Koderma ACB Raid : बिजली विभाग के लाइनमैन ने मांगे 15 हजार, 5 हजार लेते दबोचा
कोडरमा में एसीबी की बड़ी कार्रवाई, बिजली विभाग के लाइनमैन सुनील कुमार 5 हजार रुपये घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, सिक्योरिटी मनी दिलाने के नाम पर मांगी थी रिश्वत, पीड़ित ने शिकायत की तो बिछा दिया गया जाल।
कोडरमा: हजारीबाग एसीबी की टीम ने कोडरमा जिले में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए बिजली विभाग के एक कर्मी को 5 हजार रुपये की घूस लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार कर्मी का नाम सुनील कुमार है, जो झुमरीतिलैया स्थित विद्युत कार्यालय में लाइनमैन के पद पर कार्यरत है।
शिकायतकर्ता बिजली कनेक्शन कटवाने का कर रहा था चक्कर
शिकायतकर्ता राजू यादव, जो डोमचांच के सपही गांव के रहने वाले हैं, ने बताया कि उनका नीरू पहाड़ी के पास एक ऐश ब्रिक्स प्लांट था। इसके लिए उन्होंने कुछ साल पहले कॉमर्शियल बिजली कनेक्शन लिया था।
बाद में उन्होंने प्लांट बंद कर दिया और बिजली कनेक्शन कटवाने के साथ सिक्योरिटी मनी वापस लेने के लिए झुमरीतिलैया बिजली कार्यालय के कई चक्कर लगाए।
खास बात: यह कोई नया कनेक्शन लेने का मामला नहीं था, बल्कि प्लांट बंद करने के बाद जमा सिक्योरिटी मनी वापस पाने का मामला था। फिर भी कर्मचारी ने पैसे मांगे।
15 हजार की मांग, 5 हजार पर मामला फंसा
शिकायत के मुताबिक, इस दौरान शिकायतकर्ता की मुलाकात लाइनमैन सुनील कुमार से हुई। आरोप है कि सुनील ने कनेक्शन बंद करने और सिक्योरिटी मनी दिलाने के बदले 15 हजार रुपये की मांग की थी।
लेकिन बाद में सौदा 5 हजार रुपये पर तय हुआ। पीड़ित ने इसकी शिकायत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB), हजारीबाग में कर दी।
एसीबी ने बिछाया जाल, मौके पर दबोचा
शिकायत की जांच के बाद एसीबी टीम ने जाल बिछाया। गुरुवार को जैसे ही सुनील कुमार ने बिजली कार्यालय के पास 5 हजार रुपये लिए, टीम ने उसे मौके पर ही पकड़ लिया।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| गिरफ्तार कर्मी | सुनील कुमार (लाइनमैन) |
| स्थान | झुमरीतिलैया बिजली कार्यालय, कोडरमा |
| शिकायतकर्ता | राजू यादव (सपही, डोमचांच) |
| मूल मांग | 15,000 रुपये |
| तय रकम | 5,000 रुपये |
| कार्रवाई | रंगे हाथों गिरफ्तार |
| अगली कार्रवाई | हजारीबाग ले जाया गया, पूछताछ जारी |
गिरफ्तारी के बाद हजारीबाग ले जाया गया आरोपी
गिरफ्तारी के बाद सुनील कुमार को हजारीबाग ले जाया गया, जहां उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। एसीबी की टीम यह भी पता लगा रही है कि क्या उसने पहले भी इस तरह की रिश्वतखोरी की है।
कोडरमा में रिश्वतखोरी का इतिहास
कोडरमा जिला पिछले कुछ समय में भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर सुर्खियों में रहा है। यह पहली बार नहीं है जब एसीबी ने बिजली विभाग में छापेमारी की हो।
पिछली बड़ी कार्रवाइयां:
| तारीख | स्थान | कार्रवाई |
|---|---|---|
| अप्रैल 2025 | कोडरमा | लाइनमैन को ₹5000 रिश्वत में गिरफ्तार |
| मार्च 2025 | हजारीबाग | बीडीओ कार्यालय में ₹4000 की रिश्वत |
| फरवरी 2025 | कोडरमा | आपूर्ति विभाग के क्लर्क की गिरफ्तारी |
यह कार्रवाई क्यों है खास?
