Khunti Witch Hunt: खूंटी में डायन बताकर दंपती पर टांगी से हमला, भतीजों ने चाचा-चाची को काट डाला
खूंटी के मारंगहादा में डायन-बिसाही के शक में दंपती पर टांगी से जानलेवा हमला हुआ है। भतीजों की हैवानियत और रिम्स में भर्ती घायल सिनी पहनाईन की नाजुक हालत की पूरी इनसाइड रिपोर्ट यहाँ देखें।
खूंटी/मारंगहादा, 9 अप्रैल 2026 – झारखंड के खूंटी जिले में अंधविश्वास की जड़ें कितनी गहरी और खतरनाक हैं, इसकी एक खौफनाक बानगी मारंगहादा थाना क्षेत्र के कातुब गांव में देखने को मिली है। यहाँ डायन-बिसाही के शक में एक परिवार के भीतर ही खूनी खेल खेला गया। सगे भतीजों ने अपने ही चाचा गुईया पाहन और चाची सिनी पहनाईन पर टांगी (कुल्हाड़ी) से जानलेवा हमला कर उन्हें अधमरा कर दिया। इस हमले में सिनी पहनाईन के सिर पर गंभीर चोटें आई हैं, जिन्हें देखते हुए उन्हें रांची के रिम्स (RIMS) अस्पताल में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। गांव में इस वारदात के बाद से सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं।
करंज से शुरू हुआ विवाद, टांगी पर हुआ खत्म
वारदात की शुरुआत एक मामूली विवाद से हुई थी, जिसे अंधविश्वास ने हिंसक मोड़ दे दिया।
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बहस की जड़: गुईया पाहन के अनुसार, विवाद की शुरुआत करंज का फल तोड़ने को लेकर हुई थी। उनके भतीजे कुंवर पाहन और हंगीरा पाहन से इसी बात पर कहासुनी हुई थी।
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अचानक हमला: हालांकि गांव वालों ने उस समय मामला शांत करा दिया था, लेकिन भतीजों के मन में कुछ और ही चल रहा था। रात के अंधेरे में दोनों आरोपी टांगी लेकर गुईया के घर में घुस गए और सोते हुए दंपती पर ताबड़तोड़ वार कर दिए।
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बचने की कोशिश: गुईया पाहन ने खुद को बचाने की कोशिश की, लेकिन हमलावरों ने उनकी पत्नी सिनी को निशाना बनाया और उनके सिर पर गहरा वार कर दिया।
डायन का कलंक: बीमारी बनी हमले की वजह
अंधविश्वास के इस मामले के पीछे की असली वजह और भी डरावनी है।
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लंबे समय से प्रताड़ना: घायल गुईया ने पुलिस को बताया कि उनके बड़े भाई की पत्नी सोमवारी देवी अक्सर बीमार रहती हैं।
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गलतफहमी और शक: इलाज कराने के बजाय भाई और भतीजे यह मान बैठे थे कि उनकी चाची सिनी पहनाईन 'डायन' है और उसी ने जादू-टोना किया है।
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सुनियोजित साजिश: करंज तोड़ने का विवाद तो महज एक बहाना था, असली मकसद सिनी को रास्ते से हटाना था क्योंकि परिवार उन्हें अपनी बीमारियों के लिए जिम्मेदार मानता था।
एक सामाजिक कलंक
खूंटी और आसपास के आदिवासी बहुल इलाकों में डायन-बिसाही के नाम पर होने वाली हिंसा का इतिहास काफी पुराना और दुखद रहा है।
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पुरानी कुप्रथा: झारखंड के गठन के बाद से ही सरकार ने 'डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम 2001' लागू किया है, लेकिन जमीनी स्तर पर शिक्षा और जागरूकता की कमी के कारण आज भी ऐसी घटनाएं आम हैं।
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इतिहास की गूँज: खूंटी कभी 'पाथलगड़ी' जैसे आंदोलनों और अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए चर्चा में रहा, लेकिन डायन के नाम पर होने वाली हत्याओं ने इस जिले की छवि को वैश्विक स्तर पर प्रभावित किया है।
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जागरूकता का अभाव: स्थानीय जानकारों का कहना है कि जब गांव में कोई बीमार पड़ता है, तो लोग डॉक्टर के पास जाने के बजाय 'ओझा-गुणी' के पास जाते हैं, जो अक्सर निर्दोष महिलाओं को डायन करार देकर हिंसा भड़काते हैं।
पुलिस की कार्रवाई: फरार भतीजों की तलाश में छापेमारी
मारंगहादा थाना प्रभारी विकास जायसवाल ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए सक्रिय है।
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आरोपियों की पहचान: मुख्य आरोपी कुंवर पाहन और हंगीरा पाहन वारदात के बाद से ही गांव छोड़कर फरार हैं। पुलिस उनके संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।
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रिम्स में बयान: पुलिस की एक टीम रांची भेजी गई है ताकि घायलों का आधिकारिक बयान दर्ज कर कड़ी धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज की जा सके।
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गांव में सुरक्षा: कातुब गांव में तनाव को देखते हुए पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है ताकि दोबारा किसी तरह की हिंसा न हो।
खूंटी की यह घटना समाज के चेहरे पर एक जोरदार तमाचा है। जिस युग में हम अंतरिक्ष की बात कर रहे हैं, वहां एक भतीजा अपनी ही चाची को महज इसलिए मौत के घाट उतारने की कोशिश करता है क्योंकि वह उसे 'डायन' समझता है। करंज के फल से शुरू हुई लड़ाई का अंत रिम्स के आईसीयू में होना, हमारे सामाजिक और शैक्षिक ढांचे की विफलता को दर्शाता है। जब तक समाज से अंधविश्वास का यह जहर खत्म नहीं होगा, तब तक कोई भी कानून ऐसी मासूम महिलाओं की जान बचाने में पूरी तरह सफल नहीं हो पाएगा। फिलहाल, पूरा गांव सिनी पहनाईन के बचने की दुआ कर रहा है ताकि न्याय की उम्मीद जिंदा रहे।
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