Ranchi Shaming : रांची में खूंटी की महिला को चप्पलों की माला पहनाकर मोहल्ले में घुमाया, कपड़े फाड़े, हैवानियत की हदें पार

रांची के सदर थाना क्षेत्र में एक महिला का चेहरा काला कर और चप्पलों की माला पहनाकर पूरे मोहल्ले में घुमाने की शर्मनाक घटना सामने आई है। चोरी के झूठे आरोप में हुई इस बर्बरता और पुलिस द्वारा आरोपियों की गिरफ्तारी की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।

Mar 31, 2026 - 13:32
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Ranchi Shaming : रांची में खूंटी की महिला को चप्पलों की माला पहनाकर मोहल्ले में घुमाया, कपड़े फाड़े, हैवानियत की हदें पार
Ranchi Shaming : रांची में खूंटी की महिला को चप्पलों की माला पहनाकर मोहल्ले में घुमाया, कपड़े फाड़े, हैवानियत की हदें पार

रांची, 31 मार्च 2026 – झारखंड की राजधानी रांची के सदर थाना क्षेत्र से मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहाँ एक महिला को न केवल बेरहमी से पीटा गया, बल्कि उसका चेहरा काला कर और चप्पलों की माला पहनाकर पूरे मोहल्ले में घुमाया गया। भीड़ की इस बर्बरता और तालिबानी सजा ने शहर की कानून-व्यवस्था और सामाजिक नैतिकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मूल रूप से खूंटी की रहने वाली इस महिला को घर से घसीटकर बाहर निकाला गया और सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया। रांची पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की है और मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

घर में घुसकर हैवानियत: 29 मार्च की वो काली दोपहर

घटना की शुरुआत 29 मार्च को हुई, जब पीड़िता अपने किराए के मकान में मौजूद थी।

  • जबरन घर में प्रवेश: आरोपी पंकज कुमार सिंह अचानक महिला के घर में घुस गया और गाली-गलौज शुरू कर दी। उसने बिना किसी महिला पुलिसकर्मी या कानूनी प्रक्रिया के, पीड़िता को बाल पकड़कर घर से बाहर खींच लिया।

  • चेहरे पर कालिख और अपमान: आरोपियों ने पीड़िता और उसके साथ मौजूद एक अन्य महिला के चेहरे पर कालिख पोत दी। इसके बाद उन्हें चप्पलों की माला पहनाई गई और पूरे मोहल्ले में तमाशा बनाकर घुमाया गया।

  • अश्लीलता और छेड़खानी: पीड़िता का आरोप है कि इस दौरान आरोपियों ने उनके कपड़े फाड़ दिए और गलत नीयत से उनके साथ छेड़खानी भी की। भीड़ मूकदर्शक बनी रही और कुछ लोग इस अपमानजनक कृत्य का वीडियो बनाने में व्यस्त रहे।

चोरी का झूठा आरोप: साजिश या सनक?

इस पूरी हैवानियत के पीछे जो वजह सामने आई है, उसने न्याय व्यवस्था को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है।

  1. वाहन चोरी का इल्जाम: आरोपियों ने दावा किया कि महिला के बेटे और उसके परिचितों ने वाहन चोरी की है। इसी शक के आधार पर उन्होंने कानून को अपने हाथ में ले लिया।

  2. सुनियोजित हमला: पीड़िता ने बताया कि चोरी का आरोप केवल एक बहाना था, असल मकसद उन्हें बेइज्जत करना और इलाके से भगाना था।

  3. भीड़ का न्याय (Mob Justice): बिना किसी सबूत या पुलिस जांच के, पंकज कुमार और उसके साथियों ने खुद को जज और जल्लाद मान लिया, जो समाज के लिए एक खतरनाक संकेत है।

रांची में 'मॉब शेमिंग' का काला इतिहास

झारखंड में डायन कुप्रथा या चोरी के शक में महिलाओं को अपमानित करने का इतिहास पुराना रहा है, लेकिन राजधानी रांची के बीचों-बीच ऐसी वारदात होना चौंकाने वाला है।

  • कानून का खौफ खत्म: सदर थाना क्षेत्र जैसे घनी आबादी वाले इलाके में घंटों तक यह तांडव चलता रहा, लेकिन किसी ने भी पुलिस को फोन करने की हिम्मत नहीं दिखाई।

  • खूंटी से रांची तक का सफर: पीड़िता खूंटी की रहने वाली है और रांची में बेहतर भविष्य की तलाश में किराए पर रह रही थी। बाहरी होने के नाते उसे सॉफ्ट टारगेट बनाया गया।

  • पुलिसिया कार्रवाई का रिकॉर्ड: रांची पुलिस ने पिछले कुछ वर्षों में 'मॉब जस्टिस' के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है, जिससे अपराधियों के हौसले पस्त हुए थे, लेकिन इस घटना ने फिर से पुराने जख्मों को कुरेद दिया है।

पुलिस एक्शन: पंकज और सनताना पहुँचे सलाखों के पीछे

सदर थाना प्रभारी कुलदीप कुमार ने मामले की जानकारी मिलते ही इसे 'टॉप प्रायोरिटी' पर लिया।

  • एफआईआर और छापेमारी: महिला की लिखित शिकायत के आधार पर सदर थाने में आईपीसी की विभिन्न संगीन धाराओं (छेड़खानी, मारपीट और अपमान) के तहत मामला दर्ज किया गया।

  • आरोपियों की गिरफ्तारी: पुलिस ने दबिश देकर मुख्य आरोपी पंकज कुमार सिंह उर्फ पंकज और उसकी सहयोगी सनताना कुमारी को गिरफ्तार कर लिया।

  • जेल की हवा: सोमवार को दोनों आरोपियों को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब इस मामले में शामिल अन्य अज्ञात लोगों की तलाश के लिए वीडियो फुटेज खंगाल रही है।

रांची की यह घटना बताती है कि आज भी हम आधुनिकता के दौर में कितने पीछे हैं। किसी महिला को चप्पलों की माला पहनाना और उसका चेहरा काला करना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि एक नागरिक की आत्मा पर हमला है। चोरी का आरोप लगाने वालों के पास पुलिस के पास जाने का विकल्प था, लेकिन उन्होंने 'भीड़ के न्याय' को चुना। सदर थाना पुलिस की तत्परता सराहनीय है, लेकिन असली इंसाफ तब होगा जब पीड़िता को समाज में उसका खोया हुआ सम्मान वापस मिलेगा। क्या रांची की जनता इस खौफनाक मानसिकता के खिलाफ आवाज उठाएगी? फिलहाल, आरोपी सलाखों के पीछे हैं और पीड़िता को न्याय का इंतजार है।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।