इस मामले की खास बात यह है कि शिकायतकर्ता ने सिक्योरिटी मनी वापस पाने के लिए चक्कर लगाए। उसे अपना पैसा वापस मिलना था, फिर भी कर्मचारी ने रिश्वत मांगी।
एसीबी के अनुसार: सिक्योरिटी मनी वापस करना तो बिजली विभाग का काम है, लेकिन लाइनमैन ने इसे अपनी कमाई का जरिया बना लिया।
एसीबी की लोगों से अपील
एसीबी के अधिकारियों ने एक बार फिर लोगों से अपील की है कि अगर कोई सरकारी कर्मचारी या अधिकारी काम के बदले रिश्वत मांगता है, तो तुरंत एसीबी से शिकायत करें।
एसीबी का कहना है: "हम शिकायतकर्ता की पहचान गुप्त रखते हैं और उचित कार्रवाई करते हैं। लोगों को डरना नहीं चाहिए।"
बिजली कनेक्शन बंद कराने पर क्यों मांगी गई रिश्वत?
विशेषज्ञों के अनुसार, यह एक बड़ी विडंबना है कि लोग नया कनेक्शन लेने के लिए तो रिश्वत देते ही हैं, कनेक्शन कटवाने के लिए भी रिश्वत देनी पड़ रही है।
इस तरह की घटनाएं बताती हैं:
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बिजली विभाग में भ्रष्टाचार गहरा है
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छोटे कर्मचारी से लेकर बड़े अधिकारी तक इस धंधे में शामिल हो सकते हैं
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आम आदमी को हर कदम पर रिश्वत देनी पड़ रही है
इंटरैक्टिव भाग – क्या आपको भी देनी पड़ी है कभी रिश्वत?
क्या आपने कभी किसी सरकारी काम के लिए रिश्वत दी है? क्या आपने इसकी शिकायत कभी एसीबी से की?
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कमेंट में बताएं – आपके अनुसार रिश्वतखोरी को कैसे रोका जा सकता है?
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रिश्वतखोरी के खिलाफ कानून – कितनी है सजा?
भारत में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिश्वत लेना और देना दोनों अपराध हैं।
| अपराध | सजा |
|---|---|
| रिश्वत लेना | 6 माह से 7 साल की सजा + जुर्माना |
| रिश्वत देना | 6 माह से 5 साल की सजा + जुर्माना |
| झूठी शिकायत | 1 साल तक की सजा |
ध्यान रखें: रिश्वत देना उतना ही अपराध है जितना लेना। इसलिए रिश्वत देने के बजाय शिकायत करना ज्यादा बेहतर है।
आगे क्या होगा?
एसीबी ने सुनील कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। उसे न्यायिक हिरासत में भेजा जाएगा।
पुलिस जांच के बिंदु:
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क्या इस धंधे में और भी कर्मचारी शामिल हैं?
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क्या लाइनमैन ने पहले भी ऐसा किया है?
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शिकायतकर्ता की सिक्योरिटी मनी का क्या हुआ?
जमानत की संभावना: इस तरह के मामलों में जमानत मिलना आसान नहीं होता। कोर्ट सख्ती से पेश आती है।
सतर्क रहें, रिश्वत न दें
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि एसीबी लगातार सक्रिय है। लोगों को भी आगे आना चाहिए और बिना डरे शिकायत करनी चाहिए।
याद रखें: आपके पैसे पर आपका अधिकार है। सिक्योरिटी मनी वापस पाने के लिए रिश्वत देना आपका पैसा बढ़ाना नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना है।
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