West Singhbhum Murder : मझगांव में दिव्यांग की गला दबाकर हत्या करने वाले डुगरू को सजा, कोर्ट ने लगाया भारी जुर्माना, खौफनाक वारदात का अंत
पश्चिमी सिंहभूम के मझगांव में दिव्यांग सुनिया तिरिया की गला दबाकर हत्या करने वाले आरोपी गलाये तिरिया उर्फ डुगरू को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। इस चौंकाने वाले अदालती फैसले और 15 हजार रुपये के जुर्माने की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
चाईबासा/मझगांव, 31 मार्च 2026 – झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले से न्याय की एक ऐसी मिसाल सामने आई है जिसने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। मझगांव थाना क्षेत्र के हल्दिया मुंडासाई में एक निस्सहाय दिव्यांग व्यक्ति की गला दबाकर हत्या करने वाले अपराधी को अदालत ने उम्रकैद की सख्त सजा सुनाई है। आरोपी का नाम गलाये तिरिया उर्फ डुगरू तिरिया है। इस मामले की सबसे हैरान करने वाली बात आरोपी का साधारण व्यक्तित्व है; उसे देखकर कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता था कि इस शांत दिखने वाले चेहरे के पीछे एक इतना क्रूर हत्यारा छिपा हो सकता है। जब पुलिस उसे कोर्ट लेकर पहुँची, तो वहां मौजूद हर शख्स उसे ही ताक रहा था, मानो यकीन करना मुश्किल हो कि एक मासूम दिखने वाला व्यक्ति इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दे सकता है।
दिसंबर की वो काली रात: गला दबाकर ली थी जान
घटना की जड़ें 10 दिसंबर 2023 की उस खौफनाक रात से जुड़ी हैं, जिसने मझगांव के हल्दिया टोला को सन्न कर दिया था।
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दिव्यांग पर प्रहार: आरोपी डुगरू तिरिया ने अपने ही गांव के एक दिव्यांग व्यक्ति सुनिया तिरिया को अपना निशाना बनाया। सुनिया शारीरिक रूप से अक्षम थे और खुद का बचाव करने की स्थिति में नहीं थे।
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बेरहमी की हद: पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि डुगरू ने सुनिया का गला तब तक दबाए रखा जब तक कि उनके शरीर की हरकत बंद नहीं हो गई।
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तुरंत हुई थी गिरफ्तारी: हत्या की खबर फैलते ही मझगांव पुलिस ने तत्परता दिखाई थी और घटना के कुछ ही घंटों बाद डुगरू को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया था। तब से वह जेल की सलाखों के पीछे था।
कोर्ट का कड़ा फैसला: उम्रकैद और जुर्माना
पश्चिमी सिंहभूम जिला अदालत ने सभी गवाहों और सबूतों को सुनने के बाद डुगरू तिरिया को हत्या का दोषी करार दिया।
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आजीवन कारावास: न्यायाधीश ने मामले की गंभीरता और एक दिव्यांग की हत्या को देखते हुए डुगरू को उम्रकैद (Life Imprisonment) की सजा सुनाई।
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आर्थिक दंड: कोर्ट ने दोषी पर 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि जुर्माने की यह रकम अदा नहीं की जाती है, तो डुगरू की सजा की अवधि और बढ़ाई जाएगी।
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भीड़ की उत्सुकता: सजा सुनाए जाने के वक्त कोर्ट परिसर में काफी भीड़ थी। लोग उस 'मासूम' दिखने वाले अपराधी को देखना चाहते थे जिसने दिव्यांग की जान लेने जैसा जघन्य पाप किया था।
मझगांव और चाईबासा: ग्रामीण इलाकों में अपराध का इतिहास
पश्चिमी सिंहभूम का यह इलाका अपनी शांतिप्रिय जनजातीय संस्कृति के लिए जाना जाता है, लेकिन हाल के वर्षों में यहाँ आपसी रंजिश के कारण हत्याओं के मामलों में इजाफा हुआ है।
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कमजोर वर्गों पर हमला: दिव्यांगों या बुजुर्गों को निशाना बनाने की घटनाएं समाज की गिरती मानसिकता को दर्शाती हैं। सुनिया तिरिया की हत्या ने गांव के लोगों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा कर दी थी।
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पुलिस की चार्जशीट: मझगांव पुलिस ने इस मामले में रिकॉर्ड समय में चार्जशीट दाखिल की थी, जिससे ट्रायल जल्दी पूरा हो सका और आरोपी को सजा मिल पाई।
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अंधविश्वास या सनक: हालांकि इस हत्या के पीछे का सटीक मोटिव कभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुआ, लेकिन पुलिस इसे आपसी विवाद और आरोपी की अचानक उपजी सनक का परिणाम मान रही है।
अगला कदम: जेल की कालकोठरी और सुधारात्मक प्रक्रिया
डुगरू तिरिया के लिए अब वापसी का कोई रास्ता नहीं है। उसे अब अपनी पूरी जिंदगी जेल की चहारदीवारी के भीतर बितानी होगी।
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जेल शिफ्टिंग: सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस ने उसे कड़ी सुरक्षा के बीच जेल भेज दिया है। वहां उसे अब 'कैदी नंबर' के साथ अपनी पहचान बनानी होगी।
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न्याय की जीत: सुनिया तिरिया के परिजनों ने इस फैसले पर संतोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि भले ही सुनिया अब वापस नहीं आएंगे, लेकिन उनके हत्यारे को सजा मिलने से समाज में एक कड़ा संदेश गया है।
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सतर्कता का संदेश: चाईबासा पुलिस ने इस फैसले के बाद लोगों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें ताकि अपराधों को समय रहते रोका जा सके।
मझगांव की यह घटना हमें याद दिलाती है कि अपराधी का कोई चेहरा नहीं होता। 10 दिसंबर 2023 से शुरू हुई यह कानूनी लड़ाई आज 31 मार्च 2026 को अपने तार्किक अंत तक पहुँची है। एक दिव्यांग की हत्या समाज के माथे पर कलंक थी, जिसे कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाकर धोने की कोशिश की है। डुगरू तिरिया का मामला उन सभी के लिए सबक है जो कानून को अपनी जेब में समझते हैं। क्या समाज अब दिव्यांगों और कमजोरों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से लेगा? फिलहाल, मझगांव की हवाओं में एक सुकून है कि सुनिया के हत्यारे को उसके किए की सजा मिल गई है।
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