Palamu Suspension : पलामू में चाय दुकानदार से रंगदारी मांगने वाले दरोगा नपे, एसपी ने एसआई नर्मदेश्वर सिंह को किया सस्पेंड
पलामू के हुसैनाबाद में चाय दुकानदार शुभम पाठक से रंगदारी और मारपीट के आरोपी एसआई नर्मदेश्वर सिंह को एसपी रीष्मा रमेशन ने निलंबित कर दिया है। वायरल ऑडियो और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हुई इस बड़ी कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
पलामू/हुसैनाबाद, 2 अप्रैल 2026 – झारखंड के पलामू जिले से खाकी को शर्मसार करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। हुसैनाबाद थाना में पदस्थापित सब इंस्पेक्टर (SI) नर्मदेश्वर सिंह को एक चाय दुकानदार से रंगदारी मांगने और उसके साथ मारपीट करने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। पलामू की तेज-तर्रार पुलिस अधीक्षक (SP) रीष्मा रमेशन ने मामले की गंभीरता और जनता के बीच बढ़ते आक्रोश को देखते हुए दरोगा को लाइन हाजिर करने का आदेश जारी किया है। वर्दी की हनक में एक छोटे व्यवसायी का उत्पीड़न करने वाले इस अधिकारी की सच्चाई सीसीटीवी कैमरों और वायरल ऑडियो ने पूरी दुनिया के सामने ला दी है।
चाय की दुकान पर 'वर्दी का रौब': आखिर क्या था पूरा मामला?
यह शर्मनाक घटना जपला-छत्तरपुर मुख्य मार्ग पर स्थित एक प्रसिद्ध चाय की दुकान पर घटी।
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दुकानदार से बदसलूकी: जानकारी के अनुसार, एसआई नर्मदेश्वर सिंह दुकान पर पहुँचे और संचालक शुभम पाठक एवं उनके स्टाफ के साथ अभद्र व्यवहार शुरू कर दिया। आरोप है कि दरोगा ने न केवल गाली-गलौज की, बल्कि चाय दुकानदार से अवैध वसूली (रंगदारी) की मांग भी की।
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मारपीट और दबाव: जब शुभम पाठक ने इस अवैध मांग का विरोध किया, तो दरोगा ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए उनके साथ मारपीट की। इतना ही नहीं, केस दर्ज करने और दुकान बंद कराने की धमकी देकर उन पर दबाव बनाने की कोशिश भी की गई।
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सबूतों ने फंसाया: दरोगा को शायद यह अंदाजा नहीं था कि उनकी हर हरकत दुकान में लगे सीसीटीवी (CCTV) में कैद हो रही है। घटना के बाद एक ऑडियो क्लिप भी तेजी से वायरल हुई, जिसमें दरोगा की दबंगई साफ सुनी जा सकती थी।
SP की 'सर्जिकल स्ट्राइक': एसडीपीओ की जांच में फंसे दरोगा
जैसे ही यह मामला सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर गरमाया, पलामू एसपी रीष्मा रमेशन ने बिना देर किए कड़ा रुख अपनाया।
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जांच का आदेश: मामले की निष्पक्ष जांच की जिम्मेदारी हुसैनाबाद के एसडीपीओ (SDPO) मोहम्मद याकूब को सौंपी गई।
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आरोप पाए गए सही: एसडीपीओ की प्रारंभिक जांच में सीसीटीवी फुटेज और पीड़ित के बयानों के आधार पर एसआई के खिलाफ लगाए गए रंगदारी और मारपीट के आरोप शत-प्रतिशत सही पाए गए।
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निलंबन की कार्रवाई: जांच रिपोर्ट मिलते ही एसपी ने दरोगा नर्मदेश्वर सिंह को सस्पेंड कर दिया। इस कार्रवाई से पुलिस विभाग के उन अधिकारियों को सख्त संदेश गया है जो अपनी शक्ति का गलत इस्तेमाल करते हैं।
हुसैनाबाद और पलामू पुलिस का इतिहास: अनुशासन और चुनौतियां
पलामू जिला ऐतिहासिक रूप से उग्रवाद प्रभावित रहा है, जहाँ पुलिस और जनता के बीच बेहतर समन्वय (Co-ordination) ही शांति का आधार है।
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जनता का विश्वास: हुसैनाबाद जैसे इलाकों में छोटे दुकानदार और व्यवसायी पुलिस को अपना रक्षक मानते हैं। जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो कानून-व्यवस्था पर सवाल उठना लाजमी है। 2025 में भी पलामू पुलिस ने भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई थी।
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एसपी रीष्मा रमेशन का कार्यकाल: पलामू की वर्तमान एसपी अपनी पारदर्शी कार्यशैली के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने पद संभालते ही साफ किया था कि पुलिस की वर्दी सेवा के लिए है, न कि शोषण के लिए। एसआई नर्मदेश्वर सिंह पर हुई यह कार्रवाई इसी कड़ी का हिस्सा है।
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वायरल संस्कृति और न्याय: अब डिजिटल युग में पुलिस की मनमानी छुपाना नामुमकिन हो गया है। पलामू के इस मामले में 'डिजिटल एविडेंस' ने न्याय दिलाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है।
अगला कदम: विभागीय जांच और स्थानीय प्रतिक्रिया
निलंबन के बाद अब एसआई के खिलाफ विभागीय जांच (Departmental Inquiry) और भी गहनता से की जाएगी।
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विभागीय कार्रवाई: पुलिस प्रशासन अब यह देख रहा है कि क्या नर्मदेश्वर सिंह पहले भी इस तरह की गतिविधियों में संलिप्त रहे हैं। अगर दोष सिद्ध होता है, तो उनकी सेवा समाप्ति तक की नौबत आ सकती है।
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लोगों में खुशी: दरोगा पर कार्रवाई के बाद हुसैनाबाद के व्यापारियों और आम लोगों में संतोष का माहौल है। जपला-छत्तरपुर मार्ग के दुकानदारों ने कहा कि ऐसी कार्रवाई से पुलिस पर आम आदमी का भरोसा बढ़ता है।
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एसडीपीओ का बयान: मोहम्मद याकूब ने कहा कि पुलिस बल का कोई भी सदस्य कानून से ऊपर नहीं है। अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पलामू में दरोगा नर्मदेश्वर सिंह का निलंबन एक प्रतीक है कि न्याय अभी जिंदा है। एक छोटे चाय दुकानदार के हक के लिए जिले की सबसे बड़ी पुलिस अधिकारी का खड़ा होना लोकतंत्र की जीत है। यह घटना उन सभी पुलिसकर्मियों के लिए सबक है जो वर्दी पहनकर खुद को कानून समझने लगते हैं। शुभम पाठक को न्याय मिला है, लेकिन प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में कोई अन्य दरोगा 'चाय और रंगदारी' के इस खूनी खेल को न दोहराए। फिलहाल, हुसैनाबाद थाना क्षेत्र में पुलिस और पब्लिक के बीच रिश्तों को सुधारने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं।
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