Kalimati Earth Day : उत्क्रमित उच्च विद्यालय में 'सेव अर्थ सेव लाइफ' थीम पर धूमधाम से मनाया पृथ्वी दिवस
कालीमाटी स्थित उत्क्रमित उच्च विद्यालय में पृथ्वी दिवस पर आयोजित हुए विशेष कार्यक्रम, जहां छात्रों ने चित्रांकन प्रतियोगिता और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
जमशेदपुर के कालीमाटी स्थित उत्क्रमित उच्च विद्यालय, आजाद बस्ती में 22 अप्रैल को विश्व पृथ्वी दिवस का भव्य आयोजन किया गया। 'सेव अर्थ सेव लाइफ' थीम पर आधारित इस कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने चित्रांकन प्रतियोगिता और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
कार्यक्रम की मुख्य झलकियाँ
1. प्रेरक शुभारंभ:
- प्रधानाध्यापक धनंजय श्रीवास्तव के प्रेरणादायक भाषण से शुरुआत
- "हमारी छोटी-छोटी आदतें बदल सकती हैं पृथ्वी का भविष्य" का संदेश
- पृथ्वी दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला
2. चित्रांकन प्रतियोगिता:
- 50 से अधिक छात्रों ने 'सेव अर्थ सेव लाइफ' थीम पर पोस्टर बनाए
- प्लास्टिक प्रदूषण, जल संरक्षण और वृक्षारोपण जैसे विषयों पर रचनात्मक अभिव्यक्ति
- सर्वश्रेष्ठ तीन पोस्टर बनाने वाले छात्रों को पुरस्कृत किया गया
3. सांस्कृतिक कार्यक्रम:
- पर्यावरण जागरूकता पर आधारित नाटक "धरती माँ की पुकार"
- "हमारी धरती, हमारी जिम्मेदारी" विषय पर गीत-संगीत प्रस्तुति
- पारंपरिक नृत्य के माध्यम से प्रकृति और मानव के संबंधों को दर्शाया
छात्रों की सक्रिय भागीदारी
- कक्षा 6-8 के छात्रों ने पुराने अखबारों से बने पौधे के गमले प्रदर्शित किए
- सीनियर छात्रों ने "वेस्ट मैनेजमेंट मॉडल" प्रस्तुत किया
- छात्राओं ने पुराने कपड़ों से बने थैले वितरित कर प्लास्टिक मुक्त जीवन का संदेश दिया
शिक्षकों और विशेषज्ञों के विचार
प्रधानाध्यापक धनंजय श्रीवास्तव ने कहा,
"हमारा उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पढ़ाना नहीं, बल्कि छात्रों को जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है। आज के ये छात्र कल के नीति निर्माता होंगे, इसलिए पर्यावरण संरक्षण की शिक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है।"
विज्ञान शिक्षिका सुश्री रीता कुमारी ने बताया,
"हमने छात्रों को समझाया कि कैसे एक छोटा सा पौधा भी वायु प्रदूषण को कम करने में मदद कर सकता है।"
पृथ्वी दिवस का ऐतिहासिक संदर्भ
- विश्व पृथ्वी दिवस की शुरुआत 1970 में अमेरिकी सीनेटर गेलॉर्ड नेल्सन ने की
- भारत में पहली बार 1980 के दशक में मनाने की शुरुआत हुई
- 2025 की थीम: "प्लैनेट वर्सेस प्लास्टिक्स"
- 193 देशों द्वारा प्रतिवर्ष 22 अप्रैल को मनाया जाता है
छात्रों की प्रतिक्रियाएं
कक्षा 9 की छात्रा प्रियंका कुमारी ने बताया,
"मैंने अपने पोस्टर में दिखाया कि कैसे एक प्लास्टिक की बोतल 450 साल तक नष्ट नहीं होती। अब मैं घर में कपड़े के थैले का ही उपयोग करूंगी।"
कक्षा 7 के छात्र राहुल राज ने कहा,
"मैंने प्रण लिया है कि प्रतिदिन एक पेड़ को पानी दूंगा और अपने मोहल्ले को साफ-सुथरा रखूंगा।"
भविष्य की योजनाएं
विद्यालय प्रबंधन ने घोषणा की कि वे:
- मासिक पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेंगे
- स्कूल परिसर को पूर्णतः प्लास्टिक मुक्त बनाएंगे
- वार्षिक वृक्षारोपण अभियान चलाएंगे
- जल संरक्षण हेतु छात्रों को प्रशिक्षित करेंगे
समापन समारोह
कार्यक्रम का समापन:
- सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले छात्रों को पुरस्कृत किया गया
- सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए
- "हम सबका यही नारा, स्वच्छ धरती हो हमारा" गीत के साथ समापन
- छात्रों ने पर्यावरण संरक्षण की शपथ ली
इस आयोजन ने न केवल छात्रों को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाया, बल्कि उन्हें व्यावहारिक समाधान भी सुझाए। विद्यालय का यह प्रयास सच्चे अर्थों में "पढ़ेगा इंडिया तभी तो बढ़ेगा इंडिया, बचेगी धरती तभी तो रहेगा इंडिया" की भावना को साकार करता है।
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