Giridih Drowning: शौच के लिए निकलीं दो मासूम बहनें, सुबह कुएं में मिले शव, गांव में मातम
गिरिडीह के सरिया में शौच के लिए निकली दो नाबालिग बच्चियों के शव कुएं में मिले, पूरे गांव में मातम। जानिए कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा।
गिरिडीह: जिले के सरिया थाना क्षेत्र से एक ऐसी दर्दनाक खबर आई है, जिसने हर किसी का दिल दहला दिया है। दो नाबालिग बच्चियां शुक्रवार रात शौच के लिए घर से निकलीं, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटीं। सुबह जब उनकी तलाश की गई, तो दोनों के शव गांव के एक कुएं में उतराते हुए मिले। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक की लहर है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
रात में शौच के लिए निकलीं थीं दोनों बच्चियां
घटना सरिया थाना क्षेत्र के लालोकोनी गांव की बताई जा रही है। मृतक बच्चियों की पहचान नगमा खातुन और साहिन प्रवीण के रूप में हुई है। दोनों शुक्रवार रात शौच के लिए घर से बाहर निकली थीं। जब काफी देर तक वापस नहीं लौटीं, तो परिजनों को चिंता हुई। उन्होंने आसपास तलाश की, लेकिन कुछ पता नहीं चला। देर रात होने के कारण तलाश रोकनी पड़ी।
सुबह कुएं में मिले शव, सनसनी फैल गई
शनिवार सुबह तलाश फिर से शुरू की गई। ग्रामीणों ने हर जगह ढूंढा, लेकिन बच्चियों का कोई सुराग नहीं लगा। इसी दौरान गांव के एक कुएं के पास कुछ लोगों ने देखा कि पानी में कुछ उतरा रहा है। पास जाकर देखा तो उनके होश उड़ गए - दोनों बच्चियों के शव कुएं के पानी में तैर रहे थे। चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों की मदद से दोनों शवों को कुएं से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
पुलिस ने शव कब्जे में लेकर शुरू की जांच
घटना की सूचना मिलते ही सरिया थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया। थाना प्रभारी पिंकू कुमार ने बताया कि मामले की गहन जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर बच्चियां कैसे कुएं तक पहुंची और उनके डूबने का कारण क्या है।
गिरिडीह का इतिहास और बढ़ते कुएं हादसे
गिरिडीह जिला अपनी प्राकृतिक सुंदरता, पहाड़ियों और जलाशयों के लिए जाना जाता है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में कुएं और तालाबों में डूबने की घटनाएं बढ़ी हैं। खासकर ग्रामीण इलाकों में जहां शौच के लिए घर से बाहर जाना पड़ता है, वहां अंधेरे में कुएं और गड्ढे दिखाई नहीं देते। इसकी चपेट में कई बार मासूम बच्चे और बुजुर्ग आ जाते हैं।
इतिहास गवाह है कि इससे पहले भी झारखंड के विभिन्न जिलों में ऐसी दर्दनाक घटनाएं हो चुकी हैं। बावजूद इसके, कुओं के आसपास सुरक्षा दीवार या ढक्कन लगाने की व्यवस्था नहीं हो पाई है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते कुएं को ढक दिया जाता, तो शायद इन मासूम जानों को बचाया जा सकता था।
गांव में मातम, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
इस घटना के बाद पूरे लालोकोनी गांव में मातम छा गया है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। दोनों बच्चियों की मां और पिता अपनी बच्चियों की याद में बिलख-बिलख कर रहे हैं। पड़ोसी और रिश्तेदार परिजनों को ढांढस बंधाने में लगे हैं, लेकिन उनका दर्द कम होते नहीं दिख रहा।
एक ग्रामीण ने बताया, "दोनों बच्चियां बेहद मासूम थीं। उन्हें देखकर लगता था मानो फूल खिले हों। आज वह फूल हमेशा के लिए मुरझा गए।" ग्रामीणों ने प्रशासन से कुओं को ढकवाने और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है।
जनप्रतिनिधि ने जताया दुख
इस घटना को लेकर जिप सदस्य अनुप कुमार पांडेय ने गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि सूचना मिलते ही पुलिस को अवगत कराया गया और अब मामले की गहन जांच की जा रही है। उन्होंने प्रशासन से ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।
लोग इस सवाल के जवाब की तलाश में
पूरा गांव इस सवाल का जवाब तलाश रहा है कि आखिर दोनों बच्चियां कैसे कुएं तक पहुंच गईं? क्या वे अंधेरे में कुएं में गिर गईं? या फिर कोई और वजह थी? पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ और साफ हो पाएगा।
गिरिडीह की इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण इलाकों में कुएं कितने घातक साबित हो सकते हैं। क्या हम अपने आसपास के कुओं को ढकवाने के लिए आवाज उठाएंगे? यह खबर पढ़कर आप भी सावधान हो जाइए और अपने गांव या मोहल्ले के खुले कुओं पर ढक्कन लगवाने की पहल कीजिए। इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि कोई और मासूम जान इस तरह न जाए।
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