इंडिगो पहले की तरह अपने सभी निर्धारित गंतव्यों को कवर करती रहेगी।
रिफंड और सुविधाओं पर सख्त निर्देश
यह कटौती का आदेश उड्डयन मंत्रालय द्वारा इंडिगो के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पीटर एल्बर्स को बातचीत के लिए बुलाने के तुरंत बाद जारी किया गया।
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100% रिफंड: मंत्री नायडू ने बताया कि पीटर एल्बर्स ने मंत्रालय के अधिकारियों के सामने पुष्टि की कि 6 दिसंबर तक जिन उड़ानों का 100% पैसा वापस होना था, वह पूरा हो चुका है।
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यात्री हित: उन्होंने आगे कहा कि बाकी पैसा वापस करने और सामान सुपुर्दगी को तेजी से पूरा करने के लिए सख्त निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, इंडिगो को किराए की सीमा और यात्रियों की सुविधा के उपायों समेत उड्डयन मंत्रालय के सभी निर्देशों का पालन करने के लिए कहा गया है।
सरकार का यह हस्तक्षेप स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि यात्रियों की शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है और एयरलाइन को अपने सेवा मानकों को बेहतर बनाने के लिए मजबूर किया गया है।
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