Dhanbad Cyber: शहर में ठिकाना बदलकर चला रहे थे साइबर जाल, 3 गिरफ्तार
धनबाद में साइबर ठगी का बड़ा खुलासा। टुंडी से शहर में ठिकाना बदलकर ठगी का नेटवर्क चलाने वाले तीन आरोपी पकड़े गए। फर्जी आरटीओ चालान और रिवॉर्ड लिंक भेजकर लोगों का डेटा क्यों चुराया गया। तिहाड़ जेल जा चुके आरोपी इस गिरोह में क्या कर रहे थे।
धनबाद, 9 दिसंबर 2025 – धनबाद पुलिस (Police) ने साइबर ठगी (Cyber Fraud) के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के निर्देश पर गठित विशेष दल ने छापेमारी कर तीन साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, ये आरोपी शहर के अलग-अलग इलाकों में किराये पर मकान लेकर ठगी का पूरा जाल चला रहे थे। इस कार्रवाई के दौरान दल ने आठ मोबाइल फोन, छह सिम कार्ड और दो मोटरसाइकिलें जब्त की हैं।
फर्जी लिंक से चुराते थे निजी डेटा
ग्रामीण पुलिस अधीक्षक कपिल चौधरी ने प्रेस वार्ता (Press Conference) में बताया कि यह गिरोह पहले टुंडी इलाके में सक्रिय था। लेकिन पुलिस की बढ़ती दबिश के बाद इन लोगों ने शहर में अपना ठिकाना बदल लिया था।
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ठगी का तरीका: यह गिरोह फर्जी अनुप्रयोग फाइलें (APK File), आरटीओ चालान (RTO Challan) और एसबीआई पुरस्कार (SBI Reward) जैसे फर्जी लिंक भेजकर लोगों के मोबाइल से निजी डेटा चुराता था। डेटा चुराने के बाद, ये अपराधी उनके बैंक खातों से पैसे निकाल लेते थे।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान टुंडी के सचिन कुमार और महेश मंडल तथा तोपचांची के विनोद कुमार महतो के रूप में हुई है। जाँच में यह भी सामने आया है कि 21 वर्षीय सचिन कुमार खुद को छात्र बताता था, लेकिन पुलिस के अनुसार यही इस गिरोह को संचालित कर रहा था। महेश मंडल पहले भी साइबर अपराध के मामले में तिहाड़ जेल जा चुका है। इससे साफ है कि ये तीनों लंबे समय से ठगी में शामिल थे।
ठगी का जाल शहरों की ओर पसर रहा
ग्रामीण पुलिस अधीक्षक ने कहा कि जब्त मोबाइल और सिम कार्ड की तकनीकी जाँच की जा रही है। पुलिस का प्रयास है कि इस पूरे जाल का खुलासा हो सके और अन्य पीड़ितों की भी पहचान की जा सके।
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जागरूकता की जरूरत: धनबाद में इन साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी से यह साफ होता है कि ठगी का यह जाल अब लगातार शहरों की ओर बढ़ रहा है। फर्जी अनुप्रयोग और संदिग्ध संपर्क कड़ी के माध्यम से लोगों को निशाना बनाने के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। पुलिस की यह कार्रवाई महत्वपूर्ण है, लेकिन साइबर अपराध का यह तरीका बताता है कि जनता में जागरूकता बढ़ाना और तकनीकी निगरानी को मजबूत करना अब और भी आवश्यक हो गया है।
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