Koderma Fraud: डिजिटल गिरफ्तारी से डरकर दंपती ने खोए 51 लाख, साइबर ठगी का बड़ा जाल
कोडरमा में साइबर ठगों ने अपनाया नया तरीका। दिल्ली पुलिस और सीबीआई अधिकारी बनकर सेवानिवृत्त बैंककर्मी दंपती को 2 दिन तक 'डिजिटल हाउस अरेस्ट' में कैसे रखा गया। डर के मारे 51 लाख रुपये किस खाते में हस्तांतरित कर दिए गए। पुलिस ने लोगों को सावधान रहने की अपील क्यों की।
कोडरमा, 9 दिसंबर 2025 – जिले में साइबर अपराध (Cyber Crime) का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। ठगों ने अब ऐसे नए तरीके अपनाए हैं, जिनका अंदाजा आम लोगों को लगाना भी मुश्किल साबित हो रहा है। हाल ही में मनी लांड्रिंग (Money Laundering) का हवाला देकर कोडरमा थाना क्षेत्र के निवासी सेवानिवृत्त बैंक कर्मी सुरेश प्रसाद गुप्ता और उनकी पत्नी से 51 लाख रुपये ठगने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस ने इसे साइबर अपराध का एक बड़ा उदाहरण बताया है और जनता को सतर्क रहने की जोरदार अपील की है।
'डिजिटल हाउस अरेस्ट' में रखा दंपती
ठगों ने खुद को दिल्ली पुलिस और सीबीआई (CBI) के अधिकारी बताया। उन्होंने दंपती को वीडियो कॉल के जरिए लगातार दो दिनों तक तथाकथित 'डिजिटल हाउस अरेस्ट' में रखा। इस दौरान, उन्हें किसी से भी बात करने या अपना मोबाइल बंद करने की अनुमति नहीं दी गई।
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जाल की शुरुआत: पीड़ित सुरेश प्रसाद गुप्ता के अनुसार, एक महिला ने उन्हें फोन करके बताया कि उनके आधार से एक नया मोबाइल संख्या और बैंक खाता खुला है, जिसमें अवैध लेन-देन (Illegal Transaction) हुआ है। इसके बाद तीन अलग-अलग संख्याओं से फोन आए, जिसमें बात करने वालों ने खुद को दिल्ली पुलिस और सीबीआई का अधिकारी बताया। ठगों ने कहा कि सीबीआई के पुलिस अधीक्षक समाधान पवार और दिल्ली पुलिस के अधिकारी मामले की जाँच कर रहे हैं।
फर्जी न्यायालय और गिरफ्तारी का डर
विगत दो दिसंबर की सुबह वीडियो कॉन्फ्रेंस (Video Conference) के नाम पर पीड़ित को एक कथित सीबीआई न्यायालय के न्यायाधीश (Judge) के सामने पेश किया गया। फर्जी न्यायालय में दंपती पर मनी लांड्रिंग के गंभीर आरोप लगाए गए और उनके पास मौजूद नकदी, सावधि जमा (Fixed Deposit), सोने और शेयरों की जानकारी मांगी गई।
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बड़ी ठगी: ठगों ने आदेश का पालन न करने पर गिरफ्तारी और वारंट जारी करने की धमकी दी। डर कर पीड़ित ने अपनी सभी सावधि जमा को तोड़कर बैंक खाते में जमा करा दिया। इसके बाद ठगों के निर्देश पर 51 लाख रुपये मध्य प्रदेश के सेंधवा स्थित एक खाते में हस्तांतरित कर दिए गए, जिसका नाम पतिमो पीएम इस्टेट्स एलएलपी बताया गया है। तीन दिन बाद पीड़ित ने कोडरमा थाना में आवेदन देकर मामला दर्ज कराया है।
सतर्कता ही बचाव है: पुलिस अधीक्षक
पुलिस अधीक्षक अनुदीप सिंह ने इस घटना पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि लगातार जागरूकता अभियान चलाए जाने के बावजूद लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि साइबर ठग लॉटरी, डिजिटल गिरफ्तारी और फर्जी नौकरी के प्रस्ताव जैसे नए तरीकों से लोगों को फंसा रहे हैं।
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आवश्यक सूचना: पुलिस अधीक्षक ने अपील की है कि कोई भी व्यक्ति अपने बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी किसी को न दे। अज्ञात संपर्क कड़ी, ईमेल या अनुप्रयोग (Apps) को तुरंत हटा दें। किसी भी प्रकार की ठगी होने पर तुरंत 1930 पर संपर्क करें या साइबर अपराध के सरकारी वेबसाइट पर शिकायत दर्ज कराएं।
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