Ichagarh Elephant Rampage: हाथियों ने घर में घुसकिने मचाई तबाही, मां-बेटी की मौत, दो बुजुर्ग घायल
सरायकेला-खरसावां के हाड़ात गांव में जंगली हाथियों ने घर में घुसकर मचाई तबाही, मां-बेटी की मौत, दो बुजुर्ग घायल, वन विभाग की टीम जांच में जुटी।
Ichagarh Heartbreak: सरायकेला-खरसावां जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। ईचागढ़ थाना क्षेत्र के सोड़ो पंचायत अंतर्गत हाड़ात गांव में जंगली हाथियों के झुंड ने एक ही परिवार पर हमला कर दो लोगों की जान ले ली। मरने वालों में एक मां और उसकी 13 साल की बेटी शामिल है। गांव में मातम छा गया है।
Night of Horror: रात का अंधेरा और हाथियों का आतंक
बीती रात अचानक हाथियों का झुंड गांव में घुस आया। ग्रामीणों को संभलने का मौका भी नहीं मिला। हाथियों ने कई घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया और खलिहान तहस-नहस कर दिए। आसपास चीख-पुकार मच गई। इसी दौरान एक मकान में मौजूद परिवार के चार सदस्य हमले की चपेट में आ गए। हाथियों के आक्रामक व्यवहार के कारण कोई ग्रामीण पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा सका।
मां-बेटी की मौके पर ही मौत, परिवार में कोहराम
हाथियों के हमले में कमलचंद महतो की पत्नी चाइना देवी और उनकी 13 वर्षीय बेटी अमिता बाला की मौके पर ही मौत हो गई। दोनों कुछ समझ पाती, तब तक हाथियों ने हमला कर दिया। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया है। पिता कमलचंद महतो का रो-रोकर बुरा हाल है। एक ही झटके में एक मां और उसकी बेटी ने दम तोड़ दिया।
दो बुजुर्ग गंभीर रूप से घायल, एमजीएम अस्पताल में भर्ती
उसी परिवार के दो अन्य सदस्य – मोहन महतो (65) और सतुला देवी (60) – गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों को तत्काल जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, उनकी हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है। डॉक्टरों की टीम उनके इलाज में लगी हुई है।
मानव-हाथी संघर्ष का पुराना इतिहास
ईचागढ़, सरायकेला-खरसावां का वह क्षेत्र है जो जंगली हाथियों के लिए जाना जाता है। यहाँ का इलाका घने जंगलों से घिरा है जो झारखंड और ओडिशा की सीमा से लगता है। सालों से हाथियों के झुंड यहाँ से पलायन करते रहते हैं। खासकर फसल पकने के मौसम में हाथी गांवों में घुस आते हैं। पिछले एक दशक में इस क्षेत्र में हाथियों के हमले में दर्जनों लोग जान गंवा चुके हैं। इसके बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। हाड़ात गांव भी इसी खतरे की जद में आता है।
मुआवजे का वादा, लेकिन ग्रामीण नाराज
घटना की सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने घटनास्थल का जायजा लिया और परिजनों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया। हालांकि, वन विभाग के रवैये को लेकर ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि अक्सर हाथियों के हमले होते हैं, लेकिन विभाग सिर्फ मुआवजा देकर अपना पल्ला झाड़ लेता है। उनकी मांग है कि हाथियों के प्रवेश को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, जैसे गहरी खाई, बाड़ लगाना या हाथियों को भगाने के लिए विशेष टीमें तैनात करना।
मृतकों के परिजनों को मिलेगा मुआवजा?
सरकारी नियमों के अनुसार, हाथी हमले में जान गंवाने वाले के परिजनों को चार लाख रुपये का मुआवजा दिया जाता है। घायलों को भी नियमानुसार मुआवजा मिलता है। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि मुआवजे से जान नहीं लौट सकती। उन्हें स्थायी सुरक्षा चाहिए। अब देखना यह है कि प्रशासन कितनी तेजी से मुआवजा वितरण प्रक्रिया पूरी करता है।
गांव में भय का माहौल, लोग रातें बिताने से डर रहे
हाथियों के हमले के बाद पूरे हाड़ात गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीण रात में घरों से बाहर निकलने से डर रहे हैं। कई परिवार तो रिश्तेदारों के यहां शिफ्ट हो गए हैं। लोगों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से हाथियों की उपस्थिति बढ़ गई है, लेकिन वन विभाग ने कोई पूर्व सूचना जारी नहीं की थी। अब वे सरकार से हाथियों के प्रवेश को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।
अब तक क्या कार्रवाई हुई?
वन विभाग ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। हाथियों के झुंड की लोकेशन ट्रैक की जा रही है। मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। घायलों का इलाज एमजीएम अस्पताल में जारी है। विभाग ने आश्वासन दिया है कि शीघ्र ही मुआवजा राशि परिजनों के खाते में स्थानांतरित कर दी जाएगी।
जरूरत है स्थायी समाधान की
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि आपातकालीन कार्रवाई से समस्या हल नहीं होती। जब तक हाथियों के लिए कॉरिडोर नहीं बनाया जाएगा और गांवों के आसपास सुरक्षा दीवार या सोलर फेंस नहीं लगाया जाएगा, तब तक ऐसी घटनाएं होती रहेंगी। प्रशासन को अब गंभीरता से इस मुद्दे पर काम करना चाहिए।
आपकी राय क्या है – क्या सरकार को गांवों के आसपास हाथियों को रोकने के लिए बाड़ और खाई का निर्माण करना चाहिए? कमेंट में बताएं।
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