Potka Crash : काल बनी बेकाबू ट्रैक्टर-ट्रॉली, टाटा स्टील प्लांट के पास दो युवकों की दर्दनाक मौत, बुकामडीह गांव में पसरा सन्नाटा
पोटका के बेगनाडीह मुख्य पथ पर भीषण सड़क हादसे में बुकामडीह के दो युवकों की जान चली गई है। टाटा स्टील प्लांट गेट के पास हुए इस दर्दनाक एक्सीडेंट और इलाके में मचे कोहराम की पूरी जानकारी यहाँ देखें।
पोटका/जमशेदपुर, 14 मई 2026 – झारखंड के पोटका स्थित कोवाली थाना क्षेत्र में बुधवार की रात एक ऐसा मंजर देखने को मिला जिसने पूरे इलाके की रूह कपा दी। बेगनाडीह-पोटका मुख्य पथ पर एक भीषण सड़क हादसे ने दो घरों के चिराग हमेशा के लिए बुझा दिए। काम से लौट रहे दो युवक, जो अपने सुनहरे भविष्य के सपने बुन रहे थे, रास्ते में खड़ी मौत से टकरा गए। टाटा स्टील के निर्माणाधीन प्लांट के पास हुई इस टक्कर ने एक बार फिर औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
वारदात की दास्तां: जब काल बनकर आया ट्रैक्टर
घटना बुधवार देर रात की है, जब चारों ओर सन्नाटा पसरा था। भालकी की ओर से अपना काम खत्म कर दो युवक एक ही बाइक पर सवार होकर अपने गांव बुकामडीह लौट रहे थे।
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टक्कर का केंद्र: टाटा स्टील कंपनी के कचरा निष्पादन निर्माणाधीन प्लांट गेट के समीप यह हादसा हुआ।
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कैसे हुई भिड़ंत: प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटनास्थल पर 'नल जल योजना' के पाइप बिछाने का काम चल रहा था। इसी कार्य में लगे एक ट्रैक्टर से बाइक की सीधी भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए।
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मृतकों की पहचान: मृतकों की पहचान बुकामडीह निवासी जोड़ों माहली उर्फ काला माहुरी और काला माहली के रूप में हुई है।
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अंतिम कोशिश: हादसे के तुरंत बाद ग्रामीणों ने मानवता दिखाते हुए दोनों को गंभीर हालत में इलाज के लिए जमशेदपुर भेजा, लेकिन जख्म इतने गहरे थे कि उन्होंने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
प्रशासनिक रुख: जांच और सन्नाटा
कोवाली पुलिस ने घटना की सूचना मिलते ही छानबीन शुरू कर दी है।
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निर्माण कार्य की लापरवाही: ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माणाधीन प्लांट और पाइप बिछाने के काम के दौरान सुरक्षा मानकों और चेतावनी संकेतों (Warning Signs) की कमी के कारण यह हादसा हुआ।
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शव परीक्षण: पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। बुकामडीह गांव में इस समय चूल्हा तक नहीं जला है, हर आंख नम है।
कब थमेगा सड़कों पर मौत का तांडव?
पोटका की यह घटना केवल एक एक्सीडेंट नहीं है, बल्कि सिस्टम की उस खामी का नतीजा है जहाँ रात के अंधेरे में निर्माणाधीन साइट्स मौत के जाल में बदल जाती हैं। दो युवकों की मौत ने बुकामडीह गांव को ऐसा घाव दिया है जिसकी भरपाई मुमकिन नहीं है। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन और संबंधित कंपनियां इन ब्लैक स्पॉट्स पर रोशनी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करेंगी, या फिर किसी और घर के चिराग बुझने का इंतजार किया जाएगा?
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