Dhatkidih Mystery : धतकीडीह तालाब में सैंकड़ों मछलियों की मौत, 8 किलो तक की मछली मृत मिली
जमशेदपुर के धतकीडीह तालाब में सैंकड़ों मछलियां रहस्यमयी ढंग से मृत पाई गई हैं। 8 किलो वजनी मछलियों की मौत, ऑक्सीजन की कमी या जहरीला पानी, इस बड़ी त्रासदी की पूरी इनसाइड रिपोर्ट यहाँ देखें।
जमशेदपुर/धतकीडीह, 9 अप्रैल 2026 – झारखंड की लौहनगरी जमशेदपुर में आज सुबह प्रकृति प्रेमियों और स्थानीय निवासियों के लिए एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई। शहर के पॉश इलाके बेल्डीह गोल्फ कोर्स से सटे ऐतिहासिक धतकीडीह तालाब में गुरुवार सुबह सैकड़ों मछलियां मृत अवस्था में पानी की सतह पर तैरती पाई गईं। यह दृश्य इतना खौफनाक था कि सुबह की सैर पर निकले लोग ठिठक गए। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि मृत मछलियों का आकार और वजन काफी बड़ा है, जिससे इस घटना ने एक गंभीर पारिस्थितिक संकट (Ecological Crisis) का रूप ले लिया है।
तालाब बना 'कब्रगाह': 8 किलो की मछलियों ने तोड़ा दम
धतकीडीह तालाब अपनी शांति और एंगलिंग (मछली पकड़ने के खेल) के लिए जाना जाता है, लेकिन गुरुवार की सुबह यहाँ का मंजर पूरी तरह बदला हुआ था।
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भीषण दृश्य: सुबह करीब 6 बजे स्थानीय लोगों ने देखा कि सफेद चादर की तरह मछलियां पानी के ऊपर उतरी हुई हैं। देखते ही देखते पूरा तालाब मृत मछलियों से भर गया।
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मछलियों का आकार: प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मरी हुई मछलियों में से कई का वजन 5 से 8 किलो के बीच है। इतनी बड़ी और पुरानी मछलियों का एक साथ मरना किसी बड़े खतरे की ओर इशारा करता है।
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सफाई कर्मियों की चुप्पी: घटना के घंटों बाद भी जब सफाई कर्मी और तालाब प्रबंधन से जुड़े लोग मौके पर पहुँचे, तो उन्होंने इस पर कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया।
मौत का कारण: ऑक्सीजन की कमी या कोई 'साजिश'?
तालाब में अचानक हुई इस तबाही को लेकर शहर में चर्चाओं का बाजार गर्म है और कई थ्योरी सामने आ रही हैं।
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ऑक्सीजन का संकट: कुछ जानकारों का प्राथमिक अनुमान है कि तालाब के पानी में Dissolved Oxygen (DO) का स्तर अचानक गिर गया होगा, जिससे भारी मछलियों का दम घुट गया।
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प्रदूषण और जहर: स्थानीय लोगों को अंदेशा है कि पानी में कोई जहरीला तत्व मिल गया है या बेल्डीह गोल्फ कोर्स की तरफ से आने वाले रसायनों के कारण यह हादसा हुआ है।
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एंगलिंग क्लब की खामोशी: तालाब की देखरेख की जिम्मेदारी निभाने वाले एंगलिंग क्लब के सदस्यों की चुप्पी ने लोगों के संदेह को और बढ़ा दिया है।
टाटा के शहर का 'ब्लू लंग'
जमशेदपुर के निर्माण के समय से ही धतकीडीह और बेल्डीह के इन तालाबों का विशेष महत्व रहा है।
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एंगलिंग की परंपरा: टाटा स्टील और शहर के पुराने निवासियों के लिए यह तालाब मनोरंजन और प्रकृति से जुड़ाव का केंद्र रहा है। यहाँ 'कैच एंड रिलीज' के आधार पर मछली पकड़ने की प्रतियोगिताएं दशकों से होती आ रही हैं।
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पारिस्थितिक संतुलन: इतिहास गवाह है कि जमशेदपुर के इन जल निकायों ने शहर के तापमान को नियंत्रित करने और भूजल स्तर को बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाई है। 100 साल से भी पुराने इस तालाब में इतनी बड़ी संख्या में मछलियों की मौत पहले कभी दर्ज नहीं की गई।
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प्रदूषण की चुनौती: जैसे-जैसे शहर की आबादी बढ़ी, इन जलस्रोतों पर प्रदूषण का दबाव बढ़ा है, लेकिन धतकीडीह तालाब को अब तक सबसे सुरक्षित माना जाता था।
अगली कार्रवाई: जांच और लैब टेस्ट की मांग
इस घटना के बाद अब प्रशासन और पर्यावरण विभाग से सख्त कदम उठाने की मांग की जा रही है।
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वाटर टेस्टिंग: स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तुरंत तालाब के पानी के नमूने ले और जांच करे कि क्या इसमें कोई जहरीला पदार्थ मिलाया गया है।
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मछलियों का निस्तारण: इतनी बड़ी संख्या में मरी हुई मछलियों से दुर्गंध फैलने का खतरा है, जिससे आसपास के रिहायशी इलाकों में बीमारियाँ फैल सकती हैं। प्रशासन को तुरंत इनके वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था करनी होगी।
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जिम्मेदारी तय हो: लोगों का कहना है कि यह लापरवाही का मामला है। अगर ऑक्सीजन की कमी थी, तो तालाब में एयरेटर्स (Aerators) क्यों नहीं चलाए गए?
धतकीडीह तालाब में हुई यह त्रासदी जमशेदपुर के पर्यावरण के लिए एक बड़ा 'वेक-अप कॉल' है। 8 किलो की मछलियों का मरना कोई छोटी बात नहीं है; यह एक पूरा ईकोसिस्टम खत्म होने जैसा है। एंगलिंग क्लब और संबंधित विभागों की खामोशी इस मामले को और संदिग्ध बना रही है। जब तक पानी की जांच रिपोर्ट सामने नहीं आती, तब तक लोगों की चिंता बनी रहेगी। लौहनगरी के इस ऐतिहासिक तालाब को बचाने के लिए अब केवल सफाई नहीं, बल्कि वैज्ञानिक समाधान की जरूरत है।
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