Jamshedpur Green Mission : बागबेड़ा में लड़कियों ने तैयार किए सैकड़ों जादुई 'सीड बॉल्स', मानसून में बंजर पहाड़ियों को हरा-भरा करने का अनोखा विजुअल संकल्प!
जमशेदपुर के बागबेड़ा में विश्व पर्यावरण दिवस पर NATURE संस्था द्वारा सैकड़ों औषधीय सीड बॉल बनाने और मानसून में बंजर भूमि पर विजुअल छिड़काव करने की यह लाइव ग्राउंड रिपोर्ट यहाँ देखें।
जमशेदपुर, 5 जून 2026 – झारखंड की औद्योगिक और लौहनगरी के बागबेड़ा अंचल (Bagbera Zone) से इस वक्त की सबसे खूबसूरत, प्रेरणादायक और प्रकृति को नया जीवन देने वाली बड़ी विजुअल ग्राउंड खबर सामने आ रही है। विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर अनुग्रह नारायण सिंह शिक्षण एवं सेवा संस्थान, बागबेड़ा में 'NATURE' संस्था के बैनर तले एक दिवसीय हाई-टेक 'सीड बॉल मेकिंग कार्यशाला' (Seed Ball Workshop) का भव्य आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक विधिक अभियान में स्थानीय छात्राओं और पर्यावरण प्रेमियों ने मिलकर महज कुछ ही घंटों के भीतर नीम, पीपल और बरगद जैसी स्थानीय प्रजातियों के सैकड़ों जादुई 'सीड बॉल्स' (बीज गेंद) तैयार कर दिए। इन तैयार बॉल्स को आगामी मानसून के कट्स सीजन में शहर के आस-पास के पथरीले इलाकों और जंगलों में विजुअल रूप से बिखेरा जाएगा। इस लाइव हरित ऐक्शन के बाद पूरे जमशेदपुर अंचल में पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक नया पुराना ढर्रा फिर से जाग उठा है।
सीड बॉल की लाइव इनसाइड स्टोरी: बिना मानवीय देख-रेख के मानसून की पहली बारिश में फूटेगा अंकुर
बागबेड़ा शिक्षण संस्थान अंचल और NATURE फाउंडेशन के विधिक कार्यकर्ताओं से मिली लाइव ऑन-फील्ड जानकारी के मुताबिक, इस अनूठे वैज्ञानिक प्रयोग की क्रोनोलॉजी बेहद दिलचस्प और प्रभावी है:
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जादुई मिश्रण का विजुअल कट्स: पर्यावरणविद डॉ. कविता परमार और डॉ. विनीता परमार ने कार्यशाला में छात्राओं को लाइव मिट्टी, जैविक खाद और चुनिंदा बीजों के सटीक विधिक मिश्रण से सीड बॉल बनाने की तकनीक सिखाई।
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कम लागत में ग्रीन कवर: विशेषज्ञों ने बताया कि यह छोटी सी मिट्टी की गेंद (Seed Ball) पौधों को सुरक्षित रखती है। जैसे ही मानसून की पहली विजुअल बारिश इन पर पड़ेगी, ये बंजर ज़मीन पर भी बिना किसी मानवीय कट्स या देखभाल के खुद-ब-खुद अंकुरित होकर पौधे का रूप ले लेंगी।
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स्थानीय प्रजातियों का चयन: इस लाइव अभियान में नीम, पीपल, बरगद, जामुन, लीची, इमली और गुलमोहर जैसे परम्परागत स्थानीय पेड़ों के बीजों का विधिक चयन किया गया है, ताकि वे जमशेदपुर की पठारी जलवायु में आसानी से सर्वाइव कर सकें।
बंजर भूमि पर बिखरेंगे सैकड़ों बीज, डॉ. विनीता परमार ने दिलाया सुरक्षा का विधिक संकल्प
इस वक्त की ताजा लाइव स्थिति यह है कि कार्यशाला के समापन सत्र में डॉ. विनीता परमार ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए एक कड़ा विजुअल संदेश दिया कि केवल बीज बनाना या पौधे लगाना ही काफी नहीं है, बल्कि उनके बड़े होने तक विधिक संरक्षण की जिम्मेदारी भी समाज को उठानी होगी। डॉक्टर कविता परमार ने सभी छात्राओं को जीवन में कम से कम एक पेड़ को विजुअल रूप से गोद लेने और पॉलीथिन का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करने का परम्परागत संकल्प दिलाया।
2026 के इस आधुनिक युग में, जहाँ कंक्रीट के जंगल हमारी असली सांसों को छीन रहे हैं, वहाँ बागबेड़ा की इन बेटियों का यह छोटा सा प्रयास पूरे झारखंड और कोल्हान के लिए एक बड़ा विजुअल अलर्ट है। इस डार्क सिलसिले को रोकने और शहर के गिरते ग्रीन कवर को वापस पाने के लिए हमें जमशेदपुर के हर स्कूल और कॉलेज में ऐसे परम्परागत सीड बॉल अभियानों को विधिक रूप से अनिवार्य करना होगा। NATURE संस्था की इस शानदार और त्वरित लाइव कार्यशाला के बाद अब बागबेड़ा की पहाड़ियों पर मानसून के दौरान एक नई विजुअल हरियाली की उम्मीद जताई जा रही है।
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