Dumka Witchcraft: 10 साल में पिता नहीं बन पाया तो पड़ोसन को डायन मान लाठी-डंडे से पीट-पीटकर मार डाला
पिता न बन पाने के गुस्से में युवक ने पड़ोसन को डायन मान लाठी-डंडे से पीट-पीटकर मार डाला, 10 साल का बांझपन और पिता की मौत बना कारण, आरोपी गिरफ्तार।
Dumka Shocker: दुमका जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के डुमरसोल गांव में अंधविश्वास की वजह से एक 55 वर्षीय विधवा महिला की बेरहमी से हत्या कर दी गई। आरोपी युवक को शक था कि पड़ोसन ने उस पर जादू-टोना किया है, जिससे वह शादी के 10 साल बाद भी पिता नहीं बन पाया।
शादी के 10 साल, ना संतान, पिता का साया भी खोया
आरोपी मुंशी टुडू (35) की शादी 10 साल पहले हुई थी, लेकिन अब तक उसे कोई संतान नहीं हुई थी। पिछले साल उसके पिता की भी मौत हो गई थी। यह दो घटनाएं (बांझपन और पिता की मौत) ने मुंशी को मानसिक रूप से तोड़ दिया। वह यह सोचने लगा कि उसके परिवार में जो कुछ भी बुरा हो रहा है, उसके लिए पड़ोस में रहने वाली पक्कू हेंब्रम (55) जिम्मेदार है।
55 साल की विधवा, बस इसलिए बनी निशाना
पक्कू हेंब्रम एक विधवा महिला थी, जो अकेली रहती थी और मुंशी टुडू के पड़ोस में उसका घर था। गांव में महिलाओं का आपसी आना-जाना आम था, लेकिन मुंशी ने उसकी साधारण टोकाटाकी (कहीं जाते वक्त कुछ कह देना) को भी ‘जादू-टोना’ करार दे दिया। धीरे-धीरे उसका शक अंधविश्वास में बदल गया और उसने पक्कू हेंब्रम को डायन मान लिया।
घर बुलाकर लाठी-डंडे से पीट-पीटकर कत्ल
सोमवार रात मुंशी टुडू ने किसी बहाने पक्कू हेंब्रम को अपने घर बुलाया। उसने पहले से योजना बनाकर लाठी-डंडे रख लिए थे। जैसे ही महिला घर में आई, मुंशी ने उस पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। पिटाई इतनी भीषण थी कि पक्कू हेंब्रम की मौके पर ही मौत हो गई।
अंधविश्वास का दंश झेलता इलाका
दुमका झारखंड के संथाल परगना का एक प्रमुख जिला है। यहाँ आदिवासी बहुल आबादी है और प्रकृति पूजा की परंपरा है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में डायन-बिसाही के नाम पर हत्याओं के मामले बढ़े हैं। पिछले साल अकेले दुमका जिले में डायन प्रथा के कारण तीन हत्याएं हुई थीं। ग्रामीण अंधविश्वास में विश्वास रखते हैं और छोटी-मोटी बात को जादू-टोना समझकर निर्दोष लोगों की हत्या कर देते हैं। डुमरसोल गांव इसी सूची में एक नया नाम जोड़ चुका है।
पत्नी और बच्चे ने आरोपी को क्यों नहीं समझा?
आरोपी शादी के 10 बाद भी पिता नहीं बन पाया। इस तरह के मामलों में न सिर्फ पति, बल्कि पत्नी का भी डिप्रेशन होता है। लेकिन यहाँ दोनों ने चिकित्सीय परामर्श लेने के बजाय अंधविश्वास का सहारा लिया। परिवार और समाज का दायित्व है कि मानसिक रूप से परेशान व्यक्ति को डॉक्टर या काउंसलर के पास ले जाएं, न कि उसके अंधविश्वास को हवा दें।
आरोपी गिरफ्तार, डंडा बरामद
गांव के चौकीदार की सूचना पर मुफस्सिल थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने भागने की कोशिश कर रहे मुंशी टुडू को पकड़ लिया। हत्या में इस्तेमाल लाठी-डंडे को भी बरामद कर लिया गया। मृतका की बेटी मकलू हांसदा के बयान पर हत्या का मामला दर्ज किया गया।
दुमका एसपी पीतांबर सिंह खेरवार ने दी जानकारी
दुमका एसपी पीतांबर सिंह खेरवार ने बताया कि आरोपी युवक को लगता था कि पड़ोस की महिला जादू-टोना कर रही है। इसी सोच के कारण उसने हत्या की वारदात को अंजाम दिया। एसपी ने कहा कि पुलिस अंधविश्वास पर आधारित हत्याओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है और लोगों को जागरूक करने का अभियान भी चलाया जाएगा।
हत्या में लाठी-डंडे का इस्तेमाल
पुलिस ने हत्या में लाठी-डंडे को बरामद किया है। हालाँकि इसके अलावा किसी भी प्रकार का हथियार नहीं मिला है। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने इतना ताबड़तोड़ प्रहार किया कि महिला के शरीर के कई हिस्से पूरी तरह क्षत-विक्षत हो गए।
डायन प्रथा क्या है?
भारत में डायन प्रथा (witch-hunting) मुख्यतः आदिवासी इलाकों में देखी जाती है, जहाँ लोग बीमारी, पशु मृत्यु, फसल बर्बादी या बांझपन जैसी समस्याओं का कारण किसी महिला पर ‘जादू-टोना’ करने का आरोप लगाते हैं, और फिर उसकी हत्या या पिटाई कर देते हैं। यह अपराध किसी भी कानून के तहत गैर-कानूनी है, लेकिन फिर भी समाज में इसका बोलबाला है।
आपकी राय क्या है – पुरुष बांझपन को लेकर भी समाज में अंधविश्वास व्याप्त है। क्या सरकार को गांवों में निःसंतान दंपतियों के लिए काउंसलिंग सेंटर खोलना चाहिए? कमेंट में बताएं।
अगर आपके आसपास किसी के साथ डायन का आरोप लगाकर मारपीट की जा रही हो, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।
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