Chaibasa Raid : चाईबासा में 'डेंड्राइट गैंग' का आतंक खत्म, पुलिया के नीचे छिपाया था चोरी का माल, सामाजिक कार्यकर्ता ने धर दबोचा
चाईबासा शहर में गुमटियों और ठेलों का ताला तोड़कर चोरी करने वाले कुख्यात 'डेंड्राइट गैंग' का भंडाफोड़ हुआ है। कचहरी तालाब की पुलिया के नीचे बोरे में छिपाकर रखे गए बिस्किट और ब्रेड के साथ दो युवक और दो नाबालिग पकड़े गए हैं। सदर थाना पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई और गैंग के मोडस ऑपेरेंडी की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
चाईबासा/पश्चिम सिंहभूम, 19 मार्च 2026 – झारखंड के चाईबासा शहर में पिछले कई हफ्तों से छोटी दुकानों और गुमटी संचालकों की नींद उड़ाने वाले 'डेंड्राइट गैंग' का आखिरकार अंत हो गया है। नशे की लत और चोरी की वारदातों के लिए बदनाम इस गैंग के सदस्यों को स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ता त्रिशानु राय की मुस्तैदी से रंगे हाथ पकड़ा गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि चोरी के सामान को किसी गोदाम में नहीं, बल्कि कचहरी तालाब के नीचे जल निकासी वाली पुलिया में बोरे में भरकर छिपाया गया था। इस गिरोह में बालिग युवकों के साथ-साथ नाबालिग बच्चे भी शामिल हैं, जो शहर की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक गंभीर चुनौती बन गए थे।
खुद की छानबीन और पुलिया का राज: ऐसे फंसा गैंग
बीते दिनों निबंधन कार्यालय (रजिस्ट्री ऑफिस) के पास एक चाय की गुमटी का ताला तोड़कर चोरी की घटना हुई थी। इस घटना ने शहरवासियों के सब्र का बांध तोड़ दिया।
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त्रिशानु राय का एक्शन: कांग्रेस जिला प्रवक्ता सह सामाजिक कार्यकर्ता त्रिशानु राय, जो लंबे समय से इस गैंग पर नजर रखे हुए थे, ने गुरुवार को स्थानीय लोगों के साथ मिलकर खुद तहकीकात शुरू की।
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डांट-फटकार और कबूलनामा: जब शक के घेरे में आए गैंग के सदस्यों से पूछताछ की गई, तो पहले उन्होंने इनकार किया। लेकिन जब सख्ती बरती गई, तो उन्होंने न केवल चोरी की बात स्वीकारी, बल्कि वह जगह भी बता दी जहाँ सामान छिपाया गया था।
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बरामदगी का सामान: कचहरी तालाब के पास पुलिया के भीतर से बोरों में भरे बिस्किट, ब्रेड, टोस्ट, चिप्स और कुरकुरे बरामद हुए। साथ ही ताला तोड़ने वाले औजार भी पुलिस ने जब्त किए हैं।
पुलिस की दबिश: रंगे हाथ दबोचे गए अपराधी
सूचना मिलते ही सदर थाना प्रभारी तरुण कुमार के निर्देश पर एसआई अजित होनहागा पीसीआर वैन लेकर मौके पर पहुँचे।
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गिरफ्तारी: पुलिस ने मौके से दो बालिग युवकों के साथ एक नाबालिग बच्ची और एक नाबालिग बच्चे को हिरासत में लिया है।
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नशे का जाल: 'डेंड्राइट गैंग' नाम पड़ने की मुख्य वजह इन युवाओं का 'डेंड्राइट' (एक प्रकार का गोंद/नशा) के प्रति आकर्षण है। नशे की पूर्ति के लिए ये छोटी-छोटी दुकानों को निशाना बनाते थे।
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थाने में अनुसंधान: फिलहाल सभी आरोपियों को सामान के साथ सदर थाना ले जाया गया है, जहाँ उनसे कड़ाई से पूछताछ की जा रही है।
चाईबासा की 'गुमटी संस्कृति' और नशे के गिरोहों का उदय
चाईबासा, जो हो-बहुलता और अपनी समृद्ध आदिवासी विरासत के लिए जाना जाता है, यहाँ की अर्थव्यवस्था में 'गुमटियों' का ऐतिहासिक महत्व है।
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रोजगार का आधार: 1970 और 80 के दशक से ही चाईबासा के कचहरी रोड और सदर अस्पताल के आसपास छोटी-छोटी गुमटियां आम लोगों की जरूरतों का केंद्र रही हैं। ये गुमटियां उन गरीब परिवारों की आजीविका हैं जो बड़े शोरूम नहीं खोल सकते।
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नशे का ऐतिहासिक संक्रमण: चाईबासा में 'डेंड्राइट' और 'व्हाइटनर' जैसे सस्ते नशे का चलन पिछले 15-20 वर्षों में बढ़ा है। इतिहास गवाह है कि जब भी शहर में बेरोजगारी और शिक्षा का अभाव बढ़ता है, ऐसे 'एडिक्ट गैंग्स' का उदय होता है। 2015-16 के दौरान भी चाईबासा में एक ऐसा ही गिरोह सक्रिय हुआ था जो मंदिरों और छोटी दुकानों के ताले तोड़ता था।
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कचहरी तालाब का महत्व: कचहरी तालाब शहर का ऐतिहासिक केंद्र है, जिसके चारों ओर प्रशासनिक कार्यालय स्थित हैं। यहाँ की पुलिया का उपयोग चोरी के सामान को छिपाने के लिए करना यह दर्शाता है कि अपराधी प्रशासन की नाक के नीचे कितने सक्रिय हो चुके थे। त्रिशानु राय द्वारा पत्राचार के बावजूद कार्रवाई में देरी होना यह भी बताता है कि सिस्टम ने इन 'छोटे अपराधों' को ऐतिहासिक रूप से नजरअंदाज किया है, जो अब एक बड़े नासूर के रूप में सामने आए हैं।
जनता में राहत: अब रात की गश्त बढ़ाने की मांग
इस गैंग के पकड़े जाने से छोटे दुकानदारों ने राहत की सांस ली है।
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सुरक्षा की चिंता: स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर पुलिस समय रहते गश्त बढ़ा देती, तो दर्जनों गुमटियों के ताले टूटने से बच सकते थे।
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सामाजिक सुधार: त्रिशानु राय ने अपील की है कि इन युवाओं को सजा के साथ-साथ 'नशा मुक्ति केंद्र' भेजने की भी जरूरत है ताकि वे समाज की मुख्यधारा में लौट सकें।
चाईबासा में डेंड्राइट गैंग का पकड़ा जाना एक बड़ी चेतावनी है। बिस्किट और चिप्स की यह चोरी केवल पेट की भूख नहीं, बल्कि नशे की उस भूख की कहानी है जो युवा पीढ़ी को खोखला कर रही है। कचहरी तालाब की पुलिया से निकला चोरी का सामान पुलिस फाइलों में तो दर्ज हो जाएगा, लेकिन सवाल यह है कि क्या शहर की गुमटियां अब रात के अंधेरे में सुरक्षित रहेंगी? क्या चाईबासा पुलिस अब उन दुकानों पर भी कार्रवाई करेगी जो इन नाबालिगों को नशा और ताला तोड़ने वाले औजार मुहैया कराते हैं?
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