Saraikela Crash: मौत का झपकी, एनएच-33 पर खौफनाक टक्कर, बस के उड़े परखच्चे, खेत में घुसा ट्रक
सरायकेला के एनएच-33 पर पटना से टाटा आ रही 'दिव्य रथ' बस और ट्रक के बीच रोंगटे खड़े कर देने वाली टक्कर हुई है। आधी रात को मची चीख-पुकार और इमरजेंसी गेट से जान बचाकर भागे यात्रियों की पूरी दास्तान यहाँ दी गई है वरना आप भी झारखंड की इस सबसे खतरनाक 'ब्लैक रोड' के खूनी सच से हमेशा अनजान रह जाएंगे।
सरायकेला/चौका, 7 जनवरी 2026 – झारखंड की लाइफलाइन कही जाने वाली एनएच-33 पर बुधवार की तड़के सुबह मौत ने दस्तक दी, लेकिन खुशकिस्मती रही कि वह खाली हाथ लौट गई। चौका थाना क्षेत्र के रडगांव के समीप सुबह करीब 5:00 बजे पटना से टाटा आ रही 'दिव्य रथ' बस और एक भारी ट्रक के बीच भीषण भिड़ंत हो गई। हादसा इतना जबरदस्त था कि बस का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया, जबकि ट्रक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खेत में जा धंसा। उस वक्त बस में सवार यात्री गहरी नींद में थे, जिन्हें एक जोरदार धमाके ने सीधे अस्पताल और मौत के बीच खड़ा कर दिया।
5:00 AM का खौफ: जब धमाके से गूंज उठा रडगांव
हादसा उस समय हुआ जब धुंध और अंधेरे के बीच बस अपनी मंजिल की ओर बढ़ रही थी।
-
भीषण टक्कर: रडगांव पार करते ही बस ने पीछे से एक लोडेड ट्रक को जोरदार टक्कर मारी। टक्कर की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के ग्रामीण सहम गए।
-
अंदर का मंजर: बस के अंदर सो रहे यात्रियों के लिए यह किसी डरावने सपने जैसा था। तेज झटके के कारण कई यात्री अपनी सीटों से नीचे गिर गए। बस के केबिन का हिस्सा दबने के कारण मुख्य दरवाजा जाम हो गया था।
-
इमरजेंसी गेट बना जीवनदान: जब बस के अंदर धुएं और अंधेरे के बीच अफरा-तफरी मची, तब यात्रियों ने सूझबूझ दिखाई। पीछे का इमरजेंसी गेट खोला गया और एक-एक कर सभी यात्री अपनी जान बचाकर बाहर निकले।
ड्राइवर-खलासी फरार: यात्रियों का फूटा गुस्सा
हादसे के बाद जहां यात्रियों को मदद की जरूरत थी, वहीं बस के चालक और खलासी ने गैर-जिम्मेदाराना हरकत की।
-
मौके से भागे: जैसे ही बस रुकी, चालक और खलासी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए। इससे यात्रियों में भारी नाराजगी देखी गई।
-
हल्की चोटें: गनीमत रही कि किसी की जान नहीं गई, लेकिन बस के अगले हिस्से में बैठे कुछ यात्रियों को कांच लगने और झटके के कारण हल्की चोटें आई हैं।
-
पुलिस की कार्रवाई: चौका थाना पुलिस ने मौके पर पहुँचकर क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त वाहनों को हटवाया और हाईवे पर जाम खुलवाया।
एनएच-33 बस दुर्घटना: मुख्य जानकारी (Accident Snapshot)
| विवरण | जानकारी (Details) |
| बस का नाम | दिव्य रथ (पटना से टाटा) |
| हादसे का समय | बुधवार, सुबह 05:00 बजे |
| स्थान | रडगांव, चौका (सरायकेला-खरसावां) |
| क्षति | बस का अगला हिस्सा पूरी तरह नष्ट |
| वर्तमान स्थिति | ट्रक खेत में पलटा, ड्राइवर फरार |
इतिहास और डर: एनएच-33 की 'मौत वाली' सुबह का सच
एनएच-33, जो रांची को जमशेदपुर से जोड़ता है, ऐतिहासिक रूप से 'मौत की घाटी' के रूप में बदनाम रहा है। रडगांव और चौका का यह पैच विशेष रूप से सुबह के समय हादसों के लिए जाना जाता है। इतिहास गवाह है कि यहाँ होने वाले 80% हादसे तड़के 3 बजे से 5 बजे के बीच होते हैं, जब लंबी दूरी के ड्राइवरों को 'माइक्रो स्लीप' (नींद की झपकी) आती है। 2010 से 2020 के बीच इस स्ट्रेच पर सैकड़ों लोगों ने अपनी जान गंवाई है। चौका के रडगांव वाले हिस्से में सड़क की बनावट और अचानक आने वाले मोड़ अक्सर भारी वाहनों के लिए काल साबित होते हैं। आज की घटना ने एक बार फिर याद दिला दिया है कि एनएच-33 पर सफर करते समय 'सुरक्षा गेट' की जानकारी होना कितना जरूरी है।
जांच के घेरे में 'दिव्य रथ': क्या ड्राइवर को आई थी नींद?
चौका पुलिस अब फरार चालक की तलाश में जुटी है और मामले की कई पहलुओं से जांच कर रही है।
-
नींद की झपकी: शुरुआती तौर पर माना जा रहा है कि बस चालक को नींद आने की वजह से उसने सीधे ट्रक में टक्कर मार दी।
-
ओवरस्पीडिंग: तड़के सुबह सड़कें खाली होने के कारण बसें अक्सर निर्धारित गति सीमा से ऊपर दौड़ती हैं, जो रडगांव जैसे इलाकों में घातक साबित होता है।
-
यात्री सुरक्षा: परिवहन विभाग अब बस की फिटनेस और इमरजेंसी फीचर्स की भी जांच करेगा कि क्या बस में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम थे।
सूझबूझ ने टाली बड़ी त्रासदी
रडगांव का यह हादसा एक बड़ी खबर बन सकता था, लेकिन यात्रियों की बहादुरी और इमरजेंसी गेट ने इसे केवल एक 'वाहन दुर्घटना' तक सीमित कर दिया। पुलिस अब ट्रक और बस के दस्तावेजों की जांच कर रही है ताकि फरार आरोपियों पर कानूनी शिकंजा कसा जा सके।
What's Your Reaction?


