Bagbera Burglary: छत काटकर 15 लाख की डकैती, बागबेड़ा में श्राद्ध कर्म के लिए रखे पैसे और जेवर ले उड़े चोर, सोफे-पलंग तक को उखाड़कर की तलाश
बागबेड़ा के घाघडीह में चोरों ने बंद घर की छत काटकर 15 लाख की संपत्ति पर हाथ साफ कर दिया है। श्राद्ध कर्म के लिए बैंक से निकाले गए नकद और कीमती जेवर की चोरी की यह पूरी इनसाइड रिपोर्ट यहाँ देखें।
जमशेदपुर/बागबेड़ा, 10 अप्रैल 2026 – लौहनगरी के बागबेड़ा थाना क्षेत्र में अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब वे घरों की दीवारें ही नहीं, बल्कि छतें काटकर अंदर दाखिल हो रहे हैं। पूर्वी घाघडीह पंचायत की मां तारानी कॉलोनी (रोड नंबर दो) में एक दिल दहला देने वाली चोरी की वारदात सामने आई है। यहाँ चोरों ने गौरांग मंडल के बंद घर को निशाना बनाते हुए करीब 15 लाख रुपये की संपत्ति पार कर दी। सबसे दुखद बात यह है कि यह परिवार अपने पिता के श्राद्ध कर्म की तैयारियों में जुटा था और चोरों ने शोक की इस घड़ी में पूरे घर को उजाड़ दिया।
शोक के बीच डकैती: श्राद्ध के लिए जुटाया गया पैसा ले उड़े चोर
गौरांग मंडल के परिवार पर दुखों का पहाड़ शनिवार को टूटा था जब उनके पिता का निधन हो गया। पूरा परिवार अंतिम संस्कार और आगामी श्राद्ध कर्म के लिए घाटशिला के सुरदा गांव गया हुआ था।
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बैंक से निकाले थे पैसे: बुधवार को होने वाले श्राद्ध कार्यक्रम के खर्च के लिए परिवार ने हाल ही में बैंक से 1.5 लाख रुपये नकद निकाले थे। चोरों ने इसी मौके का फायदा उठाया।
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छत काटकर प्रवेश: घर सूना पाकर चोरों ने छत पर लगे टीन के शेड को काटा और अंदर दाखिल हो गए। उन्होंने मुख्य गेट को अंदर से बंद कर दिया ताकि कोई अचानक अंदर न आ सके।
घर में तांडव: पलंग और सोफे तक को नहीं बख्शा
चोरों ने इस वारदात को किसी पेशेवर गिरोह की तरह अंजाम दिया है। उन्होंने घर के हर कोने की इत्मीनान से तलाशी ली।
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मचाया भारी उत्पात: कीमती सामान की तलाश में चोरों ने केवल अलमारियां ही नहीं खोलीं, बल्कि पलंग और सोफे के गद्दे तक को फाड़कर और तोड़कर तलाशी ली।
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जेवरों की सफाई: चोरों ने घर से सोने की चेन, कान के आभूषण, चांदी के बर्तन और यहाँ तक कि घर के मंदिर से भगवान की चांदी की मूर्ति भी चुरा ली।
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कपड़ों का धंधा भी साफ: गौरांग मंडल घर से ही साड़ियों और रेडीमेड कपड़ों का व्यवसाय करते थे। चोरों ने डब्बों में पैक महंगी साड़ियां और लड़कों के नए जींस पैंट भी भारी मात्रा में लूट लिए।
'गैंग्स और गश्ती' के बीच असुरक्षित बस्तियां
बागबेड़ा और घाघडीह का इलाका जमशेदपुर के सबसे पुराने रिहायशी और औद्योगिक श्रमिक क्षेत्रों में से एक रहा है।
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अपराध का पुराना गढ़: ऐतिहासिक रूप से बागबेड़ा में चोरी और छिनतई की घटनाएं हमेशा से पुलिस के लिए चुनौती रही हैं। रेलवे ट्रैक के पास होने के कारण अपराधियों को भागने के लिए 'सेफ पैसेज' मिल जाता है।
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बदलती मोडस ऑपरेंडी: पहले चोर खिड़की या दरवाजे का ताला तोड़ते थे, लेकिन हाल के वर्षों में छत काटकर या वेंटिलेटर के रास्ते घुसने की घटनाएं बढ़ी हैं। यह दर्शाता है कि अपराधी अब अधिक समय लेकर और रेकी करके वारदात को अंजाम दे रहे हैं।
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पुलिस और पब्लिक का अविश्वास: घाघडीह में पुलिस गश्ती की कमी हमेशा से चर्चा का विषय रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि रात के समय गश्ती टीम केवल मुख्य सड़कों तक सीमित रहती है, जबकि कॉलोनियों के भीतर अपराधी बेखौफ घूमते हैं।
अगली कार्रवाई: पुलिस की तफ्तीश और स्थानीय आक्रोश
घटना का खुलासा तब हुआ जब परिवार घाटशिला से वापस लौटा और मुख्य दरवाजा अंदर से बंद मिला। छत के रास्ते अंदर जाने पर तबाही का मंजर सामने आया।
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फॉरेंसिक और डॉग स्क्वायड: बागबेड़ा पुलिस ने मौके पर पहुँचकर जांच शुरू कर दी है। संदिग्धों के फिंगरप्रिंट्स लिए जा रहे हैं।
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रेकी का शक: जिस तरह से चोरों को नकद और श्राद्ध के कार्यक्रम की जानकारी थी, पुलिस को अंदेशा है कि इस वारदात में कोई 'भीतरी' या आसपास का व्यक्ति शामिल हो सकता है जिसने परिवार के बाहर जाने की रेकी की थी।
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गश्ती बढ़ाने की मांग: स्थानीय लोगों ने थाने का घेराव करने की चेतावनी दी है। लोगों का कहना है कि अगर पुलिस सक्रिय होती, तो इतनी बड़ी वारदात को अंजाम देना मुमकिन नहीं था।
गौरांग मंडल के घर हुई यह चोरी केवल एक आर्थिक नुकसान नहीं है, बल्कि एक शोक संतप्त परिवार की भावनाओं पर करारा प्रहार है। पिता को खोने के गम में डूबे परिवार के पास अब श्राद्ध कर्म करने तक के पैसे नहीं बचे हैं। बागबेड़ा पुलिस के लिए यह साख का सवाल है कि वे इस 'छत काटने वाले गिरोह' को कब तक सलाखों के पीछे पहुँचाते हैं। फिलहाल, मां तारानी कॉलोनी के लोग दहशत में हैं और अपनी सुरक्षा के लिए खुद ही पहरा देने की बात कर रहे हैं।
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