Chandil Terror: आधी रात गांवों में घुसा खूंखार 'लोन एलीफेंट', पांच घरों को मटियामेट कर चट कर गया सारा अनाज
चांडिल प्रखंड के लावा बहेराडीह और काशीपुर गांव में सोमवार देर रात एक जंगली हाथी ने पांच घरों को ध्वस्त कर भारी तबाही मचाई है। अनाज की लूट और ग्रामीणों के रतजगा करने की पूरी एक्सक्लूसिव ग्राउंड रिपोर्ट यहाँ देखें।
चांडिल, 19 मई 2026 – सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल प्रखंड के ग्रामीण अंचलों में इन दिनों इंसानों और हाथियों के बीच का संघर्ष (Human-Elephant Conflict) एक खौफनाक मोड़ ले चुका है। दलमा वन्यजीव अभयारण्य की तलहटी में बसे गांवों में भोजन और पानी की तलाश में भटक रहे गजराज का गुस्सा अब रिहायशी बस्तियों पर फूट रहा है। सोमवार की देर रात जंगल से निकले एक विशालकाय 'लोन एलीफेंट' (एकल जंगली हाथी) ने लावा बहेराडीह और काशीपुर गांव में घुसकर भारी तबाही मचाई। आधी रात को हुए इस हमले में हाथी ने एक के बाद एक पांच गरीब ग्रामीणों के आशियाने उजाड़ दिए और घरों में रखा सारा साल भर का राशन चट कर गया। इस तांडव के बाद से कोल्हान के इस इलाके में वन विभाग के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है।
वारदात की दास्तां: ढहती दीवारें, बिखरता अनाज और जान बचाकर भागते मासूम
यह खौफनाक मंजर सोमवार देर रात उस वक्त शुरू हुआ, जब दोनों गांवों के लोग गहरी नींद में सो रहे थे।
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लावा बहेराडीह में पहला हमला: एकाकी हाथी सबसे पहले लावा बहेराडीह गांव की बस्ती में दाखिल हुआ। उसने सीधे तरनी महतो, पूर्णचंद महतो और राजीव महतो के मिट्टी और खपरैल के घरों को निशाना बनाया। हाथी ने अपने भारी पैरों और सूंड के प्रहार से घरों की दीवारें और छप्पर पूरी तरह ध्वस्त कर दिए।
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अनाज की लूट: तरनी महतो के घर की दीवार गिराने के बाद हाथी ने कमरे के भीतर रखे धान, चावल और अन्य खाद्यान्नों को बेरहमी से खा लिया और पैरों तले रौंद दिया। घर के भीतर सो रहे सदस्यों ने जैसे ही दीवारों के गिरने की आवाज सुनी, वे बच्चों को गोद में लेकर पिछले दरवाजे से भाग निकले, जिससे उनकी जान बाल-बाल बची।
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काशीपुर में भी मचाया उपद्रव: लावा बहेराडीह में तबाही मचाने के बाद इस उत्पाती हाथी का रुख पड़ोसी गांव काशीपुर की ओर हुआ। वहां भी हाथी ने दो अन्य गरीब परिवारों के घरों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया।
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मशालों से खदेड़ा: अंततः, जान पर खेलकर सैकड़ों ग्रामीणों ने पारंपरिक तीर-धनुष, जलती हुई मशालों और बर्तनों के शोर-शराबे के सहारे हाथी को वापस गहरे जंगलों की ओर खदेड़ा। ग्रामीणों का आरोप है कि आपातकालीन सूचना देने के घंटों बाद भी वन विभाग (Forest Department) की क्विक रिस्पांस टीम (QRT) मौके पर नहीं पहुंची।
प्रशासनिक रुख: दाने-दाने को मोहताज परिवार, मुआवजे की गुहार
हाथियों के इस लगातार बढ़ते हमलों ने चांडिल प्रखंड की पूरी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
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एक सप्ताह में एक दर्जन घर तबाह: प्रभावित ग्रामीणों ने बताया कि पिछले महज सात दिनों के भीतर चांडिल के अलग-अलग गांवों में हाथियों के झुंड ने एक दर्जन से अधिक घरों को तोड़ा है।
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भूख और बेघरी का संकट: जिन परिवारों के घर टूटे हैं, उनके सामने इस तपती गर्मी में सिर छिपाने की जगह नहीं बची है और खाने का संकट भी खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने अंचल अधिकारी (CO) और वन क्षेत्र पदाधिकारी से तत्काल सरकारी मुआवजा और गांवों की स्थायी घेराबंदी (Fencing) करने की मांग की है।
लावा बहेराडीह और काशीपुर के ग्रामीण आज जिस खौफ के साये में रात गुजार रहे हैं, वह वन विभाग के दावों पर एक बड़ा तमाचा है। ग्रामीणों का रातभर जागकर पहरा देना यह साबित करता है कि वे पूरी तरह असहाय छोड़ दिए गए हैं। वन विभाग को केवल हाथी भगाने के पारंपरिक तौर-तरीकों के भरोसे रहने के बजाय चांडिल के संवेदनशील गांवों की सीमाओं पर 'ट्रेंच' (गहरी खाइयां) खोदनी होंगी और सोलर फेंसिंग लगानी होगी। जब तक इन परिवारों को तुरंत अनाज और उचित मुआवजा नहीं दिया जाता, तब तक कोल्हान के इस ग्रामीण अंचल में भुखमरी और आक्रोश को दबाना नामुमकिन होगा।
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