Patamda Raid: पटमदा में आधी रात को बकरियां चुराने घुसे शातिर अपराधी, ग्रामीणों ने झाड़ियों से दबोचा, 6 बार जेल जा चुका है मास्टरमाइंड
पटमदा के आंधारझोर गांव में आधी रात को चोरी की नीयत से घुसे दो शातिर अपराधियों को ग्रामीणों ने घेरकर दबोच लिया है। सीतारामडेरा का पेशेवर चोर सोनू लोहार और मानगो का भीम गोप बकरी और बाइक चोरी की फिराक में थे। पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई और आरोपियों के आपराधिक इतिहास की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
पटमदा/बोड़ाम, 23 मार्च 2026 – जमशेदपुर के ग्रामीण इलाके पटमदा में शनिवार की रात चोरों के एक शातिर गिरोह के लिए काल साबित हुई। बोड़ाम थाना क्षेत्र के आंधारझोर गांव में चोरी करने घुसे शहर के दो हिस्ट्रीशीटर अपराधियों को ग्रामीणों ने अपनी सूझबूझ और बहादुरी से धर दबोचा। पकड़े गए आरोपियों में एक 6 बार जेल जा चुका पेशेवर चोर है, जो शहर छोड़कर अब ग्रामीण इलाकों में मवेशियों और बाइक पर हाथ साफ करने की फिराक में था। ग्रामीणों की सतर्कता ने न केवल चोरी की वारदात को नाकाम किया, बल्कि पुलिस को दो ऐसे अपराधी सौंपे हैं जो लंबे समय से मानगो और सीतारामडेरा पुलिस के लिए सिरदर्द बने हुए थे।
मंदिर दर्शन और फिर 'बकरी' का लालच: कैसे बनी योजना?
पुलिसिया पूछताछ में आरोपियों ने जो खुलासा किया है, वह काफी चौंकाने वाला है।
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हाथीखेड़ा का दौरा: आरोपी सोनू लोहार, भीम गोप और उनका एक अन्य फरार साथी एक ही बाइक पर सवार होकर लावजोड़ा स्थित हाथीखेड़ा मंदिर घूमने आए थे।
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लालच की वजह: लौटने के क्रम में फरार हुए दोस्त ने उन्हें बताया कि पटमदा के इस ग्रामीण बेल्ट में लगभग हर घर में बकरियां पाली जाती हैं। इन्हें चुराकर शहर के बाजारों में आसानी से हजारों रुपये में बेचा जा सकता है।
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पहली नाकाम कोशिश: लालच में आकर ये तीनों देर रात केंदडीह टोला में बिशु सिंह के घर घुसे और बरामदे में खड़ी बाइक ले भागने लगे। लेकिन घर के सदस्यों की नींद खुल गई और शोर मचने पर तीनों को बाइक छोड़कर खेतों के रास्ते भागना पड़ा।
झाड़ियों में छिपे थे तस्कर: ग्रामीणों ने घेराबंदी कर दबोचा
पहली कोशिश नाकाम होने के बाद भी चोरों का हौसला कम नहीं हुआ। कुछ घंटों बाद वे बेलगोड़ा टोला पहुँचे।
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बकरी चोरी का प्रयास: यहाँ उन्होंने लालमोहन महतो के घर को निशाना बनाया। जैसे ही वे अंदर बंधी बकरियों को खोलने लगे, ग्रामीणों ने उन्हें देख लिया।
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ग्रामीणों का प्रहार: पूरे गांव ने एकजुट होकर घेराबंदी की। चोर भागने के लिए झाड़ियों में छिप गए, लेकिन ग्रामीणों ने उन्हें ढूंढ निकाला। मौके पर ही उनकी जमकर पिटाई की गई और सुबह होते ही बोड़ाम पुलिस के हवाले कर दिया गया।
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एक साथी फरार: अंधेरे का फायदा उठाकर इनका तीसरा साथी भागने में सफल रहा, जिसकी तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।
अपराध का काला कच्चा चिट्ठा: जेल से पुराना नाता
थाना प्रभारी नीरज कुमार ने बताया कि पकड़े गए आरोपी सामान्य अपराधी नहीं, बल्कि पेशेवर हैं।
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सोनू लोहार (31 वर्ष): सीतारामडेरा के छायानगर निवासी सोनू पर बाइक चोरी और गृहभेदन के कई गंभीर मामले दर्ज हैं। वह अब तक 6 बार जेल की हवा खा चुका है।
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भीम गोप (35 वर्ष): मानगो दाईघुटु निवासी भीम गोप मारपीट और अन्य आपराधिक मामलों में 2 बार जेल जा चुका है।
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नया शिकार: आरोपियों ने कबूल किया कि शहर में पुलिस की सख्ती के बाद उन्होंने पहली बार ग्रामीण इलाकों में हाथ आजमाने का प्रयास किया था, लेकिन ग्रामीणों की एकता ने उन्हें सलाखों के पीछे पहुँचा दिया।
पुलिस की कार्रवाई: लालमोहन महतो की लिखित शिकायत पर जेल
रविवार को पुलिस ने कागजी कार्रवाई पूरी करते हुए आरोपियों को न्यायालय में पेश किया, जहाँ से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
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लिखित आवेदन: बेलगोड़ा निवासी लालमोहन महतो के लिखित आवेदन पर मामला दर्ज किया गया है।
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जांच जारी: पुलिस अब उस फरार साथी का मोबाइल लोकेशन ट्रेस कर रही है जो घटना के समय उनके साथ था।
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ग्रामीणों को निर्देश: पुलिस ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे इसी तरह सतर्क रहें, लेकिन कानून हाथ में न लेकर आरोपियों को तुरंत पुलिस के हवाले करें।
पटमदा के आंधारझोर गांव में हुई यह घटना ग्रामीण सतर्कता की एक बड़ी मिसाल है। शहर के पेशेवर चोरों ने सोचा था कि गांवों में चोरी करना आसान होगा, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि यहाँ की सुरक्षा 'दीवारें' नहीं, बल्कि 'लोग' हैं। सोनू लोहार और भीम गोप का जेल जाना क्षेत्र के मवेशी पालकों के लिए बड़ी राहत है। क्या प्रशासन अब उन फरार साथियों और उनके नेटवर्क को भी ध्वस्त कर पाएगा जो ग्रामीण झारखंड में पशु तस्करी का खेल चला रहे हैं? फिलहाल, बोड़ाम पुलिस फरार आरोपी की तलाश में सरगर्मी से जुटी है।
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