Parsudih Suicide : परसुडीह में शराब के झगड़े ने ली जान, पत्नी काम पर गई और पीछे से पति ने लगा ली फांसी
जमशेदपुर के परसुडीह थाना क्षेत्र के हलुदबनी में शराब पीने को लेकर हुए विवाद के बाद एक ट्रैक्टर चालक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पत्नी के काम पर जाने के बाद पति ने यह आत्मघाती कदम उठाया। सुबह जब दरवाजा तोड़ा गया तो फंदे से लटकता शव मिला। पूरी खबर यहाँ देखें।
जमशेदपुर/परसुडीह, 12 मार्च 2026 – लौहनगरी जमशेदपुर के परसुडीह थाना क्षेत्र स्थित हलुदबनी इलाके में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहाँ नशे की लत ने न केवल एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि एक 35 वर्षीय युवक की जान भी ले ली। शराब पीने को लेकर पति-पत्नी के बीच हुआ मामूली विवाद इतना गहरा गया कि युवक ने अपने ही किराये के कमरे में फंदा लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। गुरुवार को पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है।
विवाद, काम और फिर मौत: उस काली रात का सच
मृतक की पहचान बिरेंद्र धाकर (35) के रूप में हुई है, जो पेशे से एक ट्रैक्टर चालक था और हलुदबनी में अपनी पत्नी सुशीला पात्रो के साथ किराये के मकान में रहता था।
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शराब बनी झगड़े की जड़: सुशीला के अनुसार, बुधवार को बिरेंद्र शराब के नशे में घर पहुँचा था। इसी बात को लेकर दोनों के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
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पत्नी का काम पर जाना: सुशीला शादियों और पार्टियों में हेल्पर का काम करती है। झगड़े के बाद वह अपने काम पर चली गई। जब वह देर रात काम से वापस लौटी, तो मन में कड़वाहट होने के कारण वह अपने घर न जाकर अपनी मां के घर सोने चली गई। उसे अंदाज़ा भी नहीं था कि उसका यह फैसला आखिरी मुलाकात साबित होगा।
दरवाजा तोड़ा तो रह गए दंग: सुबह का खौफनाक मंजर
गुरुवार की सुबह जब सुशीला वापस अपने कमरे पर पहुँची, तो सब कुछ शांत था।
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कोई सुगबुगाहट नहीं: सुशीला ने काफी देर तक दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई आवाज नहीं आई। अनहोनी की आशंका में उसने पड़ोसियों को इकट्ठा किया।
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फंदे से लटकता शव: जब पड़ोसियों की मदद से दरवाजा तोड़ा गया, तो अंदर का नजारा देखकर सुशीला की चीख निकल गई। बिरेंद्र का शव छत के फंदे से झूल रहा था। आनन-फानन में उसे नीचे उतारा गया, लेकिन उसकी मौत पहले ही हो चुकी थी।
नशे और घरेलू कलह का जानलेवा गठजोड़
जमशेदपुर के परसुडीह और बागबेड़ा जैसे इलाकों में नशे के कारण आत्महत्या के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
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सामाजिक समस्या: बिरेंद्र जैसे कई युवा श्रमिक वर्ग के लोग नशे के आदी हैं, जिसके कारण परिवारों में आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव बना रहता है।
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ट्रैक्टर चालकों की स्थिति: अक्सर लंबी ड्यूटी और थकान मिटाने के नाम पर शुरू हुआ नशा कब जानलेवा बन जाता है, पता ही नहीं चलता। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले एक साल में परसुडीह क्षेत्र में हुई 40% आत्महत्याओं के पीछे शराब और घरेलू विवाद मुख्य कारण रहे हैं।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
घटना की सूचना मिलते ही परसुडीह थाना पुलिस मौके पर पहुँची और शव को कब्जे में ले लिया।
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट: पुलिस ने बताया कि प्राथमिक जांच में यह मामला साफ तौर पर आत्महत्या का लग रहा है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया गया है।
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बयान दर्ज: पुलिस ने सुशीला और पड़ोसियों के बयान दर्ज किए हैं। सुशीला ने रोते हुए बताया कि बिरेंद्र नशे का आदी था और अक्सर शराब को लेकर घर में तनाव रहता था, लेकिन वह इतना बड़ा कदम उठा लेगा, यह किसी ने नहीं सोचा था।
बिरेंद्र की मौत ने एक बार फिर समाज के सामने नशे के दुष्प्रभावों को उजागर कर दिया है। एक मामूली झगड़ा और नशे का जुनून एक भरे-पूरे परिवार को तबाह कर गया। परसुडीह की यह घटना उन सभी के लिए सबक है जो नशे को अपनी कमजोरी बना लेते हैं।
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