NTTF Joy: गोलमुरी NTTF में तीन दिवसीय दिवाली फेस्ट का आयोजन, रंगोली, दिया मेकिंग और स्वयं निर्मित दिवाली हाउस प्रतियोगिता में छात्रों ने दिखाई प्रतिभा
गोलमुरी स्थित एनटीटीएफ में 17 से 19 नवंबर तक तीन दिवसीय दिवाली फेस्ट का आयोजन किया गया। छात्रों ने दिया सजावट, दिवाली घर मेकिंग, तोरण और रंगोली मेकिंग जैसी प्रतियोगिताओं में भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षा के साथ संस्कार का समावेश करना था।
जमशेदपुर का औद्योगिक शहर सिर्फ तकनीकी शिक्षा का केंद्र नहीं है, बल्कि यह संस्कार और संस्कृति के समृद्ध मेल का भी प्रतीक है। गोलमुरी स्थित आर डी टाटा तकनीकी संस्थान, एनटीटीएफ ने प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी तीन दिवसीय दीवाली मेला का आयोजन करके इस बात को पुष्ट कर दिया। यह फेस्ट 17 नवंबर से 19 नवंबर तक चला, जिसका मुख्य उद्देश्य तकनीकी शिक्षा ले रहे छात्रों के बीच शिक्षा के साथ संस्कार का भी समावेश करना था।
मेले का शुभारंभ कॉलेज की लीड इंस्टीट्यूशन बी के सिंह, मैनेजर मनस्विता शर्मा, प्राचार्य प्रीता जॉन एवं उप्राचार्य रमेश राय द्वारा किया गया। पहले ही दिन से संस्थान में एक उत्सवी और सकारात्मक माहौल बन गया था, जिसमें छात्रों ने बढ़-चढ़कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
प्रतिभा का रंगारंग प्रदर्शन: रंगोली से लेकर नृत्य समूह तक
इस तीन दिवसीय फेस्ट में कई रोचक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें छात्रों ने अपनी सृजनात्मकता का अद्भुत प्रदर्शन किया।
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पहले दिन (17 नवंबर): दिया सजावट और तोरण मेकिंग प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। तोरण मेकिंग में भूमि, ख़ुशी, मान्यता स्वीटी ने प्रथम स्थान हासिल किया।
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दूसरे दिन (18 नवंबर): दिवाली घर मेकिंग प्रतियोगिता में छात्रों ने अपने हाथों से दिवाली के लिए छोटे-छोटे सुंदर घर बनाए। देवेश महतो और उनकी टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।
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अंतिम दिन (19 नवंबर): पूजा स्थान सजावट प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जो त्योहार के संस्कार पक्ष को दर्शाता है।
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सांस्कृतिक झलक: नृत्य समूह प्रतियोगिता ने सभी का मन मोह लिया। रिया कुमारी और उनकी टीम ने 'मराठी थीम' पर नृत्य प्रस्तुत करके प्रथम स्थान प्राप्त किया। दूसरे स्थान पर 'बिहारी थीम' वाले समूह और तीसरे स्थान पर 'मैथिली (झिझिया)' थीम वाले समूह ने अपनी जगह बनाई।
शिक्षा के साथ संस्कार: आयोजन का मूल भाव
एनटीटीएफ में इस तरह के आयोजन का होना यह साबित करता है कि संस्थान सिर्फ छात्रों को तकनीकी रूप से सक्षम नहीं बनाना चाहता, बल्कि उन्हें अपनी संस्कृति और मूल्यों से भी जोड़ना चाहता है।
दिवाली कमेटी (ज्योति ठाकुर, मुनमुन गोराई, मनीषा मुंडा) ने इस आयोजन को सफलतापूर्वक संभालने में अहम भूमिका निभाई। कार्यक्रम में उपस्थित वरुण कुमार (प्रशासनिक अधिकारी) समेत कई अन्य शिक्षक गण भी शामिल रहे, जिन्होंने छात्रों का उत्साह बढ़ाया।
एनटीटीएफ का यह तीन दिवसीय उत्सव एक सकारात्मक संदेश देता है कि आज के युग में जब तकनीकी शिक्षा का दौर है, तब भी हमारे सांस्कृतिक मूल्यों और त्योहारों के महत्व को बनाए रखना कितना आवश्यक है। यह फेस्ट छात्रों के लिए तनाव मुक्त होकर अपनी सृजनात्मक क्षमताओं को खोजने का एक शानदार अवसर था।
आपकी राय में, तकनीकी शिक्षा संस्थानों को छात्रों में सांस्कृतिक संस्कार को बढ़ावा देने और उन्हें तनाव मुक्त रखने के लिए साल भर कौन से दो सबसे अनोखे और प्रभावी गतिविधियां आयोजित करनी चाहिए?
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