Chakulia Corruption : चाकुलिया CHC में चंद महीनों पहले बना नया सरकारी भवन हुआ 'धराशायी', छत से गिरा प्लास्टर, मौत को छूकर लौटे कर्मचारी
चाकुलिया सीएचसी परिसर में नवनिर्मित बीपीएचयू भवन की छत का प्लास्टर अचानक गिरने से हड़कंप मच गया है। भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी इस सरकारी योजना और बाल-बाल बचे स्वास्थ्य कर्मियों की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
चाकुलिया/पूर्वी सिंहभूम, 07 मई 2026 – झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के चाकुलिया प्रखंड से सरकारी योजनाओं में हो रहे भ्रष्टाचार की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे स्वास्थ्य विभाग को हिलाकर रख दिया है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) परिसर में बना नवनिर्मित बीपीएचयू (BPHU) भवन निर्माण के कुछ ही महीनों बाद 'मौत का घर' साबित हो रहा है। गुरुवार को अचानक इस भवन की सिलिंग का प्लास्टर टूटकर जमीन पर आ गिरा। गनीमत यह रही कि उस वक्त वहां कोई मौजूद नहीं था, वरना एक बड़ी मानवीय त्रासदी तय थी।
हादसे का मंजर: जब छत से बरसने लगे सीमेंट के टुकड़े
यह घटना उस वक्त हुई जब सीएचसी के स्वास्थ्य कर्मी अपने रोजमर्रा के कार्यों में व्यस्त थे। बीपीएचयू भवन का उपयोग मुख्य रूप से मरीजों के रक्त नमूने (Blood Samples) लेने और उनके परीक्षण के लिए किया जाता है।
-
अचानक मची अफरा-तफरी: प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अचानक छत से भारी भरकम प्लास्टर के टुकड़े गिरने लगे। धमाके जैसी आवाज सुनकर कर्मी बाहर की ओर भागे।
-
बाल-बाल बची जान: कर्मियों ने बताया कि जिस स्थान पर प्लास्टर गिरा, ठीक वहीं बैठकर वे मरीजों का सैंपल लेते हैं। घटना के समय संयोग से न तो कोई मरीज वहां खड़ा था और न ही कोई लैब टेक्नीशियन, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
-
दहशत का माहौल: नए भवन की ऐसी जर्जर हालत देखकर स्वास्थ्य कर्मियों में अब वहां बैठकर काम करने को लेकर डर समा गया है।
ठेकेदार की मनमानी: मानक को ताक पर रखकर हुआ निर्माण
स्थानीय ग्रामीणों और स्वास्थ्य कर्मियों का सीधा आरोप है कि संवेदक (ठेकेदार) ने योजना के प्राक्कलन (Estimates) और मानकों की जमकर धज्जियां उड़ाई हैं।
-
घटिया सामग्री का खेल: कुछ ही महीनों में प्लास्टर का गिरना साफ दर्शाता है कि सीमेंट और बालू के मिश्रण में भारी हेराफेरी की गई है।
-
सवालों के घेरे में विभाग: भवन बनने के बाद जब इसे विभाग को सौंपा गया, तब गुणवत्ता की जांच क्यों नहीं की गई? क्या अधिकारियों की मिलीभगत से यह भ्रष्टाचार का खेल खेला गया?
प्रशासनिक चुप्पी और बढ़ता आक्रोश
इस घटना के बाद अब तक विभाग की ओर से किसी बड़ी कार्रवाई की खबर नहीं आई है, जिससे स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है।
-
मरीजों की सुरक्षा पर सवाल: यदि भविष्य में फिर ऐसी घटना होती है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर ऐसी लापरवाही अक्षम्य है।
-
जांच की मांग: स्थानीय प्रतिनिधियों ने मांग की है कि पूरे भवन की स्ट्रक्चरल ऑडिट (Structural Audit) कराई जाए और दोषी ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट कर उस पर प्राथमिकी दर्ज की जाए।
चाकुलिया सीएचसी का यह हादसा एक चेतावनी है कि सरकारी योजनाओं में 'चमक-धमक' के पीछे भ्रष्टाचार का दीमक लगा हुआ है। बीपीएचयू भवन का गिरता प्लास्टर केवल सीमेंट के टुकड़े नहीं, बल्कि सिस्टम की साख के गिरते टुकड़े हैं। स्वास्थ्य मंत्री और जिला उपायुक्त को इस मामले में हस्तक्षेप कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि विकास के नाम पर 'मौत के ढांचे' न खड़े किए जाएं।
What's Your Reaction?


