Chatra Bust: बिहार सीमा पर टेंपो से कूदकर भाग रहा था तस्कर, पुलिस ने दौड़ाकर दबोचा, 14.50 लाख की अफीम के साथ दिल्ली का सिंडिकेट फेल
चतरा के हंटरगंज में झारखंड-बिहार सीमा पर पुलिस ने गोसाईडीह के पास 14.50 लाख रुपये की अफीम के साथ तस्कर अनिल यादव को गिरफ्तार किया है। दिल्ली भेजे जा रहे ड्रग्स नेटवर्क और एसडीपीओ संदीप सुमन की इस बड़ी कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
चतरा, 19 मई 2026 – झारखंड-बिहार सीमा पर सक्रिय अंतरराज्यीय ड्रग्स माफियाओं के खिलाफ चतरा जिला पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी और सर्जिकल स्ट्राइक की है। हंटरगंज थाना पुलिस ने खफिया इनपुट के आधार पर बिहार बॉर्डर से सटे गोसाईडीह इलाके में घेराबंदी कर एक ऐसे शातिर तस्कर को दबोचा है, जो सवारी टेंपो में छिपकर लाखों रुपये की अफीम दिल्ली ले जाने की फिराक में था। पुलिस की नाकेबंदी देखकर आरोपी ने भागने की पूरी कोशिश की, लेकिन मुस्तैद जवानों ने उसे चारों तरफ से घेरकर धर दबोचा। इस सनसनीखेज कार्रवाई से सीमावर्ती अंचलों में नशा तस्करों के बीच हड़कंप मच गया है।
वारदात की दास्तां: टेंपो से छलांग, पिट्ठू बैग का राज और दिल्ली की सीक्रेट डील
यह पूरा हाई-वोल्टेज ड्रामा और गिरफ्तारी चतरा-जोरी मार्ग पर स्थित गोसाईडीह चेकपोस्ट के पास संपन्न हुई।
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टेंपो पर खुफिया नजर: हंटरगंज पुलिस को पुख्ता गुप्त सूचना मिली थी कि अफीम (Opium) की एक बड़ी खेप को एक स्थानीय पैसेंजर टेंपो के जरिए गया (बिहार) के रास्ते दिल्ली भेजने की तैयारी है।
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भागने की लाइव नाकाम कोशिश: एसडीपीओ के निर्देश पर जब पुलिस ने गोसाईडीह के पास सघन वाहन जांच अभियान शुरू किया, तो एक संदिग्ध टेंपो रुकते ही उसमें बैठा युवक काले रंग का भारी पिट्ठू बैग लेकर नीचे कूदा और खेतों की तरफ भागने लगा। पुलिस की टीम ने तत्परता दिखाते हुए उसे खदेड़कर दबोच लिया।
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14.50 लाख का माल जब्त: पकड़े गए तस्कर के बैग की जब तलाशी ली गई, तो उसके भीतर से कुल 2.900 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाली अफीम बरामद हुई, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 14 लाख 50 हजार रुपये आंकी गई है। इसके अलावा पुलिस ने उसके पास से दो मोबाइल फोन और 1200 रुपये कैश भी जब्त किए हैं।
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अनिल यादव का कबूलनामा: गिरफ्तार तस्कर की पहचान चतरा सदर थाना क्षेत्र के सिकिद गांव निवासी अनिल कुमार यादव के रूप में हुई है। पूछताछ में अनिल ने कबूला कि वह इस माल को दिल्ली ले जाकर वहां के एक बड़े सप्लायर को सौंपने वाला था। पुलिस ने एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
प्रशासनिक रुख: सप्लायर नेटवर्क रडार पर, एसडीपीओ खुद संभाल रहे कमान
बॉर्डर पर हुई इस बड़ी सफलता के बाद पुलिस की कई टीमें अब बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज खंगालने में जुट गई हैं।
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टीम को मिली शाबाशी: इस सफल ऑपरेशन को अंजाम देने वाली टीम में एसडीपीओ संदीप सुमन, पुलिस इंस्पेक्टर विपिन कुमार, हंटरगंज थाना प्रभारी प्रभात कुमार और सब-इंस्पेक्टर दिलीप कुमार समेत कई जांबाज जवान शामिल थे।
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मोबाइल खंगाल रही पुलिस: जब्त किए गए दोनों मोबाइलों के कॉल रिकॉर्ड्स और व्हाट्सएप चैट्स के जरिए पुलिस उन स्थानीय सप्लायरों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, जिन्होंने अनिल को यह खेप उपलब्ध कराई थी।
केवल करियर नहीं, मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी जरूरी
हंटरगंज पुलिस द्वारा की गई यह कार्रवाई सराहनीय है, जिसने दिल्ली की सड़कों पर जहर घोलने वाली अफीम की एक बड़ी खेप को समय रहते पकड़ लिया। लेकिन यह घटना यह भी साफ करती है कि अनिल यादव जैसे लोग इस धंधे के महज 'करियर' (माल ढोने वाले) हैं। असली सरगना आज भी चतरा के सुदूर गांवों या दिल्ली के आलीशान दफ्तरों में बैठकर यह सिंडिकेट चला रहे हैं। जब तक पुलिस इन बड़े सप्लायरों के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त नहीं करती, तब तक बिहार बॉर्डर पर नशे के इस काले कारोबार को रोकना एक बड़ी चुनौती बना रहेगा।
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