Jamshedpur Inferno: दलमा जंगल की तराई में भीषण आग, बीड़ी-सिगरेट से लगी चिंगारी, रिहायशी इलाकों तक पहुंची लपटें
जमशेदपुर के डोबो क्षेत्र में दलमा जंगल की तराई में भीषण आग, बीड़ी-सिगरेट से लगी आग ने लिया विकराल रूप। जानिए कैसे फैल रही आग और क्या है चुनौती।
जमशेदपुर: इस्पात नगरी में गर्मी की शुरुआत होते ही आग के तांडव ने दस्तक दे दी है। शहर के साथ-साथ अब जंगलों में भी आग का कहर देखने को मिल रहा है। जमशेदपुर से सटे डोबो क्षेत्र में दलमा जंगल की तराई में भीषण आग लग गई है। यह आग धीरे-धीरे विकराल रूप धारण करती जा रही है और रिहायशी इलाकों के करीब पहुंच गई है। स्थानीय ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। वन विभाग के लिए आग पर काबू पाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
कैसे लगी आग?
बताया जा रहा है कि जंगलों से गुजरने वाले लोगों की लापरवाही के कारण यह आग लगी है। जलती हुई बीड़ी या सिगरेट को फेंकने जैसी छोटी सी चूक ने भीषण आग को जन्म दे दिया है। गर्मी के बढ़ते पारे और तेज हवाओं ने आग में घी का काम किया है। तेज हवाओं के कारण आग तेजी से फैल रही है और जंगल के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले रही है।
रिहायशी इलाकों तक पहुंची आग
डोबो क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए यह आग बड़ी चिंता का विषय बन गई है। रिहायशी इलाके जंगल से काफी करीब हैं, जिससे डर है कि आग कभी भी घरों तक पहुंच सकती है। ग्रामीणों ने बताया कि लपटें काफी ऊंची उठ रही हैं और आग लगातार फैल रही है। कई ग्रामीणों ने अपना सामान समेटना शुरू कर दिया है। पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा रहा है।
वन विभाग के सामने बड़ी चुनौती
वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई है, लेकिन इस बेकाबू आग पर काबू पाना उनके लिए मुश्किल हो रहा है। तेज हवाओं के कारण आग पर काबू पाने के सभी प्रयास विफल हो रहे हैं। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आग पर काबू पाने के लिए अतिरिक्त टीमें बुलाई गई हैं। फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को भी मौके पर लगाया गया है, लेकिन जंगल के अंदर गाड़ियों का पहुंचना मुश्किल हो रहा है।
दलमा जंगल का इतिहास और पारिस्थितिकी
दलमा जंगल जमशेदपुर की जीवन रेखा है। यह जंगल न सिर्फ शहर की जलवायु को संतुलित रखता है, बल्कि यहां कई दुर्लभ वन्यजीव और वनस्पतियां भी पाई जाती हैं। दलमा वन्यजीव अभयारण्य हाथियों के झुंड के लिए प्रसिद्ध है। पिछले कुछ वर्षों में गर्मी के मौसम में इस जंगल में आग लगने की घटनाएं बढ़ी हैं। इतिहास गवाह है कि 2019, 2021 और 2023 में भी इस जंगल में बड़ी आग लग चुकी है, जिससे वन्यजीवों और पेड़-पौधों को भारी नुकसान हुआ था।
पर्यावरण पर पड़ेगा गहरा असर
इस आग का पर्यावरण पर गहरा असर पड़ेगा। जंगलों में रहने वाले जीव-जंतुओं को भारी नुकसान होगा। कई छोटे जानवर और पक्षी आग की चपेट में आ सकते हैं। पेड़-पौधे जल जाएंगे, जिससे ऑक्सीजन का स्तर प्रभावित होगा। इसके अलावा, आग से निकलने वाला धुआं आसपास के इलाकों में प्रदूषण फैलाएगा, जिससे लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
ग्रामीणों में दहशत
डोबो क्षेत्र के ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। एक ग्रामीण ने बताया, "पिछले कुछ सालों में हमने इतनी बड़ी आग कभी नहीं देखी। लपटें इतनी ऊंची उठ रही हैं कि दूर से ही आग का तांडव देखकर डर लगता है। हमें डर है कि कहीं आग हमारे घरों तक न पहुंच जाए।" कई ग्रामीणों ने अपने घरों के आसपास की सूखी घास और झाड़ियों को हटाना शुरू कर दिया है।
प्रशासन ने दिए ये निर्देश
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे जंगलों में आग लगाने की कोशिश न करें। खेतों में पराली न जलाएं और जलती हुई बीड़ी-सिगरेट को जंगलों की तरफ न फेंके। अगर कोई जंगल में आग लगता देखता है, तो तुरंत वन विभाग या पुलिस को सूचित करें।
आग पर काबू पाने के लिए जारी प्रयास
वन विभाग और प्रशासन की टीमें आग पर काबू पाने के लिए दिन-रात प्रयास कर रही हैं। फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को मौके पर लगाया गया है। ग्रामीणों को भी आग बुझाने में सहयोग करने के लिए कहा गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही आग पर काबू पा लिया जाएगा।
जमशेदपुर के दलमा जंगल में लगी इस भीषण आग ने सबकी नींद उड़ा दी है। क्या हम अपनी छोटी सी लापरवाही से प्रकृति को इतना बड़ा नुकसान पहुंचा रहे हैं? यह खबर पढ़कर सावधान हो जाइए और जंगलों में आग लगाने से बचें। इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि लोग जागरूक हों।
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