Manoharpur Tragedy: मनोहरपुर के हतनाबुरू गांव में 7 साल के बच्चे की संदिग्ध मौत, मलेरिया इंजेक्शन के बाद शरीर में आई अकड़न, अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ा, क्या झारखंड के ग्रामीण इलाकों में फर्जी चिकित्सकों का नेटवर्क ले रहा है मासूमों की जान?
पश्चिमी सिंहभूम के मनोहरपुर प्रखंड के हतनाबुरू गांव में 7 वर्षीय अंकित तांती की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। परिजनों ने पहले बच्चे को एक झोलाछाप चिकित्सक को दिखाया था, जिसने मलेरिया बताकर इंजेक्शन दिया। दवा के बाद बच्चे के शरीर में अकड़न आ गई और अस्पताल ले जाते समय उसने दम तोड़ दिया।
पश्चिमी सिंहभूम जिले के दूरदराज के इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और शिक्षा के अभाव का फायदा उठाकर अवैध तरीके से इलाज करने वाले 'झोलाछाप' डॉक्टरों का कहर एक बार फिर सामने आया है। मनोहरपुर प्रखंड के छोटानागरा अंतर्गत हतनाबुरू गांव में बुधवार को एक 7 वर्षीय मासूम बच्चे की संदिग्ध मौत हो गई। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना का सीधा संबंध एक स्थानीय चिकित्सक द्वारा किए गए इलाज से जोड़ा जा रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में डर और आक्रोश का माहौल है।
झारखंड के ग्रामीण इलाकों में झोलाछाप डॉक्टरों का नेटवर्क एक गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य समस्या रहा है। दूर और कमजोर स्वास्थ्य ढांचे के कारण, ग्रामीण अक्सर इन अयोग्य लोगों पर भरोसा करते हैं, जिसका खामियाजा अंकित तांती जैसे मासूमों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ता है।
मलेरिया इंजेक्शन के बाद शरीर में आई अकड़न
हतनाबुरू गांव निवासी गोविंद तांती के पुत्र अंकित तांती की तबीयत पिछले 5 दिनों से खराब चल रही थी।
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झोलाछाप इलाज: पिता की गैर मौजूदगी में परिजनों ने शुरुआत में बच्चे को छोटानागरा के एक झोलाछाप चिकित्सक को दिखाया। चिकित्सक ने जांच कराने के बाद अंकित को मलेरिया बताया और उसे मलेरिया इंजेक्शन के डोज दिए।
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दवा का साइड इफेक्ट: दुर्भाग्यवश, झोलाछाप चिकित्सक द्वारा दी गई दवा के बाद से अंकित की तबियत सुधरने के बजाय और बिगड़ गई। उसे तेज लूज मोशन शुरू हो गए और सबसे खतरनाक बात यह हुई कि उसके शरीर में अकड़न (Stiffness) आने लगी।
अस्पताल पहुंचने से पहले ही थम गई सांसें
बच्चे की बिगड़ती तबीयत को देखकर घबराए परिजनों ने उसे तत्काल मनोहरपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले जाने का फैसला किया।
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रास्ते में मौत: हालांकि, अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में बच्चे ने दम तोड़ दिया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया, जिससे परिजनों के बीच मातम पसरे गया।
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आधिकारिक बयान: प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, मनोहरपुर डॉ. अनिल कुमार ने पुष्टि की कि जब बच्चा अस्पताल पहुंचा तब तक उसकी मृत्यु हो चुकी थी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बच्चे को वास्तव में मलेरिया था या नहीं, इसकी कोई जांच नहीं की गई है और परिजनों ने भी कोई रिपोर्ट नहीं दिखाई।
यह घटना झारखंड के स्वास्थ्य तंत्र पर एक करारा तमाचा है। सरकार और प्रशासन को सिर्फ यह सुनिश्चित नहीं करना चाहिए कि झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि ग्रामीणों को उनके करीब ही विश्वसनीय और सस्ती चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हों, ताकि इस तरह के असमय और निर्दोष मौतों को रोका जा सके। हतनाबुरू गांव में मासूम अंकित की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है।
आपकी राय में, झारखंड के ग्रामीण इलाकों में झोलाछाप डॉक्टरों के बढ़ते दबदबे को खत्म करने और वास्तविक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग को कौन से दो सबसे अनिवार्य और सतत कदम उठाने चाहिए?
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