Dhanbad Drowning: धनबाद में कार्तिक पूर्णिमा स्नान में 9 युवक तेज धार में बहे, 5 लापता, कोयल नदी में भी एक बच्चा डूबा
धनबाद में कार्तिक पूर्णिमा के स्नान के दौरान दामोदर नदी की तेज धार में 9 युवक बहे। स्थानीय लोगों ने तीन को सुरक्षित निकाला लेकिन 5 युवक अभी भी लापता हैं। गढ़वा में भी कोयल नदी में 8 साल के बच्चे की मौत हुई। नदी किनारे प्रशासनिक सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। हादसे की पूरी जानकारी पढ़ें और जानें लापता लोगों का हाल।
धनबाद, 6 नवंबर 2025 – कार्तिक पूर्णिमा के पावन स्नान का पर्व झारखंड में आज दो अलग-अलग जगहों पर भयानक दुख लेकर आया। धनबाद के दामोदर नदी में जहां 9 युवक तेज धार की चपेट में आ गए, वहीं गढ़वा में एक 8 वर्षीय बच्चे की डूबने से मौत हो गई। इन दर्दनाक हादसों ने नदी किनारे सुरक्षा के इंतजामों पर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। एक ओर लोग त्योहार की खुशियाँ मना रहे थे, वहीं दूसरी ओर कई परिवारों में मातम पसर गया है, क्योंकि अभी भी कई युवक लापता हैं।
धनबाद: दामोदर नदी की तेज धार का खौफनाक हमला
धनबाद-बोकारो फोरलेन मार्ग पर तेलमच्चो पुल के पास दामोदर नदी में यह दर्दनाक घटना बुधवार दिन के लगभग 11 बजे हुई।
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9 युवक बहे: बाघमारा थाना अंतर्गत भीमकनाली के रहने वाले ये युवक कार्तिक पूर्णिमा का स्नान करने आए थे। नहाने के दौरान अचानक 9 युवक नदी की तेज धारा में चले गए और देखते ही देखते पानी में बहने लगे।
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बचाव: स्थानीय लोगों ने साहस दिखाते हुए नदी में छलांग लगा दी और तीन युवकों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता पाई।
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शव और लापता: एक युवक का शव बरामद हुआ है, लेकिन अभी भी 5 युवक लापता हैं। बाघमारा के सुमित राय और सन्नी चौहान समेत अन्य युवकों की तलाश जारी है, जिसके लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
गढ़वा: कोयल नदी ने ली मासूम की जान
इसी तरह की एक दुखद घटना गढ़वा जिले में भी सामने आई, जहां मझिआंव के खरसोता गांव के पास स्थित कोयल नदी में हादसा हुआ।
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पीड़ित: 8 वर्षीय आलोक कुमार अपने दोस्तों के साथ नदी में नहाने गया था, जो डूबने से मौत का शिकार हो गया। आलोक चारमुहान चौक निवासी रघु पासवान का बेटा था और पांचवीं कक्षा का छात्र था।
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पुलिस कार्रवाई: सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए गढ़वा सदर अस्पताल भेज दिया।
सुरक्षा पर बड़ा सवाल: नदी किनारे व्यवस्था की लापरवाही
कार्तिक पूर्णिमा जैसे बड़े पर्वों पर, जब हजारों लोग पवित्र नदियों में स्नान करने आते हैं, नदी किनारों पर प्रशासनिक सुरक्षा और तैनाती सबसे जरूरी होती है।
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ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: नदियों और घाटों पर हादसे भारत में बार-बार होते रहे हैं। अप्रत्याशित तेज धार कमजोर तैरने वाले लोगों के लिए हमेशा जानलेवा साबित होती रही है।
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लापरवाही: इन दोनों दर्दनाक घटनाओं ने प्रशासन की उस बड़ी लापरवाही को उजागर किया है, जिसके तहत त्योहारों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता नहीं किया गया। यदि गोताखोरों या विशेषज्ञों की टीम मौजूद होती, तो कई कीमती जानें बचाई जा सकती थीं।
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