Ghatshila Pride: मुरली ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स ने निकाली भव्य तिरंगा रैली, गालूडीह से जगन्नाथपुर तक गूँजा भारत माता का जयघोष, पंकज कुमार ने फहराया परचम
घाटशिला के मुरली ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स में 77वें गणतंत्र दिवस पर आयोजित भव्य रैली और सम्मान समारोह की पूरी रिपोर्ट यहाँ मौजूद है। गालूडीह वैष्णो देवी मंदिर से कॉलेज परिसर तक गूँजी देशभक्ति की लहर और संस्थान द्वारा बांटे गए विशेष उपहारों का पूरा विवरण विस्तार से पढ़िए वरना आप शिक्षा नगरी घाटशिला के इस सबसे बड़े राष्ट्रीय उत्सव को जानने से चूक जाएंगे।
घाटशिला (जमशेदपुर), 26 जनवरी 2026 – पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला क्षेत्र में आज देशभक्ति का एक ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने हर नागरिक के भीतर राष्ट्रप्रेम की अलख जगा दी। मुरली ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स (मुरली पारामेडिकल कॉलेज, मुरली इंटर कॉलेज एवं मुरली पब्लिक स्कूल) ने भारत का 77वां गणतंत्र दिवस अभूतपूर्व जोश और गरिमा के साथ मनाया। कार्यक्रम की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कॉलेज परिवार ने गालूडीह वैष्णो देवी मंदिर से लेकर जगन्नाथपुर चौक और हैंदलझुड़ी तक एक विशाल तिरंगा रैली निकाली, जिसने पूरे क्षेत्र को केसरिया, सफेद और हरे रंग में सराबोर कर दिया।
तिरंगा रैली और ध्वजारोहण: गूँजा भारत माता का जयघोष
समारोह की शुरुआत एक संकल्प यात्रा के साथ हुई, जो विभिन्न चौक-चौराहों से गुजरती हुई कॉलेज परिसर पहुँची।
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ध्वजारोहण: संस्थान के संयुक्त निदेशक श्री पंकज कुमार ने ध्वजारोहण कर तिरंगे को सलामी दी। राष्ट्रगान की गूँज के साथ ही पूरा परिसर अनुशासन और श्रद्धा के भाव से भर उठा।
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प्रेरक संबोधन: श्री पंकज कुमार ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा और अनुशासन ही वह माध्यम हैं जिनसे हम एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण कर सकते हैं।
सांस्कृतिक महाकुंभ: छात्रों ने बिखेरी प्रतिभा की छटा
कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने अपनी कला के माध्यम से भारतीय संविधान और संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को जीवंत किया।
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ओजस्वी वक्तव्य: विज्ञान वर्ग की छात्रा आस्था चौहान और वाणिज्य वर्ग के छात्र पामन सिंह ने देशभक्ति से ओत-प्रोत भाषण दिए, जिसे सुनकर सभागार तालियों की गूँज से भर उठा।
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सांस्कृतिक झलक: विद्यार्थियों ने देशभक्ति गीत और नृत्य प्रस्तुत किए, जो नागरिकों के कर्तव्यों और संवैधानिक मूल्यों पर आधारित थे।
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सम्मान समारोह: इस विशेष अवसर पर आसपास के मुखिया, वार्ड सदस्य, सेवानिवृत्त शिक्षक और समाजसेवियों को संस्थान की ओर से डायरी और नया कैलेंडर देकर सम्मानित किया गया।
मुरली ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स: उत्सव डायरी (Event Snapshot)
| विवरण | प्रमुख जानकारी (Key Details) |
| मुख्य अतिथि | श्री पंकज कुमार (संयुक्त निदेशक) |
| रैली का मार्ग | गालूडीह वैष्णो देवी मंदिर -> जगन्नाथपुर -> कॉलेज परिसर |
| प्रमुख वक्ता | आस्था चौहान (विज्ञान), पामन सिंह (वाणिज्य) |
| संयोजक टीम | डॉ. नूतन रानी, विजया बोस एवं समस्त शिक्षक गण |
| स्लोगन | "शिक्षित युवा, सशक्त भारत" |
इतिहास का पन्ना: घाटशिला की 'कॉपर सिटी' से 'एजुकेशन हब' तक की यात्रा
घाटशिला का इतिहास केवल तांबे की खदानों (HCL) तक सीमित नहीं है। यह क्षेत्र सदियों से साहित्य और संस्कृति का केंद्र रहा है। महान बंगाली लेखक विभूतिभूषण बंद्योपाध्याय की कर्मभूमि होने के नाते घाटशिला ने हमेशा ज्ञान को प्राथमिकता दी है। इतिहास गवाह है कि 1950 में जब देश का संविधान लागू हुआ, तब घाटशिला के लोगों ने शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भरता का सपना देखा था। मुरली ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स आज उसी विरासत को आगे बढ़ा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में इस संस्थान ने पारामेडिकल और स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में घाटशिला को एक नई पहचान दी है। आज की यह भव्य रैली और गणतंत्र का जश्न इस बात का गवाह है कि यह शहर अब केवल खदानों के लिए नहीं, बल्कि जागरूक और शिक्षित युवाओं के लिए जाना जाता है।
वरिष्ठ शिक्षाविदों और अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में को-ऑर्डिनेटर प्राचार्या डॉ. नूतन रानी, श्रीमती विजया बोस, पीतांबर सोरेन, देवी रानी जाना और मार्केटिंग मैनेजर जयंत कुमार भगत की अहम भूमिका रही। शिक्षकों में असफरुल उल हक, कलीमुद्दीन, सुदीप दत्ता और नमिता बेरा ने बच्चों का मार्गदर्शन किया।
कार्यक्रम के अंत में पारंपारिक तरीके से मिठाइयों का वितरण किया गया। संस्थान ने यह संकल्प लिया कि वे केवल डिग्री नहीं, बल्कि ऐसे नागरिक तैयार करेंगे जो देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
विकसित भारत का मजबूत स्तंभ
मुरली ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स में मनाया गया यह 77वां गणतंत्र दिवस अनुशासन और राष्ट्रवाद की एक नई मिसाल पेश कर गया।
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