Chaibasa Tragedy: चाईबासा में शादी के 6 महीने बाद ही विवाहिता ने जंगल में लगाई फांसी, दुपट्टे का फंदा बना पेड़ से झूल गई 20 वर्षीय मुक्ता

चाईबासा के मुफस्सिल थाना अंतर्गत बड़ालगिया गांव की 20 वर्षीय विवाहिता मुक्ता करवा ने जंगल में फांसी लगाकर जान दे दी है। अक्टूबर 2025 में हुई शादी के बाद मानसिक स्थिति बिगड़ने और शनिवार को सदर अस्पताल में हुए पोस्टमार्टम की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।

Apr 4, 2026 - 16:07
 0
Chaibasa Tragedy: चाईबासा में शादी के 6 महीने बाद ही विवाहिता ने जंगल में लगाई फांसी, दुपट्टे का फंदा बना पेड़ से झूल गई 20 वर्षीय मुक्ता
Chaibasa Tragedy: चाईबासा में शादी के 6 महीने बाद ही विवाहिता ने जंगल में लगाई फांसी, दुपट्टे का फंदा बना पेड़ से झूल गई 20 वर्षीय मुक्ता

चाईबासा/पश्चिमी सिंहभूम, 4 अप्रैल 2026 – झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिला मुख्यालय चाईबासा के मुफस्सिल थाना क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। बड़ालगिया गांव की एक 20 वर्षीय नवविवाहिता ने जंगल में पेड़ से लटककर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। मृतका की पहचान मुक्ता करवा के रूप में हुई है, जिसकी शादी महज 6 महीने पहले ही हुई थी। इस घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। शनिवार को मृतका का शव पोस्टमार्टम के लिए चाईबासा सदर अस्पताल लाया गया, जहाँ परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

जंगल में मिला शव: खेलते हुए बच्चों ने देखा खौफनाक मंजर

शुक्रवार की दोपहर बड़ालगिया गांव के पास के जंगल में सन्नाटा पसरा था, तभी वहां खेलने गए कुछ बच्चों की चीख निकल गई।

  • पेड़ से लटका शव: बच्चों ने देखा कि एक महिला पेड़ की टहनी से अपने दुपट्टे का फंदा बनाकर झूल रही है। डरे-सहमे बच्चे तुरंत गांव भागे और ग्रामीणों को इसकी जानकारी दी।

  • पहचान और सदमा: जब ग्रामीण और परिजन मौके पर पहुँचे, तो उनकी आँखों के सामने मुक्ता करवा का बेजान शरीर था। मुक्ता ने अपने ही दुपट्टे को मौत का फंदा बना लिया था।

  • मौके पर मौत: फंदा इतना कस गया था कि घटनास्थल पर ही मुक्ता की सांसें थम चुकी थीं। ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना मुफस्सिल थाना पुलिस को दी।

अक्टूबर 2025 में हुई थी शादी: मानसिक स्थिति बनी काल?

मुक्ता की जिंदगी की कहानी जितनी छोटी थी, उतनी ही दर्दनाक भी रही। परिजनों के अनुसार, मुक्ता की शादी अक्टूबर 2025 में धूमधाम से हुई थी।

  1. शादी के बाद बदला व्यवहार: परिजनों का कहना है कि शादी के कुछ ही दिनों बाद मुक्ता की दिमागी हालत बिगड़ने लगी थी। वह अक्सर गुमसुम रहने लगी थी और बिना बताए घर से निकल जाती थी।

  2. शुक्रवार की वो दोपहर: शुक्रवार को भी मुक्ता अचानक घर से निकली और फिर वापस नहीं लौटी। परिजनों को लगा कि वह हमेशा की तरह कहीं आसपास होगी, लेकिन शाम होने से पहले उसकी मौत की खबर आ गई।

  3. पुलिसिया जांच: मुफस्सिल थाना पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मामले की तफ्तीश शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह केवल मानसिक बीमारी का मामला है या इसके पीछे कोई अन्य पारिवारिक तनाव भी था।

चाईबासा और मुफस्सिल क्षेत्र का इतिहास: बढ़ती आत्महत्याएं चिंता का विषय

पश्चिमी सिंहभूम का यह ग्रामीण इलाका अपनी सादगी के लिए जाना जाता है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहाँ नवविवाहिताओं द्वारा उठाए गए आत्मघाती कदम चिंता का विषय रहे हैं।

  • जागरूकता की कमी: ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर मानसिक बीमारी को 'ऊपरी चक्कर' या अंधविश्वास से जोड़कर देखा जाता है, जिससे समय पर सही इलाज नहीं मिल पाता। मुक्ता के मामले में भी बेहतर मनोचिकित्सकीय सलाह शायद उसकी जान बचा सकती थी।

  • मुफस्सिल थाने की सक्रियता: चाईबासा सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम के दौरान पुलिस ने परिजनों के विस्तृत बयान दर्ज किए हैं। थाना प्रभारी ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों और समय का सटीक पता चल सकेगा।

  • सामाजिक प्रभाव: बड़ालगिया जैसे शांत गांवों में इस तरह की घटनाओं से डर और असुरक्षा का माहौल पैदा होता है, खासकर जब मामला एक युवा विवाहिता से जुड़ा हो।

सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम: परिजनों के बयानों में उलझी गुत्थी

शनिवार सुबह से ही चाईबासा सदर अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस के बाहर ग्रामीणों की भीड़ जुटी रही।

  • बयान दर्ज: पुलिस ने मृतका के पति और मायके वालों से पूछताछ की है। फिलहाल परिजनों ने किसी पर भी प्रताड़ना का आरोप नहीं लगाया है और मानसिक स्थिति खराब होने की बात पर ही कायम हैं।

  • अंतिम संस्कार: पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया है। मुक्ता का अंतिम संस्कार उसके पैतृक गांव में किया जाएगा।

  • अगला कदम: पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या मुक्ता का पहले कहीं इलाज चल रहा था और शुक्रवार को घर से निकलते वक्त उसकी मानसिक स्थिति कैसी थी।

चाईबासा की मुक्ता करवा की मौत ने एक बार फिर समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है। 20 साल की उम्र, जिसमें सपने देखने चाहिए थे, उस उम्र में मुक्ता ने मौत को गले लगा लिया। अक्टूबर में सजी उसकी डोली, 6 महीने के भीतर ही अर्थी में बदल गई। भले ही इसे एक विक्षिप्त महिला की आत्महत्या माना जा रहा हो, लेकिन यह घटना मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता की कमी को भी उजागर करती है। फिलहाल मुफस्सिल पुलिस मामले की हर एंगल से जांच कर रही है और बड़ालगिया गांव इस गहरे दुख से उबरने की कोशिश कर रहा है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।