Koderma Accident: कोडरमा में बंद खदान बनी काल, कपड़ा धोने गई महिला की पानी में डूबने से मौत, 70 फीट गहरी खदान में चला सर्च ऑपरेशन
कोडरमा के डोमचांच में 50 वर्षीया संगीता देवी की बंद पड़ी पत्थर खदान में डूबने से मौत हो गई है। एनडीआरएफ और गोताखोरों द्वारा 70 फीट गहरे पानी में शव की तलाश और खदानों के खौफनाक सच की पूरी रिपोर्ट यहाँ मौजूद है।
कोडरमा, 28 फरवरी 2026 – झारखंड के कोडरमा जिले में मौत का जाल बिछा चुकी बंद खदानों ने एक और जिंदगी लील ली है। शनिवार की सुबह डोमचांच थाना क्षेत्र के काराखुट में एक हृदयविदारक घटना घटी, जहाँ 50 वर्षीय महिला संगीता देवी की एक बंद पड़ी पत्थर खदान के गहरे पानी में डूबने से मौत हो गई। यह हादसा उस वक्त हुआ जब वह रोजाना की तरह घरेलू काम के लिए खदान के पास गई थीं। इस घटना ने एक बार फिर जिले में असुरक्षित तरीके से छोड़ी गई खदानों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कपड़े पड़े रहे, मां गायब: बेटी की चीख से मचा हड़कंप
मृतका की पहचान काराखुट निवासी विजय सिंह की पत्नी संगीता देवी के रूप में हुई है। घटनाक्रम कुछ इस प्रकार रहा:
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रोजमर्रा का काम: संगीता देवी सुबह घर से कपड़े धोने के लिए पास की खदान पर गई थीं।
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बेटी की तलाश: जब काफी देर तक वह वापस नहीं लौटीं, तो उनकी छोटी बेटी उन्हें देखने खदान की ओर गई। वहां का नजारा देखकर उसके होश उड़ गए; पत्थर पर मां के कपड़े और साबुन तो रखे थे, लेकिन मां का कहीं पता नहीं था।
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पैर फिसलने की आशंका: स्थानीय लोगों का मानना है कि कपड़े धोने के दौरान पत्थर पर काई या फिसलन की वजह से उनका संतुलन बिगड़ गया होगा और वह सीधे 70 फीट गहरे पानी में जा गिरीं।
बचाव अभियान: एनडीआरएफ और गोताखोरों को बुलावा
खदान में पानी इतना गहरा और स्थिर है कि बिना पेशेवर मदद के शव निकालना असंभव था।
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पुलिस की मौजूदगी: सूचना मिलते ही डोमचांच थाना प्रभारी अभिमन्यु पड़िहार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे।
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गोताखोर तैनात: प्रशासन ने तुरंत चौपारण से गोताखोरों की टीम को बुलाया है। इसके साथ ही एनडीआरएफ (NDRF) की टीम को भी अलर्ट कर दिया गया है ताकि रेस्क्यू ऑपरेशन को तेज किया जा सके।
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गहरा संकट: खदान की गहराई 60 से 70 फीट बताई जा रही है, जो इसे बेहद खतरनाक बनाती है।
कोडरमा खदान हादसा: मुख्य विवरण
| विवरण | प्रमुख जानकारी |
| मृतका | संगीता देवी (50 वर्ष) |
| स्थान | काराखुट, डोमचांच (कोडरमा) |
| खदान की गहराई | लगभग 70 फीट |
| रेस्क्यू टीम | एनडीआरएफ और चौपारण के गोताखोर |
| कारण | पैर फिसलना (संभावित) |
ग्रामीणों का आक्रोश: कब तक जाएगी जान?
हादसे के बाद गांव में भारी गम और गुस्सा देखा जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सुरक्षा घेरा (Fencing) न होने की वजह से आए दिन मवेशी और अब इंसान इन खदानों की भेंट चढ़ रहे हैं।
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प्रशासनिक ढिलाई: लोगों का आरोप है कि खदान मालिकों ने काम बंद होने के बाद नियमों का पालन नहीं किया।
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चेतावनी बोर्ड की कमी: किसी भी खदान के पास खतरे का कोई बोर्ड या घेराबंदी नहीं है, जिससे अनजान लोग या बच्चे इसकी चपेट में आ जाते हैं।
सुरक्षा नियमों की बलि
संगीता देवी की मौत ने एक बार फिर कोडरमा प्रशासन को आईना दिखाया है। जब तक इन बंद खदानों की फेंसिंग नहीं की जाती, तब तक ऐसे हादसों को रोकना मुश्किल होगा। फिलहाल पूरा गांव गोताखोरों के ऑपरेशन पर नजरें गड़ाए बैठा है।
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