Kiriburu Violence : तमिल भाषा को लेकर हुए विवाद में मजदूर के गले पर रेता था चाकू, आरोपी कालू करूआ गिरफ्तार, भेजा गया जेल
किरीबुरू के मिलन चौक पर चंद्रमोहन गोप के गले पर चाकू से जानलेवा हमला करने वाले आरोपी कालू करूआ को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। भाषा के विवाद और सेल अस्पताल की इस पूरी इनसाइड स्टोरी यहाँ देखें।
किरीबुरू/चाईबासा, 18 मई 2026 – पश्चिम सिंहभूम जिले के उग्रवाद प्रभावित और खनन क्षेत्र किरीबुरू से एक बेहद हैरान करने वाली और खौफनाक वारदात सामने आई है। किरीबुरू थाना क्षेत्र के मिलन चौक पर एक मजदूर के गले पर चाकू से जानलेवा हमला करने वाले शातिर आरोपी कालू करूआ को पुलिस ने चौबीस घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया है। किरीबुरू थाना प्रभारी रोहित कुमार के नेतृत्व में पुलिस की विशेष टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को दबोचा और सोमवार को न्यायिक हिरासत में चाईबासा जेल भेज दिया। इस घटना के पीछे भाषा को लेकर उपजा एक ऐसा विवाद था, जिसने पल भर में खूनी रूप अख्तियार कर लिया।
वारदात की दास्तां: तमिल भाषा में बात, मजाक का जवाब और सीधे गले पर वार
यह खौफनाक घटना 16 मई की देर शाम मिलन चौक के पास घटित हुई, जिसने पूरे बाजार क्षेत्र में अफरा-तफरी मचा दी थी।
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दुकान पर हुआ आमना-सामना: मिलन चौक निवासी 32 वर्षीय चंद्रमोहन गोप (पिता: टिमरा गोप) दिन भर मजदूरी करने के बाद शाम को घर लौटा था। इसके बाद वह घर का कुछ जरूरी सामान लेने के लिए पास की एक दुकान पर गया।
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तमिल भाषा का वो रहस्य: उसी समय वहाँ करूआ बस्ती का रहने वाला कालू करूआ पहुंचा। वह चंद्रमोहन से तमिल भाषा (Tamil Language) में कुछ कहने लगा। चंद्रमोहन को तमिल समझ में नहीं आती थी, इसलिए उसने बिना सोचे-समझे कालू की बात का जवाब मजाकिया अंदाज में दे दिया।
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सीधे गले पर हमला: चंद्रमोहन का मजाक उड़ाना कालू करूआ को नागवार गुजरा। वह अचानक आगबबूला हो गया और अपनी जेब से तेज धारदार चाकू निकालकर सीधे चंद्रमोहन के गले पर वार कर दिया।
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खून से लथपथ हुआ चौक: प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमला इतना जोरदार और सटीक था कि चंद्रमोहन के गले से खून का फव्वारा फूट पड़ा और वह वहीं जमीन पर गिर गया। स्थानीय लोगों ने बिना वक्त गंवाए घायल युवक को तत्काल किरीबुरू स्थित 'सेल अस्पताल' (SAIL Hospital) पहुंचाया, जहां डॉक्टरों की मुस्तैदी से उसकी जान बच सकी। डॉक्टरों के अनुसार, चंद्रमोहन की हालत अब खतरे से बाहर है।
प्रशासनिक रुख: थाना प्रभारी की कमान और कालू का ठिकाना ध्वस्त
चंद्रमोहन के बयान और चश्मदीदों की गवाही के बाद किरीबुरू थाना प्रभारी रोहित कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए खुद कमान संभाली।
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संभावित ठिकानों पर दबिश: घटना के बाद से ही कालू करूआ जंगलों और अपनी बस्ती के आसपास छिपने की कोशिश कर रहा था।
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तकनीकी सर्विलांस का सहारा: पुलिस ने स्थानीय मुखबिरों और तकनीकी इनपुट्स के आधार पर छापेमारी कर कालू को उसके एक सीक्रेट ठिकाने से धर-दबोचा।
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न्यायिक हिरासत: सोमवार को कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे सीधे जेल भेज दिया गया।
शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए गश्त जरूरी
किरीबुरू पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने मिलन चौक के व्यापारियों और स्थानीय मजदूरों के बीच सुरक्षा की भावना को दोबारा बहाल किया है। हालांकि, यह घटना यह भी सबक देती है कि सड़कों और बाजारों में रात के समय पुलिस की गश्त को और मजबूत किया जाना चाहिए ताकि शराब या किसी अन्य नशे के प्रभाव में असामाजिक तत्व इस तरह के जानलेवा हादसों को अंजाम न दे सकें। फिलहाल, कालू करूआ के जेल जाने से मिलन चौक के लोगों ने राहत की सांस ली है।
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