Golmuri Bhagwat Katha : जीवात्मा और परमात्मा का मिलन देख झूम उठा गोलमुरी, भगवान ने किया कंस का अंत और रुक्मिणी संग रचाया ब्याह
गोलमुरी के मनिंदर टावर में श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन महारास लीला और रुक्मिणी विवाह की ऐसी भव्य झांकी सजी कि भक्त सुध-बुध खो बैठे। कंस वध और उद्धव-गोपी संवाद के मर्म की पूरी रिपोर्ट यहाँ मौजूद है वरना आप शहर का यह सबसे दिव्य आध्यात्मिक उत्सव मिस कर देंगे।
जमशेदपुर/गोलमुरी, 24 फरवरी 2026 – लौहनगरी जमशेदपुर का गोलमुरी इलाका इन दिनों भक्ति के उस शिखर पर है, जहाँ हर दिल में 'राधे-श्याम' की गूंज है। मनिंदर टावर में आयोजित आठ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन मंगलवार को आचार्य पंडित सुरेश चन्द्र शास्त्री जी महाराज ने कृष्ण लीला के उन गूढ़ प्रसंगों को जीवंत कर दिया, जो जीवन जीने की कला सिखाते हैं। चम्पा-रतन अग्रवाल (गोयल परिवार) द्वारा आयोजित इस महोत्सव में आज 'महारास' और 'रुक्मिणी विवाह' के प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
महारास: जीवात्मा का परमात्मा से महामिलन
आचार्य सुरेश शास्त्री ने महारास लीला का वर्णन करते हुए बताया कि शरद पूर्णिमा की रात जब कृष्ण की बांसुरी बजी, तो वह केवल संगीत नहीं बल्कि परमात्मा की पुकार थी।
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दिव्य मिलन: महारास कोई साधारण नृत्य नहीं, बल्कि जीवात्मा का परमात्मा में विलीन हो जाना है। गोपियों का प्रेम सांसारिक वासनाओं से ऊपर उठकर पूर्ण समर्पण का प्रतीक था।
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उद्धव का ज्ञान हुआ फीका: जब श्री कृष्ण ने ज्ञानी उद्धव को गोपियों को समझाने भेजा, तो गोपियों के निश्छल प्रेम को देखकर उद्धव का अहंकार टूट गया। उन्होंने स्वीकार किया कि प्रेम के बिना ज्ञान अधूरा है।
कंस वध और रुक्मिणी हरण: सत्य की विजय
कथा के क्रम में जब कंस वध का प्रसंग आया, तो पांडाल 'जय श्री कृष्ण' के जयकारों से गूंज उठा।
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अधर्म का विनाश: दुष्ट कंस के अत्याचारों से पृथ्वी को मुक्त कराने के लिए कृष्ण-बलराम ने मथुरा जाकर उसका वध किया और मानवता को भयमुक्त किया।
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रुक्मिणी विवाह: विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी और कृष्ण के विवाह का प्रसंग बेहद रोमांचक रहा। आचार्य ने बताया कि कैसे भगवान ने रुक्मिणी के प्रेम पत्र का मान रखा और शिशुपाल जैसे अधर्मियों को हराकर उन्हें पटरानी का दर्जा दिया।
भागवत कथा डायरी: मुख्य आकर्षण (Event Snapshot)
| प्रसंग | विशेष संदेश (Key Message) |
| महारास लीला | निस्वार्थ प्रेम ही ईश्वर प्राप्ति का मार्ग है। |
| कंस वध | अहंकार और अधर्म का अंत निश्चित है। |
| रुक्मिणी विवाह | सच्चा प्रेम हमेशा ईश्वर का सानिध्य पाता है। |
| कल का प्रसंग (25 Feb) | सुदामा चरित्र और कथा विश्राम |
| अंतिम दिन (26 Feb) | सुबह 9 बजे हवन, शाम 5 बजे फूलों की होली |
कल मचेगी धूम: सुदामा चरित्र और फूलों की होली
कथा के सातवें दिन यानी बुधवार 25 फरवरी को मित्रता की मिसाल 'सुदामा चरित्र' सुनाया जाएगा। इसके साथ ही कुरुक्षेत्र लीला और भागवत कथा का सार प्रस्तुत किया जाएगा।
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फूलों की होली: समापन समारोह यानी 26 फरवरी को शाम 5 बजे से फूलों की होली का विशेष आयोजन होगा, जिसमें पूरा गोलमुरी ब्रज के रंगों में रंगा नजर आएगा।
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हवन पूजन: गुरुवार सुबह 9 बजे से पूर्णाहूति और हवन होगा, जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद है।
प्रेम, ज्ञान और भक्ति का संगम
गोयल परिवार (पार्वती देवी, रतन-चम्पा अग्रवाल, गोविंद, माधव अग्रवाल) द्वारा आयोजित इस भक्ति यज्ञ ने पूरे शहर को एक सूत्र में पिरो दिया है। यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक धरोहर को बचाने का एक सफल प्रयास है।
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