Kolkata Raid: ममता भड़कीं, I-PAC पर ED का छापा, हार्ड डिस्क जब्त, प्रतीक जैन के घर पहुंचीं दीदी
कोलकाता में प्रशांत किशोर द्वारा स्थापित I-PAC के दफ्तर और हेड प्रतीक जैन के घर पर ED की छापेमारी से देश की राजनीति में भूचाल आ गया है। ममता बनर्जी का अमित शाह पर सीधा हमला और चुनावी डेटा वाली हार्ड डिस्क जब्त होने के पीछे छिपे असली सच की पूरी रोंगटे खड़े कर देने वाली रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी इस चुनावी मशीनरी के अंत को कभी नहीं देख पाएंगे।
कोलकाता/नई दिल्ली, 8 जनवरी 2026 – पश्चिम बंगाल की राजनीति में गुरुवार की सुबह एक बड़े धमाके के साथ हुई। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चुनावी रणनीतियों के 'पावरहाउस' कहे जाने वाले I-PAC (Indian Political Action Committee) के कोलकाता दफ्तर और इसके प्रमुख पदाधिकारी प्रतीक जैन के आवास पर एक साथ छापेमारी की। कार्रवाई की खबर मिलते ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी प्रोटोकॉल तोड़कर सीधे प्रतीक जैन के घर पहुँच गईं, जिसने इस छापेमारी को विशुद्ध राजनीतिक रंग दे दिया है। ममता बनर्जी ने इस कार्रवाई को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की 'प्रतिशोध की राजनीति' करार देते हुए दावा किया कि अफसरों ने चुनावी डेटा से भरी महत्वपूर्ण हार्ड डिस्क को अपने कब्जे में ले लिया है।
I-PAC: वह अदृश्य शक्ति जो सरकारें बनाती और गिराती है
I-PAC महज एक संस्था नहीं, बल्कि आधुनिक भारत की 'चुनावी फैक्ट्री' है।
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क्या है यह संस्था? आसान भाषा में कहें तो यह किसी नेता या दल के लिए 'वॉर-रूम' की तरह काम करती है। यह डेटा, टेक्नोलॉजी और ग्राउंड रिसर्च के जरिए यह तय करती है कि जनता को क्या बोलना है और वोट कैसे हासिल करना है।
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इतिहास का पन्ना: इसकी शुरुआत साल 2013 में 'CAG' (Citizens for Accountable Governance) के रूप में हुई थी। चुनावी रणनीतिकार और 'जन सुराज' के सूत्रधार प्रशांत किशोर (PK) इसके सबसे बड़े चेहरे रहे हैं। हालांकि अब वे आधिकारिक तौर पर अलग हैं, लेकिन माना जाता है कि इसकी बागडोर आज भी उनके भरोसेमंद सहयोगियों प्रतीक जैन, ऋषि राज सिंह और विनेश चंदेल के हाथों में है।
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काम का तरीका: I-PAC चार स्तंभों पर टिकी है—ग्राउंड नेटवर्क, डीप रिसर्च, डेटा टेक्नोलॉजी और डिजिटल नैरेटिव।
ममता का मास्टरस्ट्रोक: प्रतीक जैन के घर पहुँचकर दी चुनौती
ED की इस रेड ने ममता बनर्जी को आगबबूला कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके IT सेल और चुनावी रणनीतिकारों को दुर्भावना के तहत निशाना बनाया जा रहा है।
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हार्ड डिस्क का रहस्य: ममता का कहना है कि ED ने वह सारा डेटा जब्त कर लिया है जो आने वाले चुनावों की रणनीति का हिस्सा था।
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कोल स्कैम कनेक्शन? चर्चा है कि यह छापेमारी मनी लॉन्ड्रिंग के किसी पुराने मामले या कोल स्कैम (Coal Scam) की कड़ियों से जुड़ी हो सकती है, हालांकि ED ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
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IT सेल पर हमला: टीएमसी का दावा है कि केंद्र सरकार विपक्षी दलों की डिजिटल ताकत को कुचलना चाहती है।
I-PAC के बड़े चुनावी अभियान: एक नजर में (Campaign History)
| वर्ष | राज्य | नेता/दल | प्रमुख कैंपेन (Campaign) |
| 2015 | बिहार | नीतीश कुमार | 'नीतीश के सात निश्चय' |
| 2019 | आंध्र प्रदेश | जगन मोहन रेड्डी | 'जगनन्ना नवरातनलु' |
| 2020 | दिल्ली | अरविंद केजरीवाल | 'केजरीवाल की 10 गारंटी' |
| 2021 | प. बंगाल | ममता बनर्जी | 'दीदीर दूत' / 'खेला होबे' |
| 2021 | तमिलनाडु | एमके स्टालिन | 'उंगालिल ओरुवन' |
पीके का 'ब्रैकेट' और आई-पैक की ताकत: कैसे काम करती है टीम?
प्रशांत किशोर ने जब 2013 में इस मॉडल की शुरुआत की थी, तब किसी ने नहीं सोचा था कि युवा प्रोफेशनल्स की एक टीम जमे-जमाए नेताओं की किस्मत बदल देगी।
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प्रोफेशनल आर्मी: वर्तमान में I-PAC से 400 से ज्यादा फुल-टाइम सदस्य और 82 हजार से ज्यादा वॉलंटियर्स जुड़े हैं। इसमें IIT और IIM जैसे संस्थानों से निकले युवा रिसर्च और डेटा एनालिसिस करते हैं।
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मोटी सैलरी और ट्रांसफर: यहाँ काम करने वाले प्रोफेशनल्स को मोटी सैलरी दी जाती है क्योंकि चुनावी समय में काम के घंटे तय नहीं होते। कई बार लोकेशन बदलने और 24x7 वॉर-रूम में रहने की शर्त पर ये युवा अपनी पूरी कीमत वसूलते हैं।
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प्रशांत किशोर का रोल: पीके भले ही अब अपनी 'जन सुराज' यात्रा में व्यस्त हों, लेकिन I-PAC की कार्यप्रणाली आज भी उन्हीं के 'डेटा-ड्रिवन' मॉडल पर आधारित है।
ED की कार्रवाई: मनी लॉन्ड्रिंग या सियासी घेराबंदी?
इस छापेमारी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या वाकई I-PAC के खातों में कुछ संदिग्ध मिला है या यह सिर्फ विपक्ष की घेराबंदी है?
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डेटा सिक्योरिटी: अगर चुनावी डेटा लीक होता है, तो यह किसी भी पार्टी की रणनीति को सार्वजनिक करने जैसा होगा।
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वॉर-रूम पर ताला: छापेमारी की वजह से कोलकाता ऑफिस का कामकाज ठप पड़ गया है, जिसका सीधा असर तृणमूल कांग्रेस के भविष्य के अभियानों पर पड़ सकता है।
आगे क्या?
ED की यह जांच कहाँ तक जाएगी, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। लेकिन ममता बनर्जी का प्रतीक जैन के घर जाना यह साबित करता है कि I-PAC अब सिर्फ एक कंसल्टेंसी फर्म नहीं, बल्कि टीएमसी के वजूद का एक हिस्सा बन चुकी है।
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