Chakradharpur Gate: गाय फंसी, मौत के मुंह से खींच लाए लोग, रेलवे के रिवॉल्विंग गेट ने बनाया खूनी फंदा स्कूल
चक्रधरपुर रेलवे हाई स्कूल मैदान में लगे लोहे के रिवॉल्विंग गेट में एक गाय का गला बुरी तरह फंस गया जिसे बचाने के लिए ग्रामीणों को दीवार तक तोड़नी पड़ी। रेल प्रशासन की इस नई व्यवस्था से पैदा हुए जानलेवा खतरे और स्थानीय लोगों के भारी विरोध की पूरी हकीकत यहाँ दी गई है वरना आपके इलाके का नया कंस्ट्रक्शन भी किसी बेजुबान की जान का दुश्मन बन सकता है।
चक्रधरपुर, 22 दिसंबर 2025 – पश्चिमी सिंहभूम के चक्रधरपुर स्थित रेलवे हाई स्कूल मैदान के पास सोमवार की सुबह चीख-पुकार मच गई। रेलवे द्वारा हाल ही में लगाए गए लोहे के रिवॉल्विंग गेट (घूमने वाला गेट) में एक गाय बुरी तरह फंस गई। गेट पार करने की कोशिश में गाय का गला लोहे की सलाखों के बीच इस कदर जकड़ गया कि उसकी जान पर बन आई। यह घटना केवल एक पशु के फंसने की कहानी नहीं है, बल्कि रेल प्रशासन की उस 'संकीर्ण' प्लानिंग का नतीजा है, जिसका विरोध स्थानीय लोग पिछले कई दिनों से कर रहे थे।
इतिहास: चक्रधरपुर रेलवे ग्राउंड और आवाजाही का संघर्ष
चक्रधरपुर रेल मंडल का यह इलाका ऐतिहासिक रूप से शहर का फेफड़ा माना जाता है। एनएच-75-ई और रेलवे हाई स्कूल मैदान के बीच का यह मार्ग दशकों से आम जनता और वाहनों के लिए मुख्य लिंक रहा है। ऐतिहासिक रूप से यहाँ से बड़े वाहन भी गुजरते थे, जिससे स्थानीय लोगों को लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ती थी। लेकिन समय के साथ रेल प्रशासन ने सुरक्षा का हवाला देते हुए पहले बड़े वाहनों को रोका, फिर छोटे वाहनों पर पाबंदी लगाई। महज एक सप्ताह पूर्व, यहाँ केवल पैदल यात्रियों के लिए 'रिवॉल्विंग गेट' लगाकर पारंपरिक रास्ते को पूरी तरह संकुचित कर दिया गया। आज का हादसा इसी बदलाव का पहला खौफनाक परिणाम है।
आधे घंटे का 'रेस्क्यू ऑपरेशन': जब तोड़नी पड़ी दीवार
सोमवार की सुबह जब गाय गेट से गुजरने लगी, तो उसे गेट की बनावट का अंदाजा नहीं था।
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खतरनाक फंदा: गाय का धड़ पार हो गया लेकिन उसका गला लोहे के खांचे में बुरी तरह फंस गया। गाय जितनी छटपटाती, फंदा उतना ही कसता जा रहा था।
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जनता की मुस्तैदी: बेजुबान को तड़पता देख स्थानीय लोग दौड़कर आए। करीब 30 मिनट तक कड़ी मशक्कत की गई, लेकिन गेट टस से मस नहीं हुआ। अंततः लोगों ने हिम्मत दिखाई और गेट से सटी कंक्रीट की दीवार का एक हिस्सा तोड़ दिया।
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चमत्कारी बचाव: दीवार टूटने के बाद गाय को सुरक्षित बाहर निकाला गया, लेकिन वह बुरी तरह लहूलुहान और सहमी हुई थी।
रेल प्रशासन के खिलाफ फूट पड़ा लोगों का गुस्सा
इस घटना के बाद रेलवे हाई स्कूल मैदान के पास रहने वाले नागरिकों में भारी नाराजगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह गेट पैदल चलने वालों के लिए भी असुविधाजनक है और पशुओं के लिए तो यह किसी 'डेथ ट्रैप' (मौत के कुएं) से कम नहीं है।
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सुरक्षा का हवाला: रेल प्रशासन ने स्कूल और मैदान की सुरक्षा के नाम पर इस गेट को लगाया है, लेकिन लोगों का आरोप है कि वैकल्पिक मार्ग दिए बिना मुख्य रास्ते को बंद करना तानाशाही है।
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जोखिम भरी आवाजाही: बुजुर्गों और बच्चों के लिए इस भारी गेट को घुमाना और पार करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
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स्थानीय मांग: घटना के बाद ग्रामीणों ने दोटूक शब्दों में कहा है कि या तो इस गेट को तुरंत हटाया जाए या यहाँ पशुओं और इंसानों के लिए सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
घटना का घटनाक्रम (Case File)
| विवरण | जानकारी |
| स्थान | रेलवे हाई स्कूल मैदान, चक्रधरपुर |
| कारण | नया लोहे का रिवॉल्विंग गेट |
| रेस्क्यू का तरीका | दीवार का हिस्सा तोड़कर |
| समय | सोमवार सुबह |
| प्रशासन | चक्रधरपुर रेल मंडल (SER) |
सुरक्षा बनाम सुविधा: एक अनसुलझी बहस
रेलवे का तर्क है कि मैदान में मवेशियों और अवैध वाहनों के प्रवेश को रोकने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था। वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन ने बिना जमीनी हकीकत जाने यह गेट लगा दिया है। आज तो एक गाय फंसी है, कल को कोई बच्चा या बुजुर्ग भी इस भारी लोहे के जाल में फंसकर हादसे का शिकार हो सकता है।
प्रशासन को लेनी होगी जिम्मेदारी
चक्रधरपुर की यह घटना एक सबक है कि विकास या सुरक्षा के नाम पर किए गए निर्माण अगर व्यावहारिक न हों, तो वे जानलेवा बन जाते हैं। दीवार तोड़कर गाय की जान बचाने वाले युवाओं ने तो अपनी जिम्मेदारी निभा दी, लेकिन क्या अब रेल प्रशासन इस 'खूनी गेट' की डिजाइन बदलने की जिम्मेदारी लेगा?
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