Hazaribagh Horror: हजारीबाग में अंधविश्वास की बलि चढ़ी मासूम, सगी मां ने ही भगताइन के साथ मिलकर रची थी हत्या की खौफनाक साजिश
हजारीबाग के विष्णुगढ़ में अंधविश्वास के चलते एक मां ने अपनी ही मासूम बेटी की बलि दे दी। भगताइन शांति देवी और भीम राम के साथ मिलकर किए गए इस खौफनाक कृत्य और पुलिस द्वारा किए गए सनसनीखेज खुलासे की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
हजारीबाग/विष्णुगढ़, 2 अप्रैल 2026 – झारखंड के हजारीबाग जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र में रामनवमी के मंगला जुलूस के दौरान लापता हुई एक मासूम बच्ची की मौत का जो सच सामने आया है, उसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए। यह कोई साधारण हत्या नहीं, बल्कि अंधविश्वास की वेदी पर चढ़ाई गई एक 'बलि' थी, और सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस खौफनाक साजिश में बच्ची की अपनी सगी मां ही मुख्य सूत्रधार निकली। डीआइजी अंजनी झा, एसपी अंजनी अंजन और डीसी शशि प्रकाश सिंह ने गुरुवार को इस मामले का पर्दाफाश करते हुए पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है।
अंधविश्वास का जाल: बेटे की परेशानी दूर करने के लिए बेटी की 'बलि'
25 मार्च की सुबह मिडिल स्कूल के पीछे मैदान से जब बच्ची का शव मिला था, तब किसी ने नहीं सोचा था कि इसके पीछे की वजह इतनी वीभत्स होगी।
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भगताइन की सलाह: पुलिस जांच में सामने आया कि बच्ची की मां, रेशमी देवी, पिछले एक साल से अपने बेटे सुधीर की समस्याओं को लेकर गांव की एक कथित भगताइन शांति देवी के पास चक्कर काट रही थी।
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कुंवारी लड़की का खून: भगताइन ने रेशमी को विश्वास दिलाया कि उसके बेटे के संकट को हमेशा के लिए दूर करने के लिए एक 'कुंवारी लड़की' की बलि देनी होगी। बेटे के मोह में अंधी हुई मां अपनी ही मासूम बेटी का खून बहाने के लिए तैयार हो गई।
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नक्षत्र और नक्षत्र का खेल: 24 मार्च की रात जब पूरा गांव मंगला जुलूस के जश्न में डूबा था, रेशमी अपनी छोटी बेटी को लेकर भगताइन के घर पहुँची। भगताइन ने 'शुभ नक्षत्र' का हवाला देते हुए रात 9 बजे का समय तय किया।
बांसबाड़ी में खूनी खेल: वह रात जब ममता का गला घोंटा गया
भगताइन शांति देवी ने बलि के कर्मकांड के लिए गांव के ही एक व्यक्ति भीम राम को साथ रखने को कहा, ताकि बलि के समय बच्ची को पकड़ा जा सके।
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तंत्र-मंत्र की साधना: सबसे पहले मनसा मंदिर के सामने बच्ची को बिठाकर तंत्र-मंत्र किया गया। इसके बाद उसे 'बांसबाड़ी' (भूत बांधने का स्थान) ले जाया गया।
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बेरहमी की हद: भगताइन के निर्देश पर भीम राम ने मासूम का गला घोंटना शुरू किया। जब बच्ची तड़पने लगी, तो उसकी अपनी सगी मां ने उसके दोनों पैर मजबूती से पकड़ लिए ताकि वह भाग न सके।
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पत्थर से प्रहार और लिपाई: जब बच्ची शांत हो गई, तो भगताइन ने आदेश दिया कि 'देवास' को खून चाहिए। भीम राम ने बच्ची के सिर पर पत्थर से प्रहार किया। उस मासूम के सिर से निकले खून से भगताइन ने जमीन की लिपाई-पुताई की और अपनी पूजा संपन्न की।
आधुनिक समाज पर एक काला धब्बा
झारखंड के ग्रामीण इलाकों में 'डायन बिसाही' और 'नरबलि' जैसी कुप्रथाओं का इतिहास काफी पुराना और दुखद रहा है।
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जागरूकता की कमी: हजारीबाग और गिरिडीह जैसे जिलों में आज भी शिक्षा के अभाव में लोग कथित ओझा और भगताइन के चंगुल में फंस जाते हैं। 21वीं सदी में भी 'बलि' के नाम पर हत्याएं होना प्रशासनिक और सामाजिक विफलता को दर्शाता है।
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SIT की सक्रियता: इस मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशिक्षु आइपीएस नागरगोजे शुभम भाउसाहेब के नेतृत्व में गठित एसआईटी ने वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों (Scientific & Technical Evidence) का सहारा लिया, जिससे अपराधी बच नहीं सके।
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कठोर कानून की मांग: स्थानीय लोगों में इस घटना के बाद भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने मांग की है कि ऐसे ढोंगी बाबाओं और भगताइन के खिलाफ कड़ा कानून बनाया जाए जो भोले-भले लोगों को बलि जैसे अपराधों के लिए उकसाते हैं।
पुलिस की कार्रवाई: दोषियों को मिलेगी कड़ी सजा
पुलिस ने इस मामले में तीनों मुख्य आरोपियों—भगताइन शांति देवी, मां रेशमी देवी और सहयोगी भीम राम—को गिरफ्तार कर लिया है।
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फास्ट ट्रैक ट्रायल: एसपी ने आश्वासन दिया है कि इस मामले में जल्द से जल्द चार्जशीट दाखिल की जाएगी ताकि दोषियों को स्पीडी ट्रायल के जरिए फांसी या उम्रकैद जैसी सख्त सजा दिलाई जा सके।
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SIT टीम का सम्मान: इस गुत्थी को सुलझाने में शामिल पदाधिकारियों, जिनमें वैद्यनाथ प्रसाद, अनुभव भारद्वाज और अन्य शामिल थे, उनकी तकनीकी शाखा के साथ सक्रियता की सराहना की गई है।
हजारीबाग की यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम वाकई एक सभ्य समाज की ओर बढ़ रहे हैं? एक मां का अपने ही बच्चे की हत्या में शामिल होना यह बताता है कि अंधविश्वास का जहर ममता से भी कहीं ज्यादा गहरा हो सकता है। मंगला जुलूस की वह रात विष्णुगढ़ के इतिहास में एक काले दिन के रूप में दर्ज हो गई है। पुलिस ने अपराधियों को तो पकड़ लिया है, लेकिन उस मासूम की चीखें शायद लंबे समय तक इस समाज के कानों में गूंजती रहेंगी। अब सबकी नजरें अदालत के फैसले पर टिकी हैं।
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