Sitaramdera Murder: टीएमएच में सनी की मौत के बाद भड़का गुस्सा, सीतारामडेरा में गोलीबारी और चापड़बाजी के आरोपियों की गिरफ्तारी पर अड़े परिजन
जमशेदपुर के सीतारामडेरा फायरिंग मामले में घायल सनी पुष्टि की टीएमएच में इलाज के दौरान मौत हो गई है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए परिजनों का हंगामा और छायानगर में उपजे तनाव की पूरी इनसाइड रिपोर्ट यहाँ देखें।
जमशेदपुर/सीतारामडेरा, 9 अप्रैल 2026 – लौहनगरी जमशेदपुर के सीतारामडेरा थाना क्षेत्र स्थित छायानगर में हुई खूनी वारदात ने गुरुवार को एक दर्दनाक मोड़ ले लिया। करीब एक सप्ताह तक जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे सनी पुष्टि ने आखिरकार टाटा मुख्य अस्पताल (TMH) में दम तोड़ दिया। 31 मार्च की रात अपराधियों ने जिस तरह सनी पर गोलियों और चापड़ से हमला किया था, उसने पूरे शहर को दहला दिया था। सनी की मौत की खबर फैलते ही टीएमएच परिसर छावनी में तब्दील हो गया और आक्रोशित परिजनों ने फरार आरोपियों की अविलंब गिरफ्तारी की मांग को लेकर जोरदार हंगामा किया।
टीएमएच में थमी सांसें: सात दिनों का संघर्ष और मौत
सनी पुष्टि की स्थिति हमले के बाद से ही नाजुक बनी हुई थी। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद गुरुवार सुबह उसने आखिरी सांस ली।
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परिजनों का विलाप और आक्रोश: सनी की मौत की खबर मिलते ही छायानगर बस्ती के लोग बड़ी संख्या में अस्पताल पहुँचे। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, लेकिन दुख के साथ-साथ उनमें जबरदस्त गुस्सा भी है।
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आंदोलन की चेतावनी: बस्तीवासियों ने साफ कर दिया है कि जब तक पुलिस केस में नामजद सभी आरोपियों को सलाखों के पीछे नहीं भेजती, वे शव का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे और आंदोलन जारी रखेंगे।
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तनावपूर्ण स्थिति: सनी की मौत के बाद सीतारामडेरा और छायानगर इलाके में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है ताकि स्थिति अनियंत्रित न हो।
पुलिसिया कार्रवाई: 4 गिरफ्तार, 6 अब भी फरार!
इस मामले में पुलिस ने सिटी एसपी कुमार शिवाशीष के नेतृत्व में त्वरित कार्रवाई की थी, लेकिन परिजनों का मानना है कि 'असली चेहरे' अब भी बाहर घूम रहे हैं।
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मानगो बस स्टैंड से गिरफ्तारी: 4 अप्रैल को पुलिस ने करण वर्मा, निर्भय सिंह उर्फ छोटका, कुणाल मुंडा और संतोष वर्मा को उस वक्त गिरफ्तार किया था जब वे पटना भागने की फिराक में थे।
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हथियारों की बरामदगी: पुलिस ने इनके पास से एक पिस्तौल और तीन चापड़ बरामद किए थे, जिनका इस्तेमाल वारदात में किया गया था।
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फरार नामजद आरोपी: परिजनों ने करण यादव, चंदन यादव, शुरू भुइयां, आजाद भुइयां, पाल भुइयां और संजय पर भी सीधे तौर पर हमले में शामिल होने का आरोप लगाया है। पुलिस अब इन 6 संदिग्धों की तलाश में छापेमारी कर रही है।
छायानगर और गैंगवार का पुराना नाता
जमशेदपुर का सीतारामडेरा क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से घनी बस्तियों और श्रमिक आबादी का गढ़ रहा है, लेकिन छायानगर और आसपास के इलाके अक्सर आपराधिक वर्चस्व की जंग के केंद्र रहे हैं।
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पुरानी रंजिश का काला साया: सनी पुष्टि और नंदू लोहार पर हुआ हमला कोई अचानक हुई घटना नहीं थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इसके पीछे पुराना विवाद (Old Dispute) था। सीतारामडेरा की तंग गलियों में वर्चस्व को लेकर गुटबाजी का इतिहास दशकों पुराना है।
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कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती: सीतारामडेरा में पहले भी गोलीबारी और रंगदारी की घटनाएं पुलिस के लिए सिरदर्द रही हैं। बस स्टैंड की निकटता अपराधियों को वारदात के बाद शहर से भागने के लिए सुरक्षित गलियारा प्रदान करती है, जैसा कि इस मामले में भी देखा गया।
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बस्तीवासियों का डर: छायानगर जैसी बस्तियों में अक्सर अपराधी तत्वों का जमावड़ा रहने के कारण आम नागरिक डर के साये में रहते हैं। सनी की मौत ने इस डर को गुस्से में बदल दिया है।
अगली कार्रवाई: पुलिस की विशेष टीमों की छापेमारी
सनी की मौत के बाद अब पुलिस पर दबाव दोगुना हो गया है। एसएसपी के निर्देश पर विशेष टीमें गठित की गई हैं।
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सघन तलाशी: पुलिस फरार चल रहे करण यादव और उसके साथियों के ठिकानों पर दबिश दे रही है। माना जा रहा है कि वे शहर छोड़कर किसी ग्रामीण इलाके में छिपे हो सकते हैं।
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सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम: छायानगर सामुदायिक भवन के पास, जहां यह घटना हुई थी, वहां पुलिस पिकेट तैनात की गई है।
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट: सनी के शव का पोस्टमार्टम रिम्स या एमजीएम में मेडिकल बोर्ड की निगरानी में कराया जा सकता है ताकि साक्ष्य मजबूत रहें।
सनी पुष्टि की मौत ने जमशेदपुर के कानून-व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। 31 मार्च की वह रात जब फायरिंग और चापड़बाजी से छायानगर गूँज उठा था, आज उसका अंत एक चिता के साथ होने जा रहा है। पुलिस ने 4 आरोपियों को पकड़कर अपनी मुस्तैदी दिखाई थी, लेकिन परिजनों की संतुष्टि अब बाकी 6 फरार आरोपियों की गिरफ्तारी पर टिकी है। शहर में बढ़ती यह 'क्राइम वेव' और चापड़बाजी की संस्कृति युवाओं को मौत के मुहाने पर ले जा रही है। अब देखना यह है कि प्रशासन कितनी जल्दी इन कलयुगी अपराधियों को न्याय के कटघरे में खड़ा करता है।
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