Tata Fraud: बड़ी ठगी, टाटा स्टील का नकली वेंडर बनकर 674 युवाओं को लूटा, QR कोड से उड़ाए लाखों रुपये
जमशेदपुर में टाटा स्टील में नौकरी दिलाने के नाम पर 674 बेरोजगार युवाओं से ₹7.24 लाख की बड़ी ठगी का मामला सामने आया है जहाँ सूर्य प्रताप सिंह नामक युवक खुद को RBCBD वेंडर बताकर फरार हो गया है। इस हाई-प्रोफाइल डिजिटल धोखाधड़ी और एसपी अमित रेनू की जांच के बाद सामने आई पूरी कड़वी हकीकत यहाँ दी गई है वरना आप भी अगले शिकार बन सकते हैं।
जमशेदपुर/चाईबासा, 23 दिसंबर 2025 – झारखंड के बेरोजगार युवाओं के सपनों के साथ खिलवाड़ करने वाला एक बहुत बड़ा 'जॉब स्कैम' उजागर हुआ है। टाटा स्टील (TATA Steel) जैसी प्रतिष्ठित कंपनी में नौकरी दिलाने का झांसा देकर एक शातिर ठग ने केवल एक QR कोड के जरिए 674 युवाओं की गाढ़ी कमाई पर डाका डाल दिया। आरोपी ने खुद को टाटा स्टील का अधिकृत वेंडर बताकर ऐसा मायाजाल बुना कि सैकड़ों पढ़े-लिखे युवा उसके चंगुल में फंस गए। अब यह मामला जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) तक पहुँच चुका है और पूरे इलाके में इस धोखाधड़ी को लेकर भारी आक्रोश है।
इतिहास: टाटा स्टील और 'नौकरी के नाम पर ठगी' का पुराना नाता
ऐतिहासिक रूप से जमशेदपुर की पहचान टाटा स्टील से रही है। 1907 में अपनी स्थापना के बाद से ही यह कंपनी लाखों लोगों के लिए भरोसे का प्रतीक रही है। लेकिन इस भरोसे का फायदा उठाना ठगों के लिए एक पुराना पेशा रहा है। 2010 के बाद जब नियुक्तियां डिजिटल होने लगीं, तब से 'फेक वेंडर' और 'ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन' के नाम पर ठगी की घटनाओं में 150\% की वृद्धि हुई है। पूर्व में भी कई ऐसे गिरोह पकड़े गए हैं जो टाटा स्टील के 'गेट पास' या 'आरबीसीबीडी' (RBCBD) वेंडर होने का दावा कर युवाओं को ठगते थे। सूर्य प्रताप सिंह ने इसी पुराने तरीके को एक डिजिटल ट्विस्ट देकर लाखों की चपत लगाई है।
सूर्य प्रताप का 'मास्टर प्लान': 1075 रुपये का वो घातक जाल
ठगी की इस पूरी पटकथा का मुख्य किरदार सूर्य प्रताप सिंह नामक युवक है। उसने खुद को टाटा स्टील का आरबीसीबीडी (RBCBD) अधिकृत वेंडर बताया।
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ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन का झांसा: उसने युवाओं से कहा कि टाटा स्टील में सीधी बहाली के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन हो रहा है।
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क्यूआर कोड का खेल: रजिस्ट्रेशन शुल्क के नाम पर प्रति व्यक्ति 1075 रुपये की मांग की गई। भुगतान के लिए ज्योति कुमार के नाम से जारी एक क्यूआर कोड दिया गया।
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जबरदस्त आंकड़े: इस झांसे में आकर कुल 674 लोगों ने पैसे ट्रांसफर किए, जिससे आरोपी के पास करीब 7 लाख 24 हजार रुपये जमा हो गए।
4 दिसंबर का वो 'सस्पेंस' और अचानक गायब होना
ठगी का अहसास तब हुआ जब विश्वास और हकीकत के बीच की दीवार गिर गई।
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परिसर में बुलावा: ठग ने सभी पीड़ितों को 4 दिसंबर को टाटा स्टील परिसर के पास बुलाया था, ताकि उन्हें यकीन हो जाए कि नौकरी पक्की है।
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गायब हुआ आरोपी: जैसे ही युवा वहां पहुँचे, सूर्य प्रताप सिंह का मोबाइल फोन बंद हो गया और वह मौके से फरार हो गया।
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पीड़ितों की फेहरिस्त: मझगांव के खड़पोस निवासी नरेश दास, जिन्होंने खुद 250 लोगों का फॉर्म भरवाया था, वे इसके मुख्य शिकायतकर्ता हैं। उनके साथ भवानी शंकर पान, लाल सिंह सिंकु और अन्य कई लोग अब न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
ठगी कांड का पूरा ब्यौरा (Case Summary)
| विवरण | जानकारी |
| मुख्य आरोपी | सूर्य प्रताप सिंह (कथित वेंडर) |
| ठगी का तरीका | QR कोड के जरिए रजिस्ट्रेशन शुल्क |
| कुल पीड़ित | 674 युवा |
| कुल ठगी राशि | ₹7,24,000 |
| शिकायतकर्ता | नरेश दास (मझगांव, खड़पोस) |
| जांच अधिकारी | एसपी अमित रेनू |
पुलिस अधीक्षक का सख्त निर्देश: 'पैसे न दें'
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी अमित रेनू ने विशेष जांच टीम को निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि जिस ज्योति कुमार के नाम पर पैसा ट्रांसफर हुआ है, उस बैंक खाते को ट्रेस किया जा रहा है। एसपी ने आम जनता के लिए एक कड़ा संदेश जारी किया है— "टाटा स्टील जैसी कंपनियां कभी भी नौकरी के लिए किसी अनधिकृत वेंडर के माध्यम से या क्यूआर कोड पर पैसे नहीं मांगती हैं। अपनी मेहनत की कमाई किसी अनजान के हाथों में न सौंपें।"
डिजिटल युग में सावधानी ही सुरक्षा है
सूर्य प्रताप सिंह जैसे ठग समाज के उस वर्ग को निशाना बनाते हैं जो बेरोजगारी की मार झेल रहा है। 674 परिवारों की उम्मीदों को रौंदने वाला यह घोटाला एक बड़ी चेतावनी है। अगर आपको भी कोई सोशल मीडिया या व्हाट्सएप के जरिए नौकरी के लिए क्यूआर कोड भेज रहा है, तो समझ लीजिए कि वह आपको ठगने की तैयारी में है। फिलहाल पुलिस आरोपी की लोकेशन ट्रैक कर रही है और जल्द ही सलाखों के पीछे पहुँचाने का दावा कर रही है।
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