Davos Dialogue: दावोस में हेमंत सोरेन का बड़ा ऐलान, अब सिर्फ खनिज नहीं बेचेगा झारखंड, आदिवासियों की किस्मत बदलने वाला है यह नया 'ग्लोबल प्लान'
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दावोस (WEF) में दुनिया भर के दिग्गज उद्योगपतियों के सामने झारखंड का नया विजन पेश किया है। खनिजों के निर्यात से आगे बढ़कर स्थानीय लोगों को सीधे रोजगार देने और इको-टूरिज्म को ग्लोबल पहचान दिलाने की पूरी रणनीति यहाँ दी गई है वरना आप भी राज्य की आर्थिकी में आने वाले इस क्रांतिकारी मोड़ को समझने से चूक जाएंगे।
दावोस (स्विट्जरलैंड), 21 जनवरी 2026 – विश्व आर्थिक मंच (WEF) की बैठक में शिरकत करने पहुंचे झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वैश्विक मंच से एक ऐसी हुंकार भरी है, जो आने वाले समय में राज्य की तकदीर बदल सकती है। भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) द्वारा आयोजित एक उच्चस्तरीय राउंडटेबल मीटिंग में मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया कि अब झारखंड को केवल 'खनिजों की खदान' के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने दुनिया भर के नीति-निर्माताओं और निवेशकों को स्पष्ट संदेश दिया कि झारखंड अब 'संसाधनों के निर्यात' के बजाय उनके 'मूल्य संवर्धन' (Value Addition) और 'स्थानीय लाभ' पर केंद्रित होगा। यह विजन न केवल झारखंड के औद्योगिक ढांचे को बदलेगा, बल्कि राज्य के आदिवासी और मूलवासी समुदायों के जीवन स्तर में भी क्रांतिकारी सुधार लाएगा।
खनिजों का दोहन नहीं, अब होगा सतत विकास
मुख्यमंत्री ने "Delivering Sustainability at Scale" विषय पर बोलते हुए झारखंड की नई आर्थिक नीति का रोडमैप पेश किया।
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निर्यात से आत्मनिर्भरता की ओर: हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड लंबे समय तक केवल कच्चा माल बाहर भेजता रहा है, लेकिन अब सरकार का लक्ष्य डाउनस्ट्रीम उद्योगों को बढ़ावा देना है। इससे राज्य का कच्चा माल राज्य में ही प्रोसेस होगा और यहीं रोजगार पैदा करेगा।
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जन-केंद्रित विकास: मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि किसी भी औद्योगिक विकास का तब तक कोई अर्थ नहीं है, जब तक उसका सीधा लाभ गांव के अंतिम व्यक्ति तक न पहुँचे। उन्होंने सततता (Sustainability) को सीधे तौर पर आजीविका और कौशल विकास से जोड़ा।
इको-टूरिज्म: झारखंड का अगला 'ब्रह्मास्त्र'
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने एक ऐसी संभावना पर बात की जिसे अब तक नजरअंदाज किया गया था—पर्यटन।
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अनछुआ खजाना: मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड की प्राकृतिक खूबसूरती और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत अब तक दुनिया की नजरों से दूर रही है।
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स्थानीय रोजगार का जरिया: सरकार अब इको-टूरिज्म और कल्चरल टूरिज्म को एक बड़े उद्योग के रूप में विकसित कर रही है। इससे न केवल प्राकृतिक धरोहरों का संरक्षण होगा, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों और आदिवासियों के लिए गांव में ही कमाई के साधन खुलेंगे।
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हरित प्रौद्योगिकी: नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रीन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सहयोग के लिए उन्होंने वैश्विक निवेशकों को आमंत्रित किया।
दावोस समिट: मुख्यमंत्री के संबोधन के मुख्य बिंदु (Key Highlights)
| मुख्य स्तंभ | सरकार का नया विजन (New Vision) |
| खनिज क्षेत्र | केवल निर्यात नहीं, अब झारखंड में ही होगा वैल्यू एडिशन |
| सामाजिक लक्ष्य | आदिवासी समुदायों के जीवन स्तर में प्रत्यक्ष सुधार |
| पर्यटन | इको-टूरिज्म को ग्लोबल पहचान दिलाना और रोजगार बढ़ाना |
| निवेश क्षेत्र | हरित ऊर्जा, टिकाऊ विनिर्माण और पर्यटन इंफ्रास्ट्रक्चर |
| रोजगार | आजीविका के साथ-साथ कौशल विकास (Skill Development) |
इतिहास का पन्ना: झारखंड की 'रत्नगर्भा' धरती और वैश्विक उपेक्षा का अंत
झारखंड (पूर्व में बिहार का हिस्सा) का इतिहास हजारों सालों से अपनी खनिज संपदा के लिए विख्यात रहा है। 18वीं और 19वीं शताब्दी में जब अंग्रेजों ने पहली बार रानीगंज और झरिया में कोयला खनन शुरू किया, तब से ही इस धरती को 'दुधारू गाय' की तरह इस्तेमाल किया गया। इतिहास गवाह है कि जमशेदजी टाटा ने 1907 में जब देश का पहला स्टील प्लांट यहाँ लगाया, तो झारखंड वैश्विक औद्योगिक मानचित्र पर आया। लेकिन विडंबना यह रही कि दशकों तक यहाँ के खनिजों से दुनिया रोशन होती रही, पर यहाँ के मूल निवासी (आदिवासी) अंधेरे में रहे। साल 2000 में राज्य गठन के बाद भी औद्योगिक विकास केवल बड़े संयंत्रों तक सीमित रहा। 2026 की दावोस यात्रा ऐतिहासिक है क्योंकि पहली बार कोई मुख्यमंत्री 'खनिज' के बजाय 'आदिवासी कल्याण और सततता' को अपनी सबसे बड़ी वैश्विक व्यापारिक डील के रूप में पेश कर रहा है।
वैश्विक निवेशकों को खुला निमंत्रण: अब झारखंड की बारी है
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दावोस के मंच से जिम्मेदार खनन (Responsible Mining) का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि झारखंड पर्यावरण के साथ खिलवाड़ करके विकास नहीं चाहता।
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जिम्मेदार साझेदारी: उन्होंने निवेशकों से कहा कि वे झारखंड आएं, लेकिन केवल लाभ कमाने के लिए नहीं, बल्कि राज्य के विकास में साझीदार बनने के लिए।
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भविष्य की योजना: राज्य सरकार नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) के क्षेत्र में बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है, जिसके लिए दावोस में कई संस्थागत निवेशकों के साथ सकारात्मक बातचीत हुई है।
दावोस से खुलेगी झारखंड की नई राह
मुख्यमंत्री की इस दावोस यात्रा ने झारखंड को एक 'रॉ मटेरियल सप्लायर' की छवि से निकालकर एक 'सतत औद्योगिक केंद्र' की वैश्विक पहचान दी है। अगर ये चर्चाएं धरातल पर उतरती हैं, तो आने वाले कुछ वर्षों में झारखंड न केवल भारत का पावरहाउस होगा, बल्कि सतत विकास का वैश्विक मॉडल भी बनेगा।
